कृष्णानंद मर्डर केस: स्पेशल जज बोले- न मुकरे होते गवाह तो कुछ और ही होता फैसला

इस मामले को स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने भयानक बताया। उन्होंने फैसले में यह भी बताया कि इस मामले की जांच सीबीआई को यूपी पुलिस से लेकर दी गई थी। वहीं, 2013 में गाजीपुर से यह केस दिल्ली ट्रांसफर किया गया था।

कृष्णानंद मर्डर केस: स्पेशल जज बोले- न मुकरे होते गवाह तो कुछ और ही होता फैसला

कृष्णानंद मर्डर केस: स्पेशल जज बोले- न मुकरे होते गवाह तो कुछ और ही होता फैसला

नई दिल्ली/लखनऊ: दिल्ली की अदालत ने बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी और उनके सांसद भाई अफजाल अंसारी समेत सभी आरोपितों को बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या के मामले में बरी कर दिया। बता दें कि इस मामले पर कोर्ट में करीब छह साल सुनवाई चली लेकिन गवाह मुकरने की वजह से इसका परिणाम कुछ और आया।

यह भी पढ़ें: मोदी सरकार ने किसानों को दिया तोहफा, किया ये बड़ा ऐलान

कृष्णानंद मर्डर केस पर क्या बोले जज?

इस मामले को स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने भयानक बताया। उन्होंने फैसले में यह भी बताया कि इस मामले की जांच सीबीआई को यूपी पुलिस से लेकर दी गई थी। वहीं, 2013 में गाजीपुर से यह केस दिल्ली ट्रांसफर किया गया था।

यह भी पढ़ें: मुन्ना बजरंगी हत्याकांड: जांच में दोषी पाए गए बागपत जेल के जेलर उदय प्रताप बर्खास्त

यह ट्रांसफर कृष्णानंद की पत्नी अलका राय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने किया था। मगर यह केस पलट गया क्योंकि गवाह मुकर गए। अगर विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम, 2018 का लाभ गवाहों को ट्रायल के दौरान किया गया होता तो शायद आरोपियों को सजा मिल गई होती।

मुख्य आरोपी थे मुख्तार अंसारी

इस मामले में पुलिस और सीबीआई ने मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी के अलावा 11 आरोपियों के खिलाफ छह अलग-अलग चार्जशीट दायर की थीं। संजीव माहेश्वरी जीवा, मुन्ना बजरंगी, एजाज, अता उर रहमान, फिरदौस, राकेश पाण्डेय, रामू मल्लाह, विश्वास नेपाली, जफर, अफरोज खान और मंसूर अंसारी आरोपियों के नाम हैं।

यह भी पढ़ें: मुन्ना बजरंगी मर्डर इफेक्ट: गैंगवार की आशंका, माफियाओं संग STF भी एलर्ट पर

इसमें से ट्रायल के दौरान फिरदौस की मौत हो गई, जबकि नौ जुलाई 2018 को बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी गई। इसके अलावा आज तक विश्वास नेपाली और जफर कभी पुलिस और सीबीआई के हाथ नहीं लगे। वहीं, यह केस अफरोज उर्फ चुन्नू पहलवान के खिलाफ बंद हो चुका है। ऐसे में कल कोर्ट के फैसला आने के बाद बाकि बचे आरोपी भी बरी हो गए।

14 साल बाद आया फैसला

बागपत जेल में सोमवार की सुबह मारे गए मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या कर यूपी में सनसनी फैला दी थी। इसी घटना के बाद मुन्ना बजरंगी का नाम मुख्तार गैंग के शूटर के रूप में सामने आया। मुख्तार अंसारी के साथ बजरंगी इस हत्याकांड में नामजद है।

यह भी पढ़ें: राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा, ये हो सकते हैं अंतरिम अध्यक्ष

29 नवंबर 2005 को करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र गोडउर गांव निवासी भाजपा विधायक कृष्णानंद राय क्षेत्र के सोनाड़ी गांव में क्रिकेट मैच का उद्घाटन करने के बाद वापस अपने गांव लौट रहे थे। शाम करीब चार बजे बसनियां चट्टी पर उनके काफिले को घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग हुई थी। एके-47 से गोलियों की बौछार कर विधायक समेत सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। हमले के दौरान करीब 5 सौ से अधिक गोलियों का प्रयोग किया गया था।

यह भी पढ़ें: लो कांग्रेस का तो कोई अध्यक्ष ही नहीं, खुद ‘राहुल गांधी’ ने कहा

इस मामले में विधायक मुख्तार अंसारी, जिले के सांसद रहे अफजाल अंसारी समेत और मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। घटना के कई वर्षों तक मुन्ना बजरंगी नहीं पकड़ा गया तो उसके ऊपर सात लाख रुपये का इनाम घोषित हो गया। विवेचना के दौरान मुन्ना बजरंगी के कई शुटरों का नाम प्रकाश में आया। जिसमें फिरदौस समेत जिवा व अन्य शुटरों को शामिल किया गया। जिले में पहली बार मुन्ना बजरंगी ने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया था। वह भी मुख्तार गैंग से जुड़ने के बाद सुर्खियों में आया।

पूर्व डीएसपी ने की सीएम योगी से अपील

इस मामले को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ से पूर्व डीएसपी शैलेंद्र कुमार सिंह ने एक अपील की है। उन्होंने अपील कि है कि सीएम परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करवाएं। दरअसल, साल 2004 में शैलेंद्र ने सेना के भगोड़े से एलएमजी पकड़ी थी, जोकि कृष्णानंद राय की हत्या के लिए मुख्तार अंसारी ने मंगाई थी।

यह भी पढ़ें: रथयात्रा: आज सुबह अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर पहुंचे अमित शाह, पत्नी संग की पूजा

शैलेंद्र का कहना है कि उनके पास इस मामले से सम्बंधित एक रिकॉर्डिंग भी है। इस रिकॉर्डिंग में राय की हत्या के लिए मुख्तार एलएमजी मंगाने की बात कह चुके हैं। यह रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर कोर्ट में मान्य है क्योंकि इसे शासन की अनुमति से रिकॉर्ड किया था।