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विदेश से जुड़े हैं नागरिकता कानून विरोध के तार

हाल-फिलहाल दिल्ली के शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन का सच एक वीडियो से सामने आया है जिसमें धरने पर बैठने के लिए हर शिफ्ट में पांच सौ रुपये रोजाना दिए जाने की बात सुनी जा सकती है।

Roshni Khan

Roshni KhanBy Roshni Khan

Published on 17 Jan 2020 8:05 AM GMT

विदेश से जुड़े हैं नागरिकता कानून विरोध के तार
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नीलमणि लाल

लखनऊ: हाल-फिलहाल दिल्ली के शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन का सच एक वीडियो से सामने आया है जिसमें धरने पर बैठने के लिए हर शिफ्ट में पांच सौ रुपये रोजाना दिए जाने की बात सुनी जा सकती है। सीएए के खिलाफ प्रदर्शन में शरीक होने के लिए किराया माफी सरीखी तमाम रियायतों को दिए जाने की बात भी वीडियो में देखी जा सकती है। ऐसे में इस सवाल का उठना मौजू हो जाता है कि देश भर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के कार्यक्रम स्वप्रेरित हैं या फिर शाहीनबाग की तरह इनके पीछे भी कोई बड़ा हाथ है।

बीते दिनों कई राज्य सरकारों को इनके पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के हाथ होने के प्रमाण हाथ लगे थे,लेकिन इन धरना प्रदर्शनों के पीछे सिर्फ पीएफआई के हाथ होने की बात बेहद छोटी है। हकीकत यह है कि ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ (आईएएमसी) की भी भूमिका कम नहीं है। यह संगठन अपनी गतिविधियां अमेरिका से संचालित करता है। आईएएमसी की वेबसाइट में बताया गया है कि इस संगठन का नाम पहले ‘इंडियन मुस्लिम काउंसिल-यूएसए’ था। यह अमेरिका में भारतीय मुसलमानों की वकालत करने वाला सबसे मजबूत फ्रंट और बड़ा समूह है।

इस्लामिक उग्रवाद को बढ़ावा देना मकसद

राज्य और केंद्र सरकारों की पड़ताल बताती है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) भले ही कथित रूप से पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला संगठन होने का दम भरता हो, लेकिन इसका वास्तविक मकसद भारत में इस्लामिक उग्रवाद को बढ़ावा देना है। हाल में उग्र प्रदर्शन भडक़ाने में एक बार फिर इस संगठन का नाम प्रमुखता से आया है। एनआईए ने 2017 में गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपकर दावा किया था कि यह संस्था कई आतंकी गतिविधियों में शामिल है। इसमें आतंकी कैंप चलाना व बम बनाना भी शामिल है। गृह मंत्रालय से इस संगठन को अवैध गतिविधि रोकथाम कानून के तहत प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।

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आईएएमसी कर रहा सीएए का विरोध

हमारी पड़ताल बताती है कि पीएफआई से कम खतरनाक काम आईएएमसी नहीं कर रहा है। इसे ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ (आईएएमसी) के नाम से जाना जाता है। इसकी वेबसाइट में बताया गया है कि इस संगठन का नाम पहले ‘इंडियन मुस्लिम काउंसिल-यूएसए’ था। यह अमेरिका में भारतीय मुसलमानों का एडवोकेसी यानी उनकी वकालत करने वाला सबसे बड़ा ग्रुप है। वेबसाइट में दावा किया गया है कि इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल का मिशन स्ट्रैटेजिक (रणनीतिक) एडवोकेसी के जरिये शांति, बहुलवाद और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है। यह संगठन वाशिंगटन डीसी में पंजीकृत एक नॉन प्रॉफिट संगठन है जिसकी स्थापना अगस्त, 2002 में हुई थी। इसकी साइट पर चंदे के लिए लोगों से जोरदार अपील की गई है। आईएएमसी की वेबसाइट पर सीएए के विरोध की खबरें और फोटो भरी पड़ी हैं।

अयोध्या पर फैसले की आलोचना

इस वेबसाइट पर अयोध्या मसले पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले की आलोचना है तो हिन्दुत्व के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की प्लानिंग के समाचार भी हैं। कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने की कड़ी निंदा की गई है तो अनुराग कश्यप, कन्हैया कुमार, राजकुमार राव, सुधीर मिश्रा, अलंकृता श्रीवास्तव, कोंकणा सेन, रिचा चड्ढा, सोनी राजदान, स्वरा भास्कर, तापसी पन्नू को ‘काउंटरिंग द हेट’ यानी घृणा का जवाब देने वाला बताया गया है।

