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ड्रोन हमले के बाद तेल की कीमत में हाहाकार

सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अराम्को की रिफाइनरी पर यमनी फोर्सेज के 10 ड्रोन से हमले से तेल की मंडी में हाहाकार मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के आरक्षित तेल के भंडार को बाजार में लाने का आदेश दिया है ताकि विश्व स्तर पर तेल की कीमत नियंत्रित रहे।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 16 Sep 2019 11:06 AM GMT

ड्रोन हमले के बाद तेल की कीमत में हाहाकार
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रियाद: सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अराम्को की रिफाइनरी पर यमनी फोर्सेज के 10 ड्रोन से हमले से तेल की मंडी में हाहाकार मच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के आरक्षित तेल के भंडार को बाजार में लाने का आदेश दिया है ताकि विश्व स्तर पर तेल की कीमत नियंत्रित रहे। ट्रम्प ने एक ट्वीट में कहा, ‘सऊदी अरब पर हुए हमले के मद्देनजर, मैंने बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरत पडऩे पर रणनैतिक पेट्रोलियम भंडार के इस्तेमाल का आदेश दिया है।’

अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान, यमनी सेना द्वारा सऊदी अरब पर की गयी कार्रवाई के बाद आया है। बम हमले के कारण ब्रेन्ट कच्चे तेल की कीमत में 19 फीसदी की तेज उछाल आई है और प्रति बैरल कीमत 71 डॉलर से आगे चली गई। जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और इसकी प्रति बैरल कीमत बढक़र 63.34 डालर हो गई है।

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सऊदी अरब पिछले पांच साल से यमनी विद्रोहियों के खिलाफ जंग छेड़े हुए है। इन हमलों के जवाब में यमनी फोर्सेज ने शनिवार को अराम्को के मुख्य तेल प्रतिष्ठान अब्कीक और खुरैस पर 10 ड्रोन से हमले किए। इस हमले के बाद सऊदी अरब में कच्चे तेल के उत्पादन में 50 फीसदी कमी आयी है और इस कंपनी में कच्चे तेल का उत्पादन घट कर 57 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया है। बम हमले से जितना नुकसान हुआ है उससे ये कह पाना मुश्किल है कि इन रिफाइनरी में तेल का उत्पादन कब शुरू हो पायेगा। फिर भी कई हफ्ते तक रिफाइनरी ठप रहने की आशंका है।

इस हमले के साथ अमेरिका और ईरान तथा सऊदी अरब और इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया है। अमरिका ने हमले के लिये ईरान को दोषी ठहराया है। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका तैयार बैठा है और उसे सऊदी अरब से यह जानने का इंतजार है कि हमला किसने किया है। ईरान ने अमेरिका के आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि अमेरिका उस पर हमला करने के लिए बहाने ढूंढ रहा है।

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नई आफत

सऊदी अरब पर हमले से मध्यपूर्व की राजनीति उस दौर में पहुंच गई है जिसका सबको डर था। डर कि कहीं तेल रिफाइनरी और तेल कुंओं पर हमले न शुरू हो जाएं। इराक और लीबिया इसके दुष्परिणाम देख चुके हैं। सऊदी अरब में तेल सेक्टर के सबसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर अब्कीक और खुरैस के तेल मैदान और रिफाइनरियां हैं। इनकी तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था को यमनी ड्रोन विमानों ने भेद दिया। दुनिया भर में तेल के बाजार को स्थिर रखने में इस तेल मैदान के इन्फ्रास्ट्रक्चर का बहुत बड़ा हाथ है।

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रीढ़ की हड्डी

सऊदी अरब के तेल सेक्टर में अब्कीक तेल मैदान को रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। वर्ष 2018 में इस तेल मैदान ने सऊदी अरब के कुल तेल उत्पादन का 50 प्रतिशत भाग मुहैया कराया था। सारी दुनिया में प्रयोग होने वाले हर 20 बैरल तेल में एक बैरल तेल यहीं का था। सऊदी अरब के पूर्वी इलाकों से निकलने वाले तेल को पश्चिमी सऊदी अरब में लाल सागर के तट तक पाइप लाइन से पहुंचाया जाता है। अब्कीक पर हुए हमले के बाद अब यह सप्लाई लाइन भी कट गई है। अब सऊदी अरब की कोशिश होगी कि वह तेल निर्यात की मात्रा कम न होने दे और इसके लिए वह अपने रिजर्व तेल भंडारों का प्रयोग करे। ये रिजर्व भंडार सऊदी अरब के अलावा मिस्र, जापान और हालैंड में भी हैं लेकिन वर्ष 2016 से इन तेल भंडारों में तेल की मात्रा लगातार कम होती चली गई है।

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