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तीसरे विश्व युद्ध की आहट! जानिए US-ईरान में कौन ताकतवर, कौन देश किसके साथ

अमेरिकी हमले में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद पूरे मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। ईरान ने बदले की कार्रवाई की है और दो अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट से हमला किया है। तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 5 Jan 2020 10:48 AM GMT

तीसरे विश्व युद्ध की आहट! जानिए US-ईरान में कौन ताकतवर, कौन देश किसके साथ
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नई दिल्ली: अमेरिकी हमले में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद पूरे मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। ईरान ने बदले की कार्रवाई की है और दो अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट से हमला किया है। तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान में 52 ठिकाने उनके निशाने पर हैं जिन्हें वे बर्बाद कर सकते हैं।

ईरान जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद दुनिया के देशों ने इलाके में शांति बनाने की अपील की है। तकरीबन सभी देशों ने दोनों पक्षों से संयम रखने की बात कही। हालांकि अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई कम नहीं कर रहा है। अमेरिका की कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों में जंग के खतरे के बीच यह सवाल खड़ हो रहा है कि अगर दोनों देश के बीच युद्ध छिड़ता है तो कौ देश किसके साथ होगा और कितना ताकतवर है।

हालांकि कहा जा रहा है कि कोई भी देश नहीं चाहता कि युद्ध हो। किसी भी तरह की सीधी लड़ाई से पूरी दुनिया को नुकसान होगा, हालांकि सवाल सामने है कि अगर युद्ध हुआ तो और कौन किसके साथ होगा।

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माना जा रहा है कि ईरान अमेरिका से सीधी लड़ाई नहीं लड़ सकता है और ऐसी लड़ाई में उसे दुनिया के बाकी किसी देश का समर्थन मिलना कठिन है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि अमेरिका के खिलाफ ईरान प्रॉक्सी वार की शुरु कर सकता है। इसमें उसे कुछ देशों के सशस्त्र चरमपंथी गुट समर्थन दे सकते हैं।

अमेरिका के खिलाफ ईरान के ऐसे युद्ध में उसे लेबनान, यमन, इराक और सीरिया का समर्थन हासिल हो सकता है। कोई भी देश इसमें खुलकर सामने नहीं आना चाहेगा, लेकिन यही बात अमेरिका के साथ भी है। ईरान के साथ जंग में अमेरिका के मित्र राष्ट्र भी शामिल नहीं होना चाहेगा।

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मिडिल ईस्ट में इजरायल, खाड़ी के देश और सऊदी अरब जैसे देश अमेरिका का समर्थन करते हैं, लेकिन वो ईरान के साथ जंग में तब तक अमेरिका का साथ नहीं देंगे, जब तक उन देशों पर ईरान हमले नहीं करता है।

रूस और चीन किसके साथ

रूस और चीन ने ईरान पर अमेरिकी हमले पर आपत्ति जताई है। रूस ने इसे अमेरिका की अवैध कार्रवाई करार दिया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से कहा है कि अमेरिका का ईरान पर हमला अवैध है। उसे ईरान के साथ बात करनी चाहिए। लावरोव इस बात से नाराज थे कि अमेरिका ने इस तरह की कार्रवाई से पहले जानकारी नहीं दी।

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पुतिन की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया है कि कासिम सुलेमानी के मारे जाने से मिडिल ईस्ट के हालात और बिगड़ेंगे। मारे गए कासिम सुलेमानी ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद 29 जुलाई 2015 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थ। उस वक्त तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन एफ कैरी ने इस पर आपत्ति जताई थी।

माना जा रहा है कि रूस, ईरान में अमेरिकी कार्रवाई का विरोध करेगा, लेकिन ईरान के साथ जंग में वो नहीं कूदना चाहेगा। वो भी तब, जब रूस ने इराक के युद्ध और लीबिया की सरकार गिराने में अमेरिका का साझीदार रहा है।

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चीन का रूख भी रूस की तरह हो सकता है। चीन ने ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी के अमेरिकी हवाई हमले में मारे जाने पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है। वो दोनों पक्षों से शांति की अपील किया।चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि बीजिंग इस मामले पर चिंतित है और वो लगातार मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर नजर बनाए हुए है।

चीनी प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के हिसाब से चलना चाहिए। चीन ने कहा कि अमेरिका से कहना चाहते हैं कि वो संयम रखे और तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए किसी तरह की कार्रवाई न करे। ब्रिटेन ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना नहीं की है, लेकिन उसने इलाके में शांति स्थापित करने के लिए संयम रखने की अपील की है।

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कौन कितना ताकतवर

अमेरिका के पास एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों की संख्या कुल 10170 है तो वहीं ईरान के पास मात्र 512 है। अगर सैनिक की बात करें तो अमेरिका के पास 12 लाख 81 हजार सैनिक हैं जबकि ईरान के पास सैनिकों की संख्या मात्र 5 लाख 23 हजार है। अमेरिका के पास टैंक और तोप कुल 48 हजार 422 है तो वहीं ईरान के पास 8 हजार 577 है।

अगर बात जहाज और पनड्डुबियों की बात करें तो अमेरिका के पास यह संख्या 415 है जबकि ईरान के पास मात्र 398। दोनों देशों के रक्षा बजट में भी भारी अंतर है। अमेरिका का रक्षा बजट 716 बिलियन डॉलर है जबकि ईरान का बजट मात्र 6.3 बिलियन डॉलर है।

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