जानिए उस नीलकुरिंजी पुष्प के बारे में, जिसके जिक्र से PM ने शुरू किया भाषण

Update: 2018-08-15 09:36 GMT

नई दिल्ली : पीएम नरेंद्र मोदी ने आजादी की 72वीं सालगिरह के मौके पर अपना पांचवां भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने एक फूल के बारे में बात की। हम आपको बताते हैं उस फूल के बारे में वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं।

पहले जानते हैं पीएम ने क्या कहा

पीएम ने अपने संबोधन में कहा, हमारे देश में 12 साल में एक बार नीलकुरिंजी का पुष्प उगता है। इस वर्ष दक्षिण की नीलगिरि की पहाड़ियों पर नीलकुरिंजी का पुष्प जैसे मानो तिरंगे झंडे के अशोक चक्र की तरह देश की आजादी के पर्व में लहलहा रहा है।

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अब जानिए नीलकुरिंजी के बारे में

नीलकुरिंजी या कुरिंजी दक्षिण भारत के पश्चिम घाट के 1800 मीटर से ऊंचे शोला घास के मैदानों में बहुतायत से उगने वाला एक पौधा होता है। नीलगिरी पर्वत को अपना नाम इन्हीं नीले कुरंजी के पुष्पों से आच्छादित होने के कारण नाम मिला। यह पौधा 12 वर्षों में एक बार ही फूल देता है। इससे ही पालियन लोग इस पौधे की आयु का अनुमान लगाते हैं।

कब-कब खिला फूल

1838, 1850, 1862, 1874, 1886, 1898, 1910, 1992, 1934, 1946, 1958, 1970, 1982, 1994, 2006 और 2018 में ये फूल खिला है।

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कुछ खास बातें

नीलकुरिंजी फूल 1300 से 2400 मीटर की ऊंचाई पर उगते हैं पौधा 30-60 सेंटीमीटर तक लंबा होता है। कहीं-कहीं ये 180 सेंटीमीटर तक भी पाए गए हैं। नीलकुरिंजी की 40 प्रजातियों को अभीतक देखा गया है।

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