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इस इस्लामिक देश में खतना हुआ बैन, महिलाओं को मिला बेइंतिहा दर्द से छुटकारा

सऊदी अरब के बाद अब सूडान ने भी ऐतिहासिक फैसला लिया है। दशकों से महिला अधिकारियों के हनन का गवाह रहे सूडान ने ऐसा फैसला लिया है जिसकी दुनिया में तारीफ हो रही है।

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Updated on: 13 July 2020 2:35 PM GMT
इस इस्लामिक देश में खतना हुआ बैन, महिलाओं को मिला बेइंतिहा दर्द से छुटकारा
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नई दिल्ली: सऊदी अरब के बाद अब सूडान ने भी ऐतिहासिक फैसला लिया है। दशकों से महिला अधिकारियों के हनन का गवाह रहे सूडान ने ऐसा फैसला लिया है जिसकी दुनिया में तारीफ हो रही है। 30 साल के इस्लामिक कट्टरपंथी शासन के बाद सूडान की सरकार ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं जिसका वहां की महिलाओं को फायदा मिलेगा।

सूडान की सरकार ने फैसला लेते हुए महिलाओं के खतने पर रोक लगा दिया है। सामाजिक भेदभाव झेल रहीं महिलाओं को इस रुढ़िवादी परंपरा वी वजह से बेइंतिहा दर्द का सामना करना पड़ता था। अब उन्हें इस क्रूर परंपरा से छुटकारा मिल जाएगा। इसके साथ ही गैर-मुस्लिमों को देश के अंदर निजी तौर पर शराब पीने की इजाजत भी दे दी है।

गौरतलब है कि सूडान उन देशों में शामिल है, जहां महिलाओं के खतने की दर काफी ज्यादा रही है। सूडान के कानून मंत्री नसरेदीन अब्दुलबारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सूडान की सरकार ऐसे कानूनों को खत्म करने में लग गई है।

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उनका कहना है कि हम ऐसे किसी भी कानून को देश में नहीं रहने देंगे जो मानवाधिकारों के खिलाफ हो, इसीलिए महिलाओं के खतना पर अब रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, गैर मुस्लिमों को अब निजी तौर पर शराब के सेवन की अनुमति होगी।

सूडान में रहने वाले करीब 3 प्रतिशत लोग गैर-मुस्लिम है। पूर्व राष्ट्रपति जाफर निमीरी ने 1983 में इस्लामिक कानून लागू करने के बाद देश में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया था। 30 साल सत्ता में रहने वाले उमर अल-बशीर को पिछले साल सरकार से बेदखल कर दिया गया था।

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इसके बाद सुडान की नई सरकार ने कहा कि हम नए सूडान का निर्माण करेंगे। नए सूडान में कोई भेदभाव नहीं होगा। मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले कानूनों को खत्म करेंगे। देंगे। बता गें कि बशीर कट्टर इस्लामिक कानूनों के पक्षधर थे।

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मुसलमानों के लिए शराब पर प्रतिबंध जारी रहेगा। अगर वह शराब पीने के दोषी मिले तो उन पर इस्लामी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी जो पहले होती रही है।

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