Meerut : अखिलेश-जयंत के मिलन में देरी ने बढ़ाई टिकट के दावेदारों के दिल की धड़कने

Meerut : अभी तक प्रदेश में यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी भी सभा में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी साथ-साथ नहीं दिखे हैं...

Report :  Sushil Kumar
Published By :  Vidushi Mishra
Update: 2021-11-13 09:41 GMT

अखिलेश-जयंत (फोटो-सोशल मीडिया)

Meerut : अभी तक आरएलडी और सपा (RLD Samajwadi Party) के चुनावी गठबंधन का औपचारिक ऐलान नहीं होने से तमाम तरह की अटकलें तो हवाओं में गश्त कर ही रही हैं दोंनो दलों के चुनावी टिकट के दावेदार भी खासे परेशान है। टिकट के दावेदारों को सबसे बड़ी चिंता यही है जिस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए वें मशक्कत कर रहे हैं गठबंधन फार्मूले  में वह सीट दूसरे दल में चली ना जाए।

दरअसल, अभी तक प्रदेश में यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी भी सभा में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी (Akhilesh-Jayant Janasabha) साथ-साथ नहीं दिखे हैं , ऐसे में इस वैचारिक गठबंधन को लेकर अटकलें लगने लगीं कि दोनों दलों में सीटों के बंटवारे को लेकर रस्साकशी चल रही है।

अखिलेश-जयंत जनसभा
Akhilesh-Jayant Janasabha

उधर,प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) और जयंत (Jayant Choudhary) की लखनऊ के एयरपोर्ट(Lucknow airport) पर मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा देने का काम किया है। बता दें कि जयंत चौधरी ने लखनऊ में पिछले दिनों पार्टी का 2022 संकल्प पत्र जारी किया था।

वैचारिक गठबंधन के बावजूद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की ओर से कोई भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश-जयंत जनसभा को संबोधित करने आये लेकिन किसी भी सभा में दोनो नेता साथ नही दिखे।

फोटो- सोशल मीडिया

आरएलडी और सपा के चुनावी गठबंधन का औपचारिक एलान नही होने से सबसे ज्यादा दिक्कत इन पार्टियों के उन नेताओं को हो रही है जो कि चुनावी टिकट मिलने की उम्मीद में काफी अर्से से अपनी विधानसभा सीट पर चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं। यही नही चुनाव प्रचार में अपना काफी पैसा भी बहा चुके हैं।

आरएलडी के कई उम्मीदवारों की नजरें टिकी

मेरठ जनपद की आरएलडी के एक नेता जो कि सिवालखास सीट के दावेदार हैं न्यूजट्रैक संवाददाता से अपना दर्द बंया करते हुए कहते हैं,पिछले कई महीनों जनसम्पर्क अभियान में जुटा हुआ हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि टिकट मुझे मिलेगा। लेकिन दिक्कत यह है कि अगर चुनावी गठबंधन के बाद यह सीट सपा के खाते में चली गई तो मेरी तो सारी तैयारियां धरी की धरी रह जाएगी।

सिवालखास सीट पर अखिलेश के चाचा शिवपाल सिंह यादव अपना उम्मीदवार एक साल पहले ही अमित जानी के रुप में घोषित कर चुके हैं। अमित जानी तभी से अपने क्षेत्र में ना सिर्फ खूब मेहनत करने में लगे हैं बल्कि पैसा खर्च कर रहे हैं। अमित जानी टिकट मिलने की उम्मीद में ही अपने क्षेत्र में हाल ही शिवपाल सिंह यादव की रैली भी आयोजित करवा चुके हैं।

क्योंकि सपा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मिलन की भी बात फाइनल मानी जा रही है ऐसे में सिवालखास सीट पर आरएलडी,सपा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के टिकट दावेदारों की दिल धड़कने तेज होना स्वाभाविक है।

चुनावी तैयारियां

वर्तमान में यह सीट बीजेपी के पास है,जो उसने सपा से छीनी थी। इस सीट पर सपा के साथ ही आरएलडी के कई उम्मीदवारों की नजरें टिकी हैं जो कि काफी अर्से से क्षेत्र में चुनावी तैयारियों में जुटे हुए भी हैं।

इसी तरह बुलंदशहर की शिकारपुर सीट जो जाट बाहुल्य मानी जाती है। लेकिन वहां पर आरएलडी के अलावा सपा की भी नजरें हैं। यहां सपा के रामगोपाल यादव के करीबी माने जाने वाले नेता समेत करीब एक दर्जन सपा नेता टिकट मिलने की उम्मीद में कई महीनों से इलाके में अपनी चुनावी तैयारियां शुरु कर चुके हैं।

बुलंदशहर  जनपद की अनूपशहर विधान सभा , मथुरा की मांट सीट,आगरा, मुजफ्फ्रनगर, शामली, सहारनपुर जनपदों में आदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी करीब 50 से ज्यादा सीटें हैं जिनपर रस्साकशी चल रही है।

जाहिर है कि गठबंधन की सूरत में किसी एक पार्टी के खाते में सीट जाएगी। ऐसे में सीट से वंचित होने वाली पार्टी के टिकट दावेदारों के चुनाव लड़ने का सपना टूटना तय है। इसलिए टिकट के दावेदार इस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जिस दिन दोंनो दलों के बीच सीटों का बंटवारा घोषित होगा। तब तक दोंनो दलों के टिकट दावेदारों के दिल की धड़कने यूं ही बढ़ती रहेंगी।

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