बागपत में अजित सिंह की चुनाव लड़ने पर कभी न, कभी हां

Update: 2018-07-27 07:32 GMT

सुशील कुमार

बागपत: राष्ट्रीय लोकदल मुखिया चौधरी अजित सिंह को अपनी ही कही बात पर कुछ ही घंटों बाद सफाई देनी पड़ गई। दरअसल, बागपत में पार्टी की चुनाव समीक्षा बैठक में पहुंचे अजित सिंह ने पत्रकारों से कहा कि मैं तो २०१९ में चुनाव लडूंगा ही नहीं। मैं तो 80 साल का हो गया हूँ। अब और चुनाव नहीं। लेकिन शाम होते - होते अजित सिंह ने अपनी ही बात को नकारते हुए कहा कि मैंने कभी नहीं यह कहा कि मैं चुनाव लड़ंूगा।

अजित सिंह ने कहा कि मीडिया की मर्जी है कि वह कुछ भी छापे और प्रसारित करे। लेकिन, मैंने चुनाव नहीं लडऩे की बात नहीं कही है। बकौल अजित सिंह मैंने तो सिर्फ इतना ही कहा था कि अभी चुनाव करीब एक साल दूर हैं। इसलिए अभी कुछ तय नहीं है। चुनाव के नजदीक आने पर ही चुनाव संबंधी बात की जाएगी। फिलहाल तो मैं फरवरी से सद्भावना यात्रा अभियान में लगा हूं।

अजीत सिंह ने महागठबंधन को समय की जरूरत भी बताया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के तहत 2019 का चुनाव लडऩा हर दल की मजबूरी है। अगर अगला लोकसभा चुनाव कोई दल अकेला लड़ता है तो वह समाप्त हो जाएगा। भाजपा से गठबंधन के सवाल पर अजित सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन का सवाल ही पैदा नहीं होता। रालोद भाजपा के खिलाफ बन रहे महागठबंधन के साथ मिलकर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी। अजित सिंह ने कहा कि परिवर्तन की बयार बहनी शुरू हो गई और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। देश में भाजपा का नहीं आरएसएस का राज चल रहा है।

अजित सिंह ने कहा कि भाजपा लोगों को बरगलाने और नफरत की सियासत कर रही है। वह हिंदू-मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदुओं को भी जातिगत आाार पर बांटकर लड़ाने का काम कर रही है। बागपत अजित सिंह की लोकसभा सीट रही है। वे इसी क्षेत्र से बार-बार जीतते रहे हैं। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में वे अपनी सीट भी नहीं बचा पाए थे। दरअसल, 2013 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जाट और मुस्लिमों के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा की वजह से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण ने ङ्क्षहदू और मुस्लिमों के वोट को पूरी तरह से बंट गया था। जिसका फायदा भाजपा को हुआ और इसकी कीमत अजित ङ्क्षसह को चुकानी पड़ी। यही वजह है कि वे अब हिंदू -मुस्लिमों के बीच की खाई को बांटने में जुट गए हैं।

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