कारगिल युद्ध में भारत के इस ‘बहादुर’ ने चटाई धूल, पाकिस्तान ने नाम दिया चुड़ैल

कारगिल युद्ध के 21 सला पूरे हो चुके हैं। साल 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान को युद्ध में हराकर कारगिल में तिरंगा फहराया था।

नई दिल्ली: कारगिल युद्ध के 21 साल पूरे हो चुके हैं। साल 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान को युद्ध में हराकर कारगिल में तिरंगा फहराया था। तब से हर साल इस दिन को कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

इस जंग में 527 भारतीय जवान हुए थे शहीद

1998 की सर्दियों में ही कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर पाकिस्‍तानी घुसपैठियों ने कब्‍जा कर लिया था। 1999 की गर्मियों की शुरुआत में जब सेना को पता चला तो सेना ने उनके खिलाफ ऑपरेशन विजय चलाया। करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में लड़ी गई इस जंग में 527 भारतीय जवान शहीद हुए थे और 1363 जवान बुरी तरह घायल हुए थे।

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कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना ने निभाई अहम भूमिका

वहीं इस जंग में भारतीय वायुसेना ने अहम रोल निभाया। साल 1999, कारगिल की ऊंची चोटियों पर घात लगाकर बैठे पाक सैनिकों को इस बात का अंदाजा भी नहीं थी कि उनके ऊपर से आसामान से हमला हो सकता है। 11 मई से भारतीय वायुसेना भी इस जंग में शामिल हो गई थी। वायुसेना का लड़ाकू विमान मिराज, मिग-21, मिग 27 ने इस युद्ध में दुश्मन पर कहर ढाया था।

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भारत का ‘बहादुर’ विमान, जिसने दुश्मनों पर ढाया कहर

वहीं इंडिया एयर फोर्स के मिग 27 लड़ाकू विमानों ने इस जंग में अहम भूमिका निभाई और आसमान से पाकिस्तानी सैनिकों पर आग बरसानी शुरू कर दी। भारतीय वायुसेना के इस बहादुर विमान ने पाक की हालत ही बिगाड़ कर रख दी। इस बहादुर ने पाक सेना के सप्लाई और पोस्ट पर एकदम सटीक और घातक बीमारी की, जिससे उनके पांव उखड़ गए।

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पाकिस्तान ने भारत के बहादुर को नाम दिया था ‘चुड़ैल’

मिग-27 को साल 1985 में भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल किया गया था। ये विमान तत्कालीन सोवियत रूस से खरीदे गए थे। मिग उस दौर का सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान था। ये 1700 किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने और हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम था। साथ ही ये विमान साथ 4,000 किलो हथियार ले जाने में भी सक्षम थे। लड़ाकू विमान मिग-27 को कारगिल युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए इसे बहादुर नाम दिया गया है। वहीं भारत के इस विमान का खौफ पाकिस्तान के दिलो दिमाग में ऐसा छाया कि पाक ने इस बहादुर को ‘चुड़ैल’ नाम दे डाला।

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तीन दशक तक की वायुसेना की सेवा

38 साल पहले इस लड़ाकू विमान को वायुसेना में शामिल किया गया था। मिग-27 ने तीन दशक तक भारत की वायुसेना की सेवा की। हालांकि अब इस विमान की जगह मिग-21 लड़ाकू विमान ने ले ली है। हालांकि भारतीय वायुसेना में अपने 38 साल के सफर के दौरान इस लड़ाकू विमान ने कई उतार-चढ़ाव भी देखें हैं। वहीं इसके आवाज से ही केवल दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा हो जाता था।

पिछले साल हुआ रिटायर

इस विमान ने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के ठिकानों पर सटीकता के साथ रॉकेट और बम से हमले किए थे और अपना पराक्रम दिखाया था। पिछले साल ही भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-27 आज वायुसेना से रिटायर हो गया। मिग-27 ने तीन दशक तक भारत की वायुसेना की सेवा की।

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