Thalapathy Vijay के ब्लॉकबस्टर डेब्यू पर बहुमत का 'क्लाइमेक्स' बाकी, फंसा सत्ता का पेंच, 118 विधायकों का समर्थन नहीं

Thalapathy Vijay Government Tamil Nadu: तमिलनाडु विधानसभा में बड़ी जीत दर्ज करने के बावजूद थलापति विजय बहुमत साबित नहीं कर पाए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह राज्यपाल के समक्ष आवश्यक समर्थन दिखाने में असफल रहे।

By :  Shivam
Update:2026-05-06 17:42 IST

Thalapathy Vijay Government Tamil Nadu: तमिलनाडु की सियासत में 'सुपरस्टार' से 'राजनेता' बने थलापति विजय के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर बेहद रोमांचक और अनिश्चितताओं से भरा हो गया है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कझगम (TVK) ने 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रहने के कारण अब उनकी सरकार बनाने की योजना खटाई में पड़ती दिख रही है। बुधवार को विजय ने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा तो पेश किया, लेकिन राजभवन के सूत्रों के अनुसार उनके पास जरूरी विधायकों का पर्याप्त समर्थन नहीं दिख रहा है।

विजय की पार्टी को बहुमत के लिए कुल 118 सीटों की आवश्यकता है। वर्तमान में 108 सीटों के साथ उनके पास कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिससे उनकी संख्या 113 तक पहुंच गई है। हालांकि, बहुमत के लिए अभी भी 5 अतिरिक्त सीटों की दरकार है। उम्मीद जताई जा रही थी कि विदुथलाई चिरुथिगल कत्छी (VCK), लेफ्ट पार्टियां और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) विजय को समर्थन देंगे, लेकिन अब इन दलों के रुख ने थलापति की चिंता बढ़ा दी है। वीसीके ने स्पष्ट किया है कि समर्थन पर अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष टी. तिरुमावलन ही लेंगे। वहीं, लेफ्ट और मुस्लिम लीग ने फिलहाल समर्थन की पुष्टि नहीं की है, जिससे विजय की प्लानिंग पर ब्रेक लगता दिख रहा है।

पर्दे के पीछे एमके स्टालिन की सक्रियता

एक ओर जहां विजय सरकार बनाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हार के बावजूद डीएमके नेता एमके स्टालिन की सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। खबर है कि सीपीएम, सीपीआई और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कई विधायकों ने स्टालिन से मुलाकात की है। इन मुलाकातों के बाद अटकलें तेज हैं कि क्या डीएमके कोई बड़ा 'खेल' करने की तैयारी में है। विधायकों की इस गुपचुप मीटिंग ने विजय के खेमे में हलचल मचा दी है क्योंकि यदि ये छोटे दल विजय के बजाय विपक्षी खेमे की ओर झुके, तो तमिलनाडु में एक बार फिर सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

राजभवन के फैसले पर टिकी सूबे की नजरें

तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह से गवर्नर हाउस के इर्द-गिर्द सिमट गई है। गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा विजय के दावे को ठोस न मानने के बाद अब गेंद उनके पाले में है कि वह सबसे बड़े दल को मौका देते हैं या समर्थन की पुख्ता सूची का इंतजार करते हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन राज्य की दिशा तय करेंगे। क्या थलापति विजय अपनी पहली ही सियासी पारी में सिंहासन पर बैठेंगे या डीएमके की रणनीतियां उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देंगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, तमिलनाडु की जनता और राजनीतिक पंडितों की नजरें पल-पल बदलते इन घटनाक्रमों पर टिकी हैं।

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