पुलिस की कार्रवाई को एकपक्षीय बताया

भारत में हाल में हुए उपद्रव के दोषियों के बारे में तो इस साइट पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी की घेराबंदी, आतंक का राज जैसे शीर्षकों से रिपोर्ट दी गई है जिसमें पुलिस की कार्रवाई को एकपक्षीय और बर्बर बताते हुए ऐसी तस्वीर पेश की गई है मानो यहां खून की नदियां बह रही हों। साइट पर दी गई रिपोर्टों के साथ जो तस्वीरें लगाई गई हैं उनमें कुछ तो साफ तौर पर फोटोशॉप की हुई या फिर किसी सिनेमा की फोटो लगती हैं। कुल मिलाकर यह साइट भारत विरोधी नजरिया पेश करते हुए यह बताने की पुरजोर कोशिश करती है कि भारत में मुस्लिमों पर कहर ढाया जा रहा है और नागरिकता कानून बहुत ही जुल्मकारी है।

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गुजरात दंगों के बाद बनी काउंसिल

हमारी पड़ताल बताती है कि इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल की स्थापना 2002 में गुजरात दंगों के बाद हुई थी। इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में एक प्रमुख नाम है शेख उबैद का। यह शख्स ‘कोलिशन अगेंस्ट जिनोसाइड’ (सीएजी) नामक ग्रुप का मुख्य समन्वयक है। शेख उबैद आईएएमसी का संस्थापक अध्यक्ष भी रह चुका है। अब भी वह इस संगठन में प्रमुखता से शामिल है। इसके अलावा वह इंडियन माइनॉरिटीज एडवोकेसी नेटवर्क (इमान नेट) और मुस्लिम पीस कोलिशन यूएसए का भी संस्थापक है।

मूल रूप से उबैद हैदराबाद का है, लेकिन अमेरिका में प्रसिद्ध डाक्टर भी है। वह ‘हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन’ के कट्टर विरोधी है। उबैद ने 2014 में एक इंटरव्यू में कहा था कि हिन्दुत्व की हिंसक सर्वोच्चतावादी विचारधारा मुसलमानों, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों का भारत से सफाया चाहती है। हिन्दुत्व प्रोपोगेंडा के चलते मोदी के गृह राज्य गुजरात में स्कूली छात्रों के लिए गांधी से बड़े हीरो हिटलर हैं।

जबसे नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में पेश हुआ तबसे आईएएमसी इसका विरोध करता है। 2018 में जब ये बिल लोकसभा में पास किया गया था तभी आईएएमसी ने अमेरिकी सीनेट का आह्वान किया था कि वह ‘भारत में अल्पसंख्यकों की धार्मिक आजादी पर लगातार हमलों’ के मसले पर सुनवाई आयोजित करे।

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जामिया-एएमयू के छात्रों से दिखाई एकजुटता

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी में पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा भी की है। काउंसिल के अध्यक्ष अहसान खान ने एक बयान में कहा था कि उनका संगठन जामिया मिलिया और एएमयू के छात्रों और टीचरों के साथ पूर्ण एकजुटता दिखाता है। आईएएमसी के उपाध्यक्ष सैयद अली ने कहा है कि यह कानून (सीएए) खुलेआम मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है। आईएएमसी ने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का भी आह्वान किया है।

कोलीशन एगेंस्ट जीनोसाइड

जीनोसाइड यानी नरसंहार। कोलीशन एगेंस्ट जीनोसाइड (सीएजी) एक संगठन है जो अपने आपको नरसंहार के खिलाफ काम करने का दावा करता है। कोलीशन एगेंस्ट जीनोसाइड अमेरिका और कनाडा स्थित 40 संगठनों और अनेक व्यक्तियों का गठबंधन है। यह गठबंधन 2002 के गुजरात दंगों को ‘गुजरात नरसंहार’ करार देता है। इस संगठन की स्थापना में अंगना चटर्जी ने काफी मदद की थी। अंगना चटर्जी अमेरिका में रहती हैं और कश्मीर में मानवाधिकार हनन को काफी जोरशोर से उठाती रही हैं। इस गठबंधन का एक अन्य संस्थापक है- उबेद शेख जिसने बाद में एलायंस फॉर जस्टिस एंड एकाउंटिबिलिटी (एजेए) नामक एक्टिविस्ट ग्रुप बनाया। ‘कोलीशन एगेंस्ट जीनोसाइड’ ने 2005 में नरेन्द्र मोदी को अमेरिका यात्रा का वीसा देने का पुरजोर विरोध किया था। उसके बाद यह गठबंधन लगातार मोदी का हर मंच पर विरोध करता रहा है। मोदी की पिछले साल ह्यूस्टन यात्रा में इसने विरोध प्रदर्शन किए थे।

