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हर तरफ कोरोना का आंतक हैं। इस तरह इससे बचने के लिए लोग तरह तरह के उपाय कर रहें है। घरों को सैनेटाइज कर रहे हैं। घरेलू व धार्मिक किसी भी नुस्खें को करने से बाज नहीं  आ रहे हैं। जब इतने सारे उपाय कर रहे हैं तो क्यों ना घर में रखें गंगाजल से भी हर रोज घर को पवित्र करें।

आज चैत्र शुक्ल तृतीया का पावन पर्व हैं जिसे गौरी तीज या गणगौर के रूप में जाना जाता हैं। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ पार्वती है। इस दिन को सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन सुहागन महिलाएं अपने सुहाग के प्यार के लिए और अविवाहित लड़कियां अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती हैं।

मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। मां चंद्रघंटा 9 रूपों में से एक है। ये तीसरा स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना हुआ है। इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। नवरात्रि का तीसरा दिन अत्यधिक महत्व का माना जाता है।

माह- चैत्र, तिथि- तृतीया पक्ष- शुक्ल, दिन-शुक्रवार, , सूर्योदय-06.20, सूर्यास्त-18.42। जानिए कैसा रहेगा दिन....

चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है। घर में पूजा पाठ व मां का आगमन हो चुका है। लोग अपने- अपने तरीके से देवी मां को प्रसन्न कर रहें। नवरात्रि के दौरान ज्यादातर घरों में साधक दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं । कहते हैं कि इस पाठ को करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, लेकिन इसको करने के कुछ विशेष नियम है,

  माह-चैत्र, दिन-बृहस्पतिवार, तिथि- द्वितीया, पक्ष-शुक्ल, नक्षत्र-रेवती/ अश्विनी, सूर्योदय-06.20,सूर्यास्त-18.42। किसी भी राशि के जातक घर से निकलने से बचें, परिस्थितियां अनुकूल धीरे-धीरे बन रही है,  तब तक घरों  में ही रहें, और अपनी  और अपने परिवार की सेहत का ख्याल रखिए, ये हम  नहीं ग्रहों की का निर्देश हैं, जानिए आज कैसा रहेगा 12 राशियों का हाल...

नवरात्रि पर मां की पूजा-उपासना बहुत ही विधि-विधान से की जाती है। इसके पीछे का तात्विक अवधारणाओं का परिज्ञान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है।इस बार कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त  सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। वैसे कलश स्‍थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त भी है। 

माह- चैत्र, तिथि- प्रतिपदा, पक्ष- शुक्ल, दिन-बुधवार, नवरात्रि, सूर्योदय-06.20, सूर्यास्त-18.42। जानिए कैसा रहेगा नवरात्रि का पहला दिन....

सम्वत्सर 2077 का आरम्भ यद्यपि 25 मार्च बुधवार,रेवती नक्षत्र को उदयव्यापिनी तिथि में होगा किन्तु 24 मार्च 2020 को अमावस्या तिथि 14:56 बजे समाप्त हो जाएगी तथा 14:57 बजे से नववर्ष की प्रतिपदा का आरम्भ कर्क लग्न में होगा। उस समय की आकाशीय कौंसिल के अनुसार कर्क, मकर      (लग्न एवं सप्तम) में शनि-मंगल का विध्वंसकारी योग तथा षष्ठ-द्वादश भाव में कालसर्प योग राष्ट्र के लिए जन-धन हानि और उपद्रव लेकर आ रहा है।

देवी आराधना का महापर्व चैत्र नवरात्रि 25 मार्च, बुधवार से शुरू हो रहा है। इन 9 दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में 4 नवरात्रि आती है, इनमें से 2 प्रकट और 2 गुप्त होती है। ये चारों ही नवरात्रि ऋतुओं के संधिकाल पर आती हैं। जो लोग सोच रहे है कि कोरोना के चलते देवी मां के दर्शन संभव