एनएमआरसी का एमओयू प्रस्ताव केंद्र ने लौटाया चार बार, पांचवी बार फिर भेजा

एनएमआरसी की वर्तमान की परियोजनाओं के साथ भविष्य की परियोजनाओं पर भी ग्रहण लगाता दिख रहा है। इसकी वजह केंद्र सरकार द्वारा एनएमआरसी की नोएडा, ग्रेटरनोएडा

Update: 2017-09-26 13:17 GMT

दीपांकर जैन

नोएडा: एनएमआरसी की वर्तमान की परियोजनाओं के साथ भविष्य की परियोजनाओं पर भी ग्रहण लगाता दिख रहा है। इसकी वजह केंद्र सरकार द्वारा एनएमआरसी की नोएडा, ग्रेटरनोएडा मेट्रो परियोजना में रूचि नहीं लेना है। दरसअल, एनएमआरसी 970 करोड़ रुपए के लिए बनाया गया एमओयू का प्रस्ताव चार बार केंद्र सरकार को भेज चुकी है। लेकिन चारों बार एनएमआरसी को विफलता हाथ लगी। केंद्र की ओर से इसमें चौथी बार भी आपत्ति लगा दी गई। फिलहाल हाल ही में हुई बैठक के बाद पांचवी बार केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

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साझा समझौता पत्र (एमओयू) साइन होने के बाद केंद्र सरकार एनएमआरसी को मेट्रो परियोजना के लिए 970 करोड़ रुपए देगा। साथ ही शर्तो के अनुसार वर्तमान व भविष्य दोनों परियोजनाओं के फैसले में अहम भागीदारी भी केंद्र की होगी। दरअसल, यह एमओयू एनएमआरसी और शहरी विकास मंत्रालय के बीच किया जाएगा। जिसके बाद शहरी विकास मंत्रालय के सचिव एनएमआरसी के चेयरमैन बनाए जाएंगे। वहीं एनएमआरसी बोर्ड में भी केंद्र सरकार के अधिकारी शामिल होंगे। बताते चले बोर्ड बैठक में एनएमआरसी द्वारा इसी एमओयू के चलते नए 59 पद स्वीक़त भी किए गए है। इन पदों पर भर्ती प्रतिनियुक्ति के आधार पर की जाएगी या फिर नई भर्ती होंगी। इसका फैसला भी एमओयू साइन होने के बाद ही लिया जाएगा।

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एनएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड (पीआइबी) के जरिए शहरी विकास मंत्रालय की मंजूरी के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो परियोजना की कुल लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा एनएमआरसी को दिया जाएगा। वहीं केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की एनएमआरसी में 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी हो जाएगी। इसके लिए एनएमआरसी और शहरी विकास मंत्रालय के बीच एमओयू साइन किया जाएगा। केंद्रीय कैबीनेट द्वारा इस परियोजना के लिए 970 करोड़ रुपये की केंद्रीय राशि दिए जाने का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही जब एनएमआरसी में केंद्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत हो जाएगी, तो एनएमआरसी के सभी परियोजना और सभी फैसलों में केंद्र की साझीदारी सीधे तौर पर जुड़ जाएगी।

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एनएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक परियोजनाओं को तेज किए जाने में इस फैसले से मदद मिलेगी। वहीं जिन भी परियोजनाओं को पूरा करने में अड़चन होगी, उसे दूर करने में केंद्र सरकार सक्रिय रूप से सहयोग करेगी। केंद्र की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बाद निदेशक मंडल से लेकर बोर्ड सदस्यों में भी बदलाव किया जाएगा।

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एमओयू साइन के बाद इन परियोजनाओं के बढ़ेगी गति

इस समय एनएमआरसी दो परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इसमें पहली परियोजना 5500 करोड़ रुपये की लागत से नोएडा से ग्रेटर नोएडा 29.707 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरीडोर का निर्माण है। इस परियोजना का इस समय 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। वहीं एनएमआरसी द्वारा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दोनों शहरों के बीच सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। इस समय इस परियोजना के तहत 50 बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों की संख्या भविष्य में 394 किए जाने की तैयारी है।

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