तबाही ही तबाही: मौत का इतना भयानक मंजर, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

देश के ऊपर तबाही के बादल छाए हुए हैं। पहले से ही महामारी का संकट और लगातार भूकंप के आ रहे झटकों ने सभी की चिंता को बढ़ा दिया है। ऐसे में अब नए संकट का कहर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

Published by Vidushi Mishra Published: July 2, 2020 | 5:05 pm

नई दिल्ली। देश के ऊपर तबाही के बादल छाए हुए हैं। पहले से ही महामारी का संकट और लगातार भूकंप के आ रहे झटकों ने सभी की चिंता को बढ़ा दिया है। ऐसे में अब नए संकट का कहर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। जम्मू-कश्मीर के काराकोरम श्रेणी में श्योक नदी के प्रवाह को बर्फ के एक ग्लेशियर ने रोक दिया है। जिससे अब वहां एक बड़ी झील बन गई है। इस झील में इतना ज्यादा पानी जमा हो गया है कि उसके फटने की आशंकाएं जताई जा रही हैं।

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वैज्ञानिकों ने ये चेतावनी जारी की

इस झील के बारे में देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी (WIG) के वैज्ञानिकों ने ये चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों ने सतर्क करते हुए बताया है कि जम्मू-कश्मीर काराकोरम रेंज सहित पूरे हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों द्वारा नदी के प्रवाह को रोकने पर कई झीलें बनी हैं। बताया जा रहा है कि ये बहुत भयानक और खतरनाक स्थिति है।

 

साथ ही कई वैज्ञानिकों ने श्योक नदी सहित हिमालय की नदियों पर जो रिसर्च किया है वह इंटरनेशनल जर्नल ग्लोबल एंड प्लेनेटरी चेंज में प्रकाशित हुआ है। इस रिपोर्ट में दुनिया के जाने-माने जियोलॉजिस्ट प्रो. केनिथ हेविट ने भी सहायता की है।

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नदियों का प्रवाह को रोकने संबंधी

ऐसे में देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. राकेश भाम्बरी, डॉ. अमित कुमार, डॉ. अक्षय वर्मा और डॉ. समीर तिवारी ने 2019 में हिमालय क्षेत्र में नदियों का प्रवाह को रोकने संबंधी रिसर्च ग्लेशियर, आइस डैम, आउटबर्स्ट फ्लड एंड मूवमेंट हेट्रोजेनेटी ऑफ ग्लेशियर किया है।

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इसके साथ ही रिसर्च में वैज्ञानिकों ने श्योक नदी के आसपास के हिमालयी क्षेत्र में 145 लेक आउटबर्स्ट की घटनाओं का पता लगाया है। इन सारी घटनाओं के रिकॉर्ड को एनालिसिस करने के बाद ये रिपोर्ट तैयार की है।

दरअसल रिसर्च में ये पता चला है कि हिमालय क्षेत्र की करीब सभी घाटियों में स्थित ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। लेकिन पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) वाले जम्मू-कश्मीर काराकोरम क्षेत्र में ग्लेशियर में बर्फ की मात्रा बढ़ रही है। ऐसे में ये ग्लेशियर जब बड़े होते हैं तो ये नदियों के प्रवाह को रोकते हैं।

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