‘गांव छोड़ब नाही, थोड़ा प्रेशर मारो...पानी की बौछारों पर थिरके छात्र, स्ट्रेचर पर पहुंचे नेता, रांची में गजब प्रदर्शन
Ranchi Assembly March Water Cannon: रांची में JPSC और JSSC CGL परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारों अभ्यर्थियों ने विधानसभा घेराव मार्च निकाला। पुलिस की पानी की बौछारों के बीच छात्र नाचते और 'गांव छोड़ब नाही' गीत गाते नजर आए।
Ranchi Assembly March Water Cannon: "गांव छोड़ब नाही, जंगल छोड़ब नाही..." कभी ब्रिटिश हुकूमत के जुल्म के खिलाफ आंदोलन का प्रतीक बना यह ऐतिहासिक गीत सोमवार को राजधानी रांची की सड़कों पर एक बार फिर गूंज उठा। जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं में हुई धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने इसी पारंपरिक गीत के जरिए अपनी आवाज बुलंद की। अपनी जड़ों, माटी और रोजगार के हक के लिए उतरे युवाओं ने साफ कर दिया है कि यह महज एक गाना नहीं, बल्कि झारखंडी अस्मिता और शोषण के खिलाफ 'उलगुलान' यानी क्रांति का शंखनाद है।
वाटर कैनन चलने पर थिरकने लगे उग्र अभ्यर्थी
विधानसभा घेराव के लिए निकले हजारों अभ्यर्थियों को रोकने के लिए प्रशासन ने जगन्नाथपुर मंदिर के पास भारी बैरिकेडिंग और कांटों के तार लगा रखे थे। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, तो पुलिस ने उन पर ठंडे पानी की तेज बौछारें छोड़ दीं। हालांकि, इस कार्रवाई से डरने के बजाय हाथों में तिरंगा लिए युवा उसी पानी के बीच खुशी से झूमने और नाचने लगे। उग्र अभ्यर्थियों ने मुस्कुराते हुए पुलिसकर्मियों से कहा, "भैया, थोड़ा और प्रेशर मारो, बहुत गर्मी है।" युवाओं के इस हौसले ने सुरक्षाकर्मियों को भी हैरत में डाल दिया।
10.5 किलो वजन घटने के बाद भी स्ट्रेचर पर पहुंचे नेता
इस पूरे आंदोलन की कमान संभाल रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो पिछले 9 दिनों से अनशन पर बैठे हैं, गंभीर हालत के बावजूद एम्बुलेंस से प्रदर्शन स्थल पहुंचे। भूख हड़ताल के कारण 10.5 किलो वजन कम होने के बाद भी वे स्ट्रेचर पर बैठकर मार्च का हिस्सा बने। हाथों में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का चित्र थामे उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए यह अहिंसक संघर्ष जारी रहेगा और सरकार को युवाओं की जायज मांगें स्वीकार करनी ही होंगी।
CM के जन्मदिन पर भी कोई आश्वासन नहीं
संयोग से सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन भी था, जिसके चलते छात्र बार-बार अपनी मांगें दोहराते हुए सरकार से संवेदनशील फैसले की गुहार लगाते रहे। हालांकि, सरकार की तरफ से कोई नया बयान सामने नहीं आया। अभ्यर्थियों ने हाथों में तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग दर्ज थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया गया है, लेकिन वे बिना न्याय लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं।
शांतिपूर्ण आंदोलन से पूरे तंत्र को हिलाया
तनावपूर्ण माहौल के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अनुशासन बनाए रखा और राष्ट्रीय गान के साथ अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक विद्वेष के लिए नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए है। पुलिसिया सख्ती और पानी की बौछारों के बीच जिस तरह युवाओं ने संयम और दृढ़ता का परिचय दिया, उसने यह साबित कर दिया है कि झारखंड के अभ्यर्थियों का यह 'उलगुलान' अब किसी के रोके रुकने वाला नहीं है।