जहरीली हवा में जी रहे आप, बचने के लिए करें ये उपाय

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में लगातार बढ़ रहे प्रदुषण के मद्देनजर बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा करते हुए 5 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में लगातार बढ़ रहे प्रदुषण के मद्देनजर बड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा करते हुए 5 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही साथ छठ पर पटाखा फोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

ज्ञात हो कि दिवाली के बाद से दिल्ली-NCR की आतिशबाजी के चलते राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश की आबोहवा खराब हो गई है, दिल्ली-एनसीआर गैस चैम्बर बन गया है और लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। इतना ही नहीं, वायु प्रदूषण के चलते लोगों की जिंदगी पर संकट बढ़ता जा रहा है।

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शिकागो यूनिवर्सिटी ने कहा…

दिल्ली में बढ़ रहे वायु प्रदुषण के मद्देनजर शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) की माने तो अगर भारत में वायु प्रदूषण कम रहता है और वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों अनुसार रहती है, तो लोग औसतन चार साल ज्यादा जीवित रह सकते हैं।

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स में कही ये बात…

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर समेत भारत के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में वायु प्रदूषण की वजह से लोगों की जिंदगी 9 साल तक कम होती जा रही है।

इसके साथ ही एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स में कहा गया है कि अगर इन शहरों में प्रदूषण कम हो जाए, तो यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी 9 साल तक बढ़ जाएगी। वहीं, अगर आगरा में वायु प्रदूषण कम हो जाए, तो वहां के लोगों की जिंदगी 8.1 वर्ष और बरेली के लोगों की जिंदगी 7.8 वर्ष तक बढ़ सकती है।

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जानलेवा है वायु प्रदूषण…

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स के मुताबिक अगर हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) राष्ट्रीय या डब्लूएचओ मानकों को पूरा करता है, तो देश की जनता की उम्र में काफी इजाफा हो सकता है।

आपको बता दें कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 (पीएम 2.5) आकार में 2.5 माइक्रोन से कम होता है, यह मानव बाल के मुकाबले 30 गुना अधिक महीन होता है और सांस लेने से ये फेफड़ों में प्रवेश कर सकता है और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

जीवनकाल पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने वाला एक्यूएलआई भारत की राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक से एक कदम आगे है, जो हवा में 8 प्रदूषक की उपस्थिति को मापता है और स्तर की गंभीरता को 6 कटेगरी में दर्ज करता है, भारत में वायु गुणवत्ता का निर्धारण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करता है।

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वायु प्रदूषण कम होने से दिल्ली को सबसे ज्यादा फायदा…

दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ने 98 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का वार्षिक औसत दर्ज किया है, जो कि राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक के तहत सुरक्षित माने जाने वाली सीमा से दोगुना है और डब्ल्यूएचओ मानक से करीब 10 गुना ज्यादा है। खास बात यह है कि वायु प्रदूषण कम करने से सबसे ज्यादा दिल्ली को लाभ मिलेगा।

अगर दिल्ली की वायु की गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों तक पहुंचती है, तो दिल्लीवासियों का जीवन करीब 5.9 साल ज्यादा होगा, जबकि डब्ल्यूएचओ के मानक तक पहुंचने से नौ साल का इजाफा हो सकेगा।

इस तरह तैयार होता है एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स…

एक्यूएलआई ‘प्रोसीडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित शोधों के डेटा पर आधारित है. इसके मुताबिक आकार (पीएम 10) में 10 माइक्रोन की हवाई सामग्री में 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि से 0.64 साल जिंदगी कम हो जाती है।

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वायु में पीएम 2.5 के निर्धारित स्तरों के लिए डब्ल्यूएचओ मानक 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, लेकिन पीएम 2.5 के लिए भारत की राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, यह डब्ल्यूएचओ के मानक से तीन गुना अधिक है।

वायु प्रदूषण से बचने के उपाय…

आपको बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता दीवाली के बाद से ही चिंताजनक स्थिति में पहुंच गई है, सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (एसएएफएआर) के अनुसार, सोमवार सुबह दिल्ली में हवा की गुणवत्ता 10 पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) पर थी, जो 476 पर गंभीर श्रेणी में है।

एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) की छह श्रेणियां हैं- अच्छी, संतोषजनक, मध्यम प्रदूषित, खराब, बहुत खराब और गंभीर। आपको बता दें कि इनमें से प्रत्येक श्रेणी वायु प्रदूषकों की मात्रा और उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के आधार पर तय की जाती है।

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प्रदूषित हवा से है ये नुकसान…

प्रदूषित हवा उन लोगों को ओर ज्यादा प्रभावित कर रही है जो पहले से सांस की समस्याओं जैसे ब्रॉंकियल अस्थमा, क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिस्ऑर्डर, इंटरस्टीशियल लंग डीजीज (फेफड़ों का रोग), सिस्टिक फाइब्रोसिस, फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित हैं।

इसके अलावा बुजुर्गो और कम प्रतिरक्षी क्षमता वाले लोगों पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है, मौजूदा स्थिति में सलाह दी जाती है कि जहां तक हो सके, प्रदूषित हवा के सम्पर्क में आने से बचें, वायू प्रदूषण से बचने के लिए मास्क पहनें।

वायु प्रदूषण से बचने के लिए करें ये उपाय…

1. घर की भीतरी हवा की गुणवत्ता को नियन्त्रित रखें- दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें. एयर प्यूरीफायर भी लगा सकते हैं।

2. पूरी बाजू के कपड़े पहनें और अपने चेहरे को अच्छी गुणवत्ता के मास्क से ढकें, इसके साथ ही नियमित समय अंतराल पर मास्क बदलें।

3. घर के बाहर किए जाने वाले व्यायाम से बचें, इसके बजाए घर के अंदर योगा जैसे व्यायाम करें।

4. अपने घर के आस-पास प्रदूषण कम करने के लिए पेड़ लगाएं।

5. प्रतिरक्षी क्षमता को मजबूत बनाने के लिए अदरक और तुलसी की चाय पीएं।

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6. अपने आहार में विटामिन सी, ओमेगा 3 और मैग्निशियम, हल्दी, गुड़, अखरोट आदि का सेवन करें।

7. हवा को फिल्टर करने वाले पौधे घर में लगाएं, जहरीली गैसों को कम करने के लिए कुछ पौधे बेहद काम आ सकते हैं। इन्हें एयर फिल्टरिंग प्लांट भी कहा जाता है, खुजली, जलन, लगातार जुकाम, एलर्जी और आंखों में जलन से बचाव में ये पौधे आपकी सहायता करेंगे।

8. आप घर में एलो वेरा, लिली, स्नेक प्लांट (नाग पौधा), पाइन प्लांट (देवदार का पौधा) मनी प्लांट, अरीका पाम और इंग्लिश आइवी लगा सकते हैं, यह पौधे घर की हवा को साफ करने में मददगार साबित होते हैं।

9. दिल्ली में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है। बुधवार सुबह एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 400 से ऊपर था। इसे गंभीर श्रेणी का माना जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर सलाह देते हैं कि जितना हो सके, घर के अंदर ही रहें। बाहर की सभी ऐक्टिविटी बंद कर दें।

प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति की वजह से पिछले कुछ दिनों में सरकारी अस्पतालों में अस्थमा और सांस से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

10. प्रदूषण गंभीर श्रेणी में है, तो बाहर के काम कुछ दिनों के लिए टाल दें और बाहर जाने से बचें- बाहर जाना है तो पहले पलूशन लेवल चेक कर लें। उसके हिसाब से बाहर का प्लान बनाएं, अच्छी क्वॉलिटी का मास्क और चश्मा जरूर पहनकर जाएं।

मास्क पहनने से सांस लेने में आसानी होगी और चश्मा प्रदूषण की वजह से आंखों में जलन रोकने में मदद करेगा, नाक और आंख को कुछ-कुछ देर बाद पानी से गीला करते रहें। इससे प्रदूषण के कण शरीर में प्रवेश नहीं करेंगे।

11. प्रदूषण की वजह से गले में दर्द महसूस हो रहा हो, तो भाप ले सकते हैं। इससे आराम न आए तो डॉक्टर से चेकअप जरूर करवाएं, दिन में चार से पांच लीटर पानी जरूर पिएं।

12. प्रदूषण के जो कण शरीर में गए हैं, पानी के साथ वह बाहर निकल जाएंगे, खाने में ज्यादा से ज्यादा विटमिन-सी और ओमेगा-3 वाले पदार्थों का सेवन करें।