तमिलनाडु में टीवीके: मुफ्त की रेवड़ियां बांट दीं तो राज्य की आधी कमाई हो जाएगी खत्म

Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में टीवीके के चुनावी वादों और मुफ्त योजनाओं से राज्य की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ेगा असर? जानें क्या सच में आधी कमाई खत्म हो सकती है और इसके पीछे की आर्थिक हकीकत।

Update:2026-05-06 18:02 IST

Tamil Nadu Politics: पांच राज्यों के चुनाव निपट गए। अब चुनावी वादों, फ्रीबीज़ या मुफ्त रेवड़ियों की असल परीक्षा अब होगी। तमिलनाडु इसकी एक बड़ी मिसाल बनेगा जहां जोसेफ विजय की पार्टी 'टीवीके' सत्ता में आ रही है। वजह ये कि यहां वादों की अच्छी खासी भरमार रही है।

तमाम बाकी कारणों के अलावा, टीवीके की चुनावी जीत जोसेफ विजय की निजी लोकप्रियता और उनकी पार्टी की लोकलुभावन घोषणापत्र पर भी आधारित थी। सो, अब सवाल खड़ा हो गया है कि क्या तमिलनाडु अपना खजाना और भी भरे बगैर लुभावनी कल्याणकारी योजनाओं का बड़े पैमाने पर आगे बढ़ा सकता है?

क्या क्या वादे हैं?

सीधे नकदी ट्रांसफर

टीवीके के वेलफेयर प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा डायरेक्ट ट्रांसफर में बढ़ोतरी करना है। इसके तहत घर की मुखिया महिलाओं के लिए हर महीने 2,500 रुपये, बेरोज़गार ग्रेजुएट के लिए 4,000 रुपये और डिप्लोमा धारकों के लिए हर महीने 2,500 रुपये दिए जाएंगे।इसके अलावा साल में छह मुफ़्त एलपीजी सिलेंडर और बिजली पर ज़्यादा सब्सिडी भी दी जाएगी।

इस लिस्ट में स्कूल ड्रॉपआउट यानी पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या कम करने के लिए सालाना 15,000 रुपये देना, शादी के लिए गोल्ड और साड़ी देना, महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे स्वयं सहायता समूहों के लिए रियायती फ़ाइनेंस देना और नवजात शिशुओं के लिए एक यूनिवर्सल पैकेज भी शामिल है।

साल का एक लाख करोड़ का बोझा

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि लाभार्थियों की अनुमानित संख्या के आधार पर इन योजनाओं में तमिलनाडु सरकार का पूरे साल का खर्च एक लाख करोड़ रुपये तक आ सकता है।

दिलचस्प है कि 2024-25 में तमिलनाडु का अपना कुल कर राजस्व लगभग 2.1 लाख करोड़ रुपये था। यानी वादे लागू कर देने पर राज्य की कमाई का आधा हिस्सा उसी में खर्च हो सकता है।

वैसे, तमिलनाडु में ये कोई नई बात नहीं है। यहां पहले से ही तरह तरह की वेलफेयर योजनाएं चल रही हैं। लेकिन अब नई नकद ट्रांसफर के लिए ही हर साल 18,000 से 20,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ज़रूरत होगी। राज्य के खर्च का एक बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज़ के भुगतान में फंसा होने के कारण विकल्प बहुत सीमित हैं। अगर आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ती है, तो एकमात्र रास्ता ज़्यादा कर्ज़ लेना ही बचता है। या दूसरा रास्ता है कि टैक्स बढ़ा कर लोगों से ही भरपाई कराई जाए।

टीवीके के चुनावी वादे

  • - घर की महिला मुखियाओं को हर महीने 2,500 रुपये।
  • - साल में 6 मुफ़्त एलपीजी गैस सिलेंडर।
  • - सभी नवजात शिशुओं के लिए सोने की अंगूठी।
  • - स्कूल जाने वाले बच्चों की माताओं को 15,000 रुपये की मदद।
  • - बेरोज़गार ग्रेजुएट युवाओं को हर महीने 4,000 रुपये।
  • - नए स्टार्ट-अप के लिए 5 लाख रुपये का लोन।
  • - बिज़नेस शुरू करने के लिए 25 लाख रुपये का लोन
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