Thalapathy Vijay की सरकार तय! कांग्रेस ने स्टालिन को छोड़ TVK से मिलाया हाथ, राजभवन में दावा पेश

Congress support TVK alliance: तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर! थलापति विजय की TVK सरकार बनाने की दहलीज पर, कांग्रेस ने DMK का साथ छोड़ दिया। क्या विजय बनेंगे नए मुख्यमंत्री? जानिए पूरा पॉलिटिकल ड्रामा।

Update:2026-05-06 18:01 IST

Congress support TVK alliance: तमिलनाडु की सियासत में आज वह ऐतिहासिक भूचाल आ गया है, जिसकी कल्पना कुछ महीनों पहले तक नामुमकिन थी। सिनेमा के पर्दे पर अपनी अदाकारी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले 'थलापति' विजय अब हकीकत में तमिलनाडु के 'नायक' बनने की दहलीज पर खड़े हैं। 4 मई को आए चुनावी नतीजों ने पूरे देश को तब हैरान कर दिया, जब पहली बार चुनावी मैदान में उतरी विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने दशकों पुराने द्रविड़ वर्चस्व को उखाड़ फेंका। बुधवार को विजय ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात की और सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश कर दिया है।

Congress का 'मास्टरस्ट्रोक' और DMK को लगा करारा झटका

इस पूरी सियासी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कांग्रेस ने अपनी पुरानी सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर विजय की टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। 1971 से समय-समय पर साथ चलने वाली कांग्रेस और डीएमके की दोस्ती अब पूरी तरह टूट चुकी है। कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने स्पष्ट किया कि यह फैसला जनता के जनादेश का सम्मान करने के लिए लिया गया है। हालांकि, कांग्रेस ने समर्थन के बदले एक सख्त शर्त भी रखी है कि संविधान में विश्वास न रखने वाली और सांप्रदायिक ताकतों को इस गठबंधन से कोसों दूर रखा जाए। इस फैसले से बिफरी डीएमके ने कांग्रेस पर 'पीठ में छुरा घोंपने' का आरोप लगाया है।

बहुमत का जादुई आंकड़ा और राजभवन में विजय की दावेदारी

तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 118 सीटों के जादुई आंकड़े की जरूरत है। विजय की पार्टी टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबको दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। विजय ने खुद पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली पूर्व जैसी प्रतिष्ठित सीटों से बड़ी जीत दर्ज की है। सूत्रों की मानें तो विजय ने फिलहाल कांग्रेस के समर्थन का औपचारिक पत्र राज्यपाल को नहीं सौंपा है, लेकिन उन्होंने मौखिक रूप से यह विश्वास दिलाया है कि उनके पास सरकार चलाने के लिए जरूरी बहुमत मौजूद है। टीवीके का करीब 35 फीसदी वोट शेयर यह बताता है कि जनता ने विजय के विजन पर आंख मूंदकर भरोसा किया है।

AIADMK का प्रस्ताव 'होल्ड' पर और बदला हुआ समीकरण

नतीजों के बाद एआईएडीएमके ने भी विजय की पार्टी को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन फिलहाल टीवीके ने इसे 'होल्ड' पर डाल दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विजय अपनी सरकार की छवि को लेकर बेहद सतर्क हैं। 2021 में 133 सीटें जीतकर सत्ता संभालने वाली एम.के. स्टालिन की डीएमके इस बार महज 59 सीटों पर सिमट गई है, जबकि एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं। कांग्रेस की 5 सीटों के समर्थन के साथ विजय अब बहुमत के बेहद करीब हैं। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इसने तमिलनाडु की द्विध्रुवीय राजनीति (DMK बनाम AIADMK) को खत्म कर एक नया विकल्प पेश किया है।

क्या 'सोनार तमिलनाडु' की राह पर चलेंगे विजय?

विजय के राजभवन पहुंचने की खबर ने चेन्नई की सड़कों पर जश्न का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशंसकों को उम्मीद है कि विजय का 'सुशासन' राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। द्रविड़ राजनीति के कद्दावर नेताओं के बीच एक अभिनेता का इस तरह उभरना यह संकेत देता है कि तमिलनाडु की जनता अब बदलाव चाहती थी। हालांकि, 118 विधायकों का लिखित समर्थन पत्र जमा करना विजय के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी। अगर वह इसमें सफल रहते हैं, तो बहुत जल्द चेन्नई के मरीना बीच पर 'मुख्यमंत्री विजय' का शपथ ग्रहण समारोह एक नए युग की शुरुआत करेगा। फिलहाल, राजभवन की हर हलचल पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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