Morbi Bridge Collapse:कौन हैं ओरेवा ग्रुप के मालिक जयसुख पटेल, जिसकी बनाई चीज़ें मिलती हैं घर-घर में

Morbi Bridge Collapse के बाद पुल संचालन करने वाली कम्पनी ओरेवा सुर्ख़ियों में है। कंपनी पर कई गंभीर आरोप हैं। क्या आपको पता है इस कंपनी के मालिक कौन हैं। जानिए यहां...

Written By :  aman
Update: 2022-11-02 13:58 GMT

ओरेवा ग्रुप के मालिक जयसुख पटेल (Social Media)

Morbi Bridge Collapse : गुजरात (Gujarat) के मोरबी जिले में रविवार शाम मच्छु नदी पर बने पुल गिरने से 135 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद इस पुल का संचालन कर रही कंपनी सवालों के घेरे में है। मोरबी ब्रिज का संचालन ओरेवा ग्रुप के हाथों में था। आरोप है कि, ब्रिज के रखरखाव में लापरवाही की वजह से पर्यटकों की मौत हुई। जिसके बाद कंपनी के मालिक की तलाश शुरू हुई। आपको बता दें, ओरेवा ग्रुप के मालिक का नाम जयसुख पटेल (jaysukh patel) है। हादसे से पहले इन्होंने ब्रिज को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, मगर सब हवा-हवाई निकले।

इतने बड़े हादसे के बाद गुजरात पुलिस ने केस दर्ज जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें ओरवा कंपनी के दो मैनेजर भी शामिल हैं। पुलिस द्वारा दर्ज FIR में पुल के रखरखाव और प्रबंधन में शामिल लोगों पर काम में लापरवाही के आरोप भी हैं। पुल की देखभाल का लाइसेंस ओरेवा कंपनी को मिला था। इसलिए अब इसके मालिक जयसुख ओधावजी पटेल (Jaisukh Odhavji Patel) का नाम भी सुर्खियों में है।

कौन हैं जयसुख पटेल? (Who is Jaisukh Patel)

मोरबी ब्रिज का संचालन कर रही ओरेवा कंपनी के मालिक जयसुख पटेल हैं। उनके पिता ओधावजी पटेल को भारत में दीवार घड़ियों का जनक माना जाता है। उन्होंने वर्ष 1971 में अपने 3 हिस्सेदारों के साथ ओरेवा कंपनी की शुरुआत की थी। उस दौर में एक लाख रुपए की लागत से स्थापित ओरेवा ग्रुप बाजार में उतरी थी। तब इस कंपनी का नाम 'अजंता ट्रांजिस्टर क्लॉक मैन्युफैक्चरर' (Ajanta Transistor Clock Manufacturer) था। इस कंपनी में जयसुख पटेल के पिता की हिस्सेदारी मात्र 15 हजार रुपए थी। शेष 85 हजार अन्य हिस्सेदारों का था। 

ऐसे स्थापित हुई अजंता कंपनी 

हालांकि, बाद में अजंता की दीवार घड़ियों ने भारतीय बाजार में तहलका मचा दिया। ये घर-घर में लोकप्रिय हो गई। साल 1981 आते-आते तीनों हिस्सेदारों ने कंपनी का बंटवारा कर लिया। जिसके बाद, ओधावजी पटेल ने अपने हिस्से की कंपनी का नाम 'अजंता' रख लिया। 

अजंता कंपनी का कारोबार 45 देशों में  

उस पूरे दशक में ओधावजी ने अपना ध्यान क्वार्ट्ज घड़ियों पर केंद्रित किया। वो लगातार क्वार्ट्ज क्लॉक बनाते रहे और बाजार के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। एक समय ऐसा भी आया जब 'अजंता' दुनिया की सबसे बड़ी घड़ी निर्माता कंपनी बन गई। उल्लेखनीय है कि, भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने अजंता ग्रुप (Ajanta Group) को लगातार 12 वर्षों तक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स श्रेणी का सर्वोच्च निर्यातक पुरस्कार से सम्मानित किया। कंपनी का कारोबार भारत से बाहर भी बढ़ चला। अजंता कम्पनी आज दुनिया के 45 देशों में फैला है।

जयसुख ने अपने हिस्से का नाम 'ओरेवा' किया 

साल 2012 के अक्टूबर में ओधावजी पटेल के निधन के बाद कंपनी की बागडोर ओधावजी के बेटों के कंधों पर आ गई। बेटों के बीच ये कंपनी बंट गई। जयसुख पटेल के हिस्से जो कंपनी इस बंटवारे में मिली उन्होंने उसका नाम ओरेवा रखा। दरअसल, जयसुख पटेल 1983 में कॉमर्स से स्नातक डिग्री लेने के बाद से अपने पिता के साथ कंपनी के काम में जुड़ गए थे। ओरेवा नाम रखने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। जयसुख पटेल जब अपनी कंपनी का नाम रखने की सोच रहे थे तब पिता ओधावजी के नाम से 'ओ' और मां के नाम से 'रेवा' लिया। जिसे मिलकर कंपनी का नाम ओरेवा रखा।

कई उत्पाद बनाती है ओरेवा 

ओरेवा कंपनी का मुख्य केंद्र अहमदाबाद में हैं। ओरेवा ग्रुप अपनी मूल कंपनी अजंता मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड (Ajanta Manufacturing Private Limited) के नाम से बिजली के उत्पाद और लाइटिंग प्रोडक्ट, बैटरी से चलने वाली बाइक तथा घरेलू उपकरण, बिजली के सामान, टेलीफोन, कैलकुलेटर, एलईडी टीवी सहित कई प्रोडक्ट बनती है। 

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