Hindi Language Controversy: ‘यूपी-बिहार के हिंदी भाषी तमिलनाडु में टॉयलेट साफ करते हैं’, डीएमके नेता के विवादित बयान पर छिड़ा घमासान

Hindi Language Controversy: पार्टी के एक और सीनियर नेता का विवादित बयानों से भरा वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये वीडियो पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन का है।

Written By :  Krishna Chaudhary
Update: 2023-12-24 05:38 GMT

Hindi Language Controversy: आम चुनाव से पहले देश में उत्तर बनाम दक्षिण और हिंदी बनाम गैर हिंदी भाषी का मुद्दा रह रहकर गरमा रहा है। तमिलनाडु में सरकार चला रही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेताओं की ओर से उत्तर भारतीय और सनातन विरोधी बयान देने का सिलसिला जारी है। पार्टी के एक और सीनियर नेता का विवादित बयानों से भरा वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये वीडियो पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन का है, जिसमें वह कह रहे हैं कि ‘यूपी-बिहार के हिंदी भाषी तमिलनाडु में टॉयलेट साफ करते हैं’।

सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होते ही घमासान मच गया है। चूंकि डीएमके राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा चुनाव के लिए बने विपक्षी गठबंधन इंडिया की सबसे अहम घटक दलों में शामिल है और कांग्रेस इस पार्टी के साथ तमिलनाडु में सरकार भी चला रही है, इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और उत्तर भारत के अन्य विपक्षी नेताओं को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मारन का विवादित वीडियो शेयर कर जोरदार हमला बोला है।

क्या है दयानिधि मारन का विवादित बयान ?

वायरल हो रहे वीडियो क्लिप में डीएमके सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन को अंग्रेजी और हिंदी सीखने वाले लोगों की तुलना करते सुना जा सकता है। जिसमें वो कहते हैं – यूपी-बिहार के हिंदी बोलने वाले लोग हमारे राज्य (तमिलनाडु) में आकर टॉयलेट और सड़क साफ करते हैं। वे सिर्फ हिंदी सीखते हैं, उन्हें अंग्रेजी बोलनी नहीं आती। जो अंग्रेजी सीखते हैं, वे आईटी कंपनियों में अच्छी नौकरी करते हैं। वायरल वीडियो कब और कहां का है, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।

मारन के वीडियो पर बीजेपी हुई हमलावर

डीएमके नेता दयानिधि मारन के विवादित वीडियो पर अब भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस समेत उत्तर भारत के अन्य प्रतिद्वंदी सियासी दलों सपा, जदयू और राजद पर हमलावर हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने वीडियो को शेयर करते हुए एक्स पर लिखा, एक बार फिर डिवाइड एंड रूल कार्ड खेलने का प्रयास किया गया। पहले राहुल गांधी ने उत्तर भारतीय मतदाताओं का अपमान किया। इसके बाद रेवंत रेड्डी ने बिहार के डीएनए को गाली दी। फिर डीएमके सांसद सेंथिल कुमार ने उत्तर भारतीय राज्यों को गौमूत्र राज्य कहा, अब दयानिधि मारन उत्तर भारतीयों और हिंदी भाषियों का अपमान करते हैं।

पूनावाला ने इंडिया अलायंस पर हमला बोलते हुए कहा, हिंदुओं/सनातन को गाली देना, फिर बांटो और राज करो का कार्ड खेलना ही इंडी गठबंधन का डीएनए है। उन्होंने पूछा, नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव, लालू यादव, कांग्रेस, अखिलेश यादव इस पर कब स्टैंड लेंगे। बीजेपी प्रवक्ता ने मारन के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए यूपी – बिहार के इंडिया ब्लॉक के नेताओं की चुप्पी पर निशाना साधा।

वहीं, बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि दयानिधि मारन की मानसिक स्थिति खराब हो गई है। बिहारी एक अस्मिता है। मगध ने भारत को एक स्वर्णिम काल दिया है। उन्होंने नीतीश-लालू पर हमला बोलते हुए कहा कि INDI गठबंधन के लोगों को इसका जवाब देना चाहिए, नहीं तो नीतीश कुमार और लालू यादव को सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।

तेजस्वी यादव ने बयान की निंदा की

डीएमके के किसी नेता के विवादित बयान के कारण इंडिया गठबंधन में एकबार फिर असहज स्थिति पैदा हो गई है। बीजेपी के ताबड़तोड़ हमले के बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बयान आया है। उन्होंने कहा कि हम ऐसे बयानों की निंदा करते हैं। दूसरे राज्यों के नेताओं को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए। तेजस्वी ने कहा कि बिहार और यूपी के मजदूरों की पूरे देश में लोग मांग करते हैं, अगर वे न जाएं तो उनकी ज़िंदगी ठप्प हो जाएगी।

सेंथिल कुमार ने क्या दिया था विवादित बयान

इससे पहले पांच दिसंबर को लोकसभा में धर्मपुरी से डीएमके सांसद सेंथिल कुमार ने विवादित बयान दिया था। कुमार ने पांच राज्यों में से तीन राज्यों में बीजेपी की जीत पर कहा था कि भारतीय जनता पार्टी की ताकत केवल हिंदी बेल्ट के उन राज्यों में ही है, जिन्हें हम आमतौर पर गोमूत्र राज्य कहते हैं। दक्षिण के राज्यों में बीजेपी को घुसने नहीं दिया गया है। इस बयान पर संसद में हंगामा मच गया। कांग्रेस को भी इसका विरोध करना पड़ा, जिसके बाद डीएमके सांसद ने अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए इसे वापस लिया।

इंडिया गठबंधन में भी हिंदी को लेकर है विवाद

इंडिया गठबंधन में कई हिंदी भाषी और गैर हिंदी भाषी राज्यों की रीजनल पार्टियां शामिल हैं। यहां भी हिंदी भाषा को लेकर तनातनी देखी जा रही है। हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुई चौथी बैठक में ये विवाद खुलकर सामने आ गया था। दरअसल, बिहार सीएम नीतीश कुमार ने जब हिंदी में बोलना शुरू किया तो डीएमके सांसद टी आर बालू ने राजद सांसद मनोज झा से इसका अंग्रेजी अनुवाद मांग लिया। झा ने जब इसकी अनुमति नीतीश से मांगी तो वे भड़क गए। बिहार सीएम हिंदी भाषा के महत्व को समझाने लगे और कहने लगे कि हरेक हिंदुस्तानी को यह भाषा सीखना जरूरी है। नीतीश कुमार के इस बर्ताव पर डीएमके नेता असहज महसूस करने लगे, तब सीपीआई नेता डी राजा ने दखल देते हुए मामले को शांत कराया। 

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