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विरोधियों की लंबी फेहरिस्त

-आईएएमसी संगठन के पीछे कौन लोग हैं, संगठन के पदाधिकारी कौन हैं, इसके बारे में साइट पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। ‘अबाउट अस’ में किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन साइट पर ही ‘आईएएमसी रिस्पॉंस’ शीर्षक से एक सेक्शन में इस संगठन द्वारा एक टीवी चैनल को लिखी गई चि_ी दी हुई है जिसमें आईएएमसी के अमेरिका में आयोजित किसी प्रोग्राम की कवरेज पर आपत्ति जताई गई है। इस चि_ी के नीचे जो नाम दिए गए हैं उनमें अहसान खान (अध्यक्ष, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल), खालिद अंसारी (कोआर्डिनेटर, कोलिशन फॉर डिफेंस ऑफ द कांस्टीट्यूशन एंड डेमोक्रेसी), माइक घाउस (संस्थापक, सेंटर फॉर प्लूरलिज्म), पवन सिंह (डाइरेक्टर, आर्गनाइजेशन फॉर माइनॉरटीज ऑफ इंडिया) और सारा सी.एंडरसन (दलित प्रीस्ट, ग्रेस लुथेरन चर्च) शामिल हैं।

-इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल के अध्यक्ष अहसान खान ने 15 अगस्त, 2018 को कहा था कि हमें एक और स्वतंत्रता आंदोलन की जरूरत है। हमें उस शातिर विचारधारा के शिकंजे को तोडऩे की जरूरत है जो धर्म, जाति और पंथ के आधार पर भारतीयों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने पर तुला है। अहसान अहमद कठुआ से लेकर उन्नाव रेप कांड को लेकर वाशिंगटन में विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं और हमेशा मोदी पर कठघरे में खड़ा करते हैं।

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-सीएजी, आईएएमसी और इनके सहयोगियों की पड़ताल करने वाली वेबसाइट ‘अ हाउस ऑफ काड्र्स डॉट नेट’ के अनुसार सीएजी के कोर ग्रुप में शामिल संगठनों में 17 संगठन ऐसे हैं जो ‘फोरम ऑफ इंकलाबी लेफ्टिस्ट्स’ (एफओआईएल) से जुड़े हुए हैं। ‘फोरम ऑफ इंकलाबी लेफ्टिस्ट्स’ का नाम पहले ‘फोरम ऑफ इंडियन लेफ्टिस्ट्स’ हुआ करता था जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी और इसका उद्देश्य ‘हिन्दुत्व और नियो लिबरल हमले का सामना करना था। छह संगठन ऐसे हैं जो इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल से जुड़े हैं।

- भारत के नागरिकता संशोधन कानून का अमेरिका में बैठकर विरोध करने वालों में ‘इस्लामिक सर्किल ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ नामक संगठन भी शामिल है। 6 जनवरी, 2020 को वाशिंगटन डीसी में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की खबर कैलीफोर्निया की समाचार वेबसाइट ‘इंडिया वेस्ट डॉट कॉम’ ने प्रकाशित की। खबर के अनुसार इस प्रेस कान्फ्रेंस में इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर पीस एंड जस्टिस, इस्लामिक सर्किल ऑफ नॉर्थ अमेरिका, काउंसिल फॉर सोशल जस्टिस, काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशंस, काउंसिल ऑन माइनारिटी राइट्स इन इंडिया, जस्टिस फॉर ऑल समेत अन्य संगठनों के लोग शामिल थे।

-प्रेस कान्फ्रेस में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्रालय और कांग्रेस (संसद) के सदस्यों से आग्रह किया गया वे भारत में बनाए गए कथित भेदभावपूर्ण कानून और मानावाधिकार उल्लंघनों को ‘अस्वीकार’ घोषित कर दें। यह भी मांग की गई कि अमेरिका भारत से नागरिकता संशोधन कानून को रद करने के लिए कहे, भारत के गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ प्रतिबंध लगाए, सीएए विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ हुई ‘हिंसा’ की जांच अमेरिका के विदेश विभाग से कराई जाए। इन गुटों ने तो यहां तक कह दिया कि ‘सीएए और एनआरसी के कंबिनेशन से सरकार को भारतीय मुसलमानों को नॉन- सिटिजन घोषित करने का कानूनी आधार मिल जाएगा।

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- इस्लामिक काउंसिल ऑफ नॉर्थ अमेरिका (आईसीएनए) के तार पाकिस्तान के अतिवादी संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े बताए जाते हैं। आतंकवाद संबंधी वेबसाइट ‘इन्वेस्टिगेटिव प्रोजेक्ट डॉट ओआरजी’ ने 15 दिसम्बर, 2009 को एक पोस्ट में लिखा है कि 1997 में आईसीएनए के दक्षिणपूर्वी रीजनल कन्वेंशन में अमेरिकी नागरिक लॉरेंस निकोलस थॉमस उर्फ जिबरिल अबू आदम को सम्मानित किया गया जो कश्मीर में लश्कर ए तैयबा के आतंकियों के गुट में शामिल था। भारतीय सेना की एक चौकी पर हमले के दौरान हुई मुठभेड़ में अबू आदम मारा गया था।

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