अयोध्या राम मंदिर पर सुनाया फैसला! जज को  मिली जान से मारने की धमकी  

अयोध्या राम मंदिर पर सुप्रीम फैसला सुनाने पांच न्यायमूर्तियों में शामिल, जस्टिस एस अब्दुल नजीर को जान से मारने की धमकी मिली है। इसके बाद केंद्र सरकार ने जस्टिस एस अब्दुल नजीर और उनके परिवार को जेड कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला किया है।  

 नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर पर सुप्रीम फैसला सुनाने पांच न्यायमूर्तियों में शामिल, जस्टिस एस अब्दुल नजीर को जान से मारने की धमकी मिली है।इसके बाद केंद्र सरकार ने जस्टिस एस अब्दुल नजीर और उनके परिवार को जेड कैटेगरी की सुरक्षा देने का फैसला किया है।

बता दें कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जस्टिस नजीर और उनके परिजनों को खतरे को देखते हुए यह सुरक्षा देने का फैसला लिया गया है।

खास बात यह है कि जस्टिस अब्दुल नजीर अयोध्या मामले पर फैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायमूर्तियों में शामिल थे।

गृह मंत्रालय ने दिया आदेश….

गृह मंत्रालय ने जस्टिस नजीर और उनके परिजनों को जेड कैटेगरी की सुरक्षा मुहैया कराने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और स्थानीय पुलिस को आदेश दे दिया है।

सुरक्षा एजेंसियों ने पहले किया था आगाह…

सुरक्षा एजेंसियों ने अयोध्या मामले पर फैसला आने के बाद पीएफआई और अन्य से अब्दुल नजीर और उनके परिवार की जान को खतरा होने को लेकर आगाह किया है। बता दें कि सुरक्षाबल और स्थानीय पुलिस तत्काल जस्टिस नजीर को सुरक्षा मुहैया कराएंगी, कर्नाटक और देश के अन्य जगहों पर रह रहे जस्टिस नजीर के परिवारवालों को सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाएगी।

वो 5 जज जिन्होंने सुनाया ऐतिहासिक फैसला…

 

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई पर एक नजर…

रंजन गोगोई (जन्म 18 नवम्बर 1954) एक भारतीय न्यायाधीश तथा वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश है। वे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। उसके बाद 2012 से भारत के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश रह चुके रजंन गोगोई ने 3 अक्टूबर 2018 को भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लिया।

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उनके पिता केशब चंद्र गोगोई 1982 में असम राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके है।

18 नवंबर 1954 को जन्मे देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 1978 में बार काउंसिल में शामिल हुए थे और गुवाहाटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की, और गुवाहाटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की।

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इसके बाद वे 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में जज बने। साल 2010 में उनको पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया गया। 12 फरवरी 2011 को उनको पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया, साल 2012 में उनको सुप्रीम कोर्ट में जज की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद साल 2018 में वह देश के प्रधान न्यायाधीश बने।

जस्टिस एसए बोबडे…

साल 1956 में जन्मे एसए बोबडे ने बीए एलएबी की डिग्री नागपुर से हासिल की है। इसके साथ ही आपको बता दें कि वे 1978 में बार काउंसिल के सदस्य बने और बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में प्रैक्टिस करने लगे।

साल 2010 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज बनाया गया, साल 2012 मे वह मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। साल 2013 में उनको सुप्रीम कोर्ट में जज बने. वह 23 अप्रैल 2021 को रिटायर हो जाएंगे।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़…

दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

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उन्होंने एलएलएम की डिग्री हॉवर्ड लॉ स्कूल से ली है, सुप्रीम कोर्ट में जज बनने से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश और उससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के जज के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

आपको बता दें कि वह साल 1999 में भारत के एसएजी भी रहे हैं, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ मुंबई विश्वविद्यालय और ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं।

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इसके अलावा ऑस्ट्रेलियन नेशनल युनिवर्सिटी, हावर्ड लॉ स्कूल में लेक्चर दे चुके हैं, वहीं युनाइेट नेशन्स की मानवाधिकार उच्चायोग सहित कई अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भाषण दे चुके हैं।

जस्टिस अशोक भूषण…

जस्टिस अशोक भूषण का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 5 जुलाई 1956 को हुआ था। खास बात यह है कि जस्टिस अशोक भूषण ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की डिग्री ली है।

1979 में वह बार काउंसिल के सदस्य बने और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की, साल 2001 में उनको इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया।

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साल 2014 को उनकी नियुक्ति केरल हाईकोर्ट के जज के रूप में हुई, इसके बाद साल 2015 में उनको केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया, साल 13 मई 2016 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

जस्टिस एसए नजीर…

साल 1958 में जन्मे एसए नजीर कर्नाटक हाईकोर्ट में 1983 को वकील के रूप में सेवाएं शुरू कीं, साल 2003 में उनको कर्नाटक हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया। साल 2004 में वह परमानेंट जज बनाये गये। साल 2017 को सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति जज के रूप में हुई।