नक्सलियों के गढ़ में गरजे गृहमंत्री अमित शाह, अगले साल तक नक्सलवाद खत्म करने का किया ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। 2025 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2024 के बीच नक्सल हिंसा की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है।;

Update:2025-04-05 16:01 IST

Home Minister Amit Shah in Dantewada (Photo: Social Media)

Amit Shah in Dantewada: मोदी की केंद्र सरकार लगातार नक्सलवाद मुक्त भारत बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से आज मोदी सरकार की नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अगले साल तक भारत से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर क्षेत्र अब आतंकवाद से मुक्त होने के कगार पर है और विकास की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

गृहमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य नक्सलवाद मुक्त भारत बनाना है। उन्होंने मोदी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि भारत में नक्सलवाद के खिलाफ विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं और सरकार अपने प्रयासों में पूरी तरह सफल होगी। उनका कहना था कि आने वाले समय में भारत को पूरी तरह से नक्सलवाद मुक्त बना दिया जाएगा, ताकि किसी भी नागरिक को नक्सलवादी गतिविधियों का शिकार न होना पड़े।

लगातार नक्सलियों के खिलाफ चलाया जा रहा ऑपरेशन

कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ के बीजापुर इलाके में नक्सलियों द्वारा किए गए हमले में भारतीय सेना ने 31 नक्सलियों को मार गिराया था, जिससे उनकी स्थिति कमजोर हुई है। केंद्रीय गृहमंत्री ने बताया कि पहले नक्सलियों का मनोबल बढ़ा हुआ था, लेकिन भारत सरकार की सख्त नीति के चलते अब उनकी ताकत कमजोर हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। 2025 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2024 के बीच नक्सल हिंसा की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि 2004 से 2014 के बीच नक्सल हिंसा की कुल 16,463 घटनाएं हुई थीं। इसके अलावा, पहले भारत में नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 38 थी, जो अब घटकर केवल 6 रह गई है। इससे यह स्पष्ट है कि भारत में नक्सलवाद के प्रभाव वाले जिलों की संख्या लगातार कम हो रही है, और भविष्य में कोई भी जिला इससे प्रभावित नहीं रहेगा।

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