यादें 2019 की: सुप्रीम कोर्ट के वो बड़े फैसले, जिन्होंने बदल दी देश की तस्वीर…

दिल्ली: नए साल (New year 2020) ने दस्तक दे दी है और इसी के साथ साल 2019 का आज आखिरी दिन है। अगर इस साल को मुड़ कर देखा जाए तो भारत के लिए अहम फैसलों वाला साल रहा। साल 2019 को सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों के लिए याद किया जाएगा। बात चाहे राम मंदिर की हो, या कर्नाटक की राजनीति में आये संकट की, राफेल की करें या फिर खुद चीफ जस्टिस का आरटीआई के दायरे में आने का, इस साल का नाम जब जब आएगा, तब तब इन सब अहम फैसलों को याद किया जाएगा। 

Published by Shivani Awasthi Published: December 31, 2019 | 11:44 am
Modified: December 31, 2019 | 11:47 am
Supreme court

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दिल्ली: नए साल (New year 2020) ने दस्तक दे दी है और इसी के साथ साल 2019 का आज आखिरी दिन है। अगर इस साल को मुड़ कर देखा जाए तो भारत के लिए अहम फैसलों वाला साल रहा। साल 2019 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के ऐतिहासिक फैसलों के लिए याद किया जाएगा। बात चाहे राम मंदिर की हो, या कर्नाटक की राजनीति में आये संकट की, राफेल की करें या फिर खुद चीफ जस्टिस का आरटीआई के दायरे में आने का, इस साल का नाम जब जब आएगा, तब तब इन सब अहम फैसलों को याद किया जाएगा।

सबसे बड़ा फैसला : अयोध्या का विवादित राम मंदिर

दशकों से हिंदूओं की आस्था और मुस्लिमों के विश्वास से जुड़ा ‘अयोध्या का राम मंदिर’ मुद्दा इस साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हमेशा-हमेशा के लिए सुलझ गया। राजनीतिक दलों के लिए चुनावी वादों का केंद्र ‘राम मंदिर’ विवाद पर लंबी सुनवाई के एससी ने 9 नवंबर 2019 को अहम फैसला सुनाया।

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सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायमूर्तियों की बेंच ने 40 दिन तक नियमित सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए अयोध्या में विवादित भूमि का कब्ज़ा सरकारी ट्रस्ट को मंदिर बनाने के लिए दे दिया। वहीं अयोध्या में ही मस्जिद के लिए जमीन आवंटित करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने अपने फैसले में ‘रामलला’ को 2.77 एकड़ ज़मीन का मालिकाना हक दिया, तो वहीं सरकार को निर्देशित किया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ ज़मीन दी जाये।

राफेल पर सरकार की क्लीन चिट:

बात करें अगर इस साल के सबसे विवादित मुद्दों की तो ‘राफेल डील’ का जिक्र सबसे पहले आएगा। कांग्रेस ने ‘राफेल डील’ पर केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाये। राफेल विमान सौदे को लेकर मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

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दरअसल, राफेल की खरीद को लेकर इस साल चुनावी सभाओं से लेकर देश विदेश तक चर्चा का दौर जारी रहा। कांग्रेस के राहुल गांधी ने यह मामला कटघरे तक पहुंचा दिया। मोदी सरकार पर राफेल डील में धांधली करने का आरोप लगाया गया। विपक्षियों को बड़ा झटका तब लगा जब कोर्ट ने राफेल विमान सौदे को लेकर दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि राफेल डील मामले में दोबारा किसी तरह की सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट का यह फैसला मोदी सरकार के लिए क्लीन चिट था।

कर्नाटक संकट: अयोग्य विधायकों पर फैसला

कर्नाटक में राजनीतिक नाटक इस साल चर्चा बना रहा। कर्नाटक का सियासी घमासान कोर्ट तक पहुंच गया और इस केस में 17 विधायकों को सर्वोच्च न्यायालय ने अयोग्य घोषित किया। बता दें कि कर्नाटक के 17 विधायकों के बागी होने के बाद जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन की सरकार गिर गयी थी। जिसके बाद भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में राज्य में सरकार बनाई।

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इस दौरान जुलाई में कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने दल-बदल कानून के तहत बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। मामले पर एससी ने एक तरफ तो स्पीकर के फैसले को सही ठहराया। वहीं दूसरी तरफ, सभी 17 बागी विधायकों को उपचुनाव में हिस्सा ले सकने की भी अनुमति दी। कोर्ट ने 2023 तक अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को भी रद्द कर दिया

कांग्रेस-जेडीएस

आरटीआई के दायरे में सीजीआई:

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल एक और ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसके तहत मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना के अधिकार के तहत आ गया। दरअसल, कोर्ट का यह बड़ा फैसला चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के कार्यालय के खिलाफ था। कोर्ट ने कहा, भारत के मुख्य न्यायाधीध का कार्यालय पब्लिक अथॉरिटी है, जो आरटीआई के तहत आएगा। हालाँकि कोर्ट ने यह भी कहा कि दफ्तर की गोपनीयता बरकरार रहेगी। यह फैसला तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस दीपक गुप्ता, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस रमन्ना की बेंच ने सुनाया।

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मुंबई में डांस बार दोबारा खोलने पर फैसला:

मुंबई में डांस बार को लेकर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया और इसे दोबारा खोलने की अनुमति दे दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि मुंबई में नए सुरक्षा और नियमों के साथ डांस बार दोबारा से खोले जा सकते हैं, लेकिन डांस बार में पैसों की बारिश करने की इजाजत नहीं होगी। वहीं कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि डांस बार में सीसीटीवी कैमरों की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे लोगों की निजता यानी प्राइवेसी का उल्लंघन होता है।

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