Draupadi Murmu Life Story: पति और दो बेटों को खोने के बाद भी नहीं मानी हार, चुनी गईं NDA राष्ट्रपति उम्मीदवार

Draupadi Murmu Wiki in Hindi: द्रौपदी मुर्मू का जीवन बेहद ही मुश्किलों और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। एक आदिवासी परिवार में जन्म लेने के चलते द्रौपदी मुर्मू को कई सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

Written By :  Rajat Verma
Update: 2022-07-21 13:01 GMT

द्रौपदी मुर्मू (फोटो: सोशल मीडिया ) 

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Draupadi Murmu Biography: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने बीते दिन मंगलवार को भाजपा नेता द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था। सत्ताधारी दल होने के चलते द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu presidential candidate) का राष्ट्रपति बनना लगभग तय माना जा रहा था। आपको बता दें कि एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर द्रौपदी मुर्मू के नाम का आधिकारिक ऐलान भले बीते दिन 21 जून को हुआ हो, लेकिन www.newstrack.com के प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र ने 11 जून को ही अपना अनुभव साझा करते हुए द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की भावष्यवाणी की थी, जो सच साबित हो गई थी। 

पढ़ें लिंक - https://newstrack.com/india/draupadi-murmu-could-be-new-president-of-india-presidential-election-2022-321687

द्रौपदी मुर्मू का जीवन बेहद ही मुश्किलों और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। एक आदिवासी परिवार में जन्म लेने के चलते द्रौपदी मुर्मू को कई सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन विपरीत इसके उन्होनें सभी मुश्किलों को पछाड़ते हुए अपना एक अलग मुकाम हासिल किया। आपको बता दें कि यदि द्रौपदी मुर्मू यह चुनाव जीत जाती हैं तो वह देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर विराजमान होने वाली पहली आदिवासी नेता होंगी।

जन्म और व्यक्तिगत जीवन (Draupadi Murmu Ka Jivan Parichay

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले में एक आदिवासी परिवार में हुआ। इनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था, जो कि अपने पुस्तैनी परम्परा के अनुसार अपने गांव और समाज के मुखिया थे।

द्रौपदी मुर्मू ने श्याम चरण मुर्मू आए विवाद किया, जिनसे उन्हें दो बेटे और एक बेटी हुई। द्रौपदी मुर्मू के दोनों बेटों की मृत्यु हो गई और फिर समय के साथ उनके पति भी साथ छोडकर हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गए। यकीनन अपनी आंखों के सामने अपने पति और दो जवान बेटों को मरते हुए देखना और खुद पर भरोसा बनाए रखना बड़ी बात है। लेकिन द्रौपदी मुर्मू ने इस मुश्किल दौर से गुजरने के बाद हर नहीं मानी और अपना सफल राजनीतिक कैरियर गढ़ने में लगी रहीं।

शैक्षणिक योग्यता (Draupadi Murmu Education)

शुरुआती शिक्षा अपने गृह जनपद से प्राप्त करने के पश्चात द्रौपदी ने भुबनेश्वर स्थित रामादेवी महिला महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने एक शिक्षक के तौर पर कुछ समय तक काम किया।

राजनीतिक परिचय (Draupadi Murmu political Career)

द्रौपदी मुर्मी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत ओडिशा राज्य से भारतीय जनता पार्टी की सदस्य बनते हुए की। द्रौपदी मुर्मू को राजनीति में व्यक्तिगत पहचान 1997 से मिलनी शुरू हुई, जब उन्हें रायरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद के रूप में चुना गया था। इसी के साथ द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल की गठबंधन सरकार के दौरान 6 मार्च 2000 से 6 अगस्त 2002 तक द्रौपदी मुर्मू को वाणिज्य और परिवहन का स्वतंत्र प्रभार मंत्री और 6 अगस्त 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।

द्रौपदी मुर्मू ने इस दौरान साल 2000 और 2004 में ओडिशा के रायगंज विधानसभा सीट से बतौर विधायक जीत हासिल की।

इसके अलावा द्रौपदी मुर्मू 2015 से 2021 के बीच झारखंड की नौवीं राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दी और इस दौरान उन्होंने राज्य की पहली महिला राज्यपाल होने का भी गौरव प्राप्त किया तथा साथ ही अपने गृह जनपद मयूरभंज से भाजपा जिला अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

उप्लब्धियां

द्रौपदी मुर्मू को बतौर विधायक साल 2007 में ओडिशा विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक के रूप में 'नीलकंठ पुरस्कार' से नवाजा गया। इसी के साथ झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने के अलावा द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित होने वाली देश की पहली महिला आदिवासी नेता हैं।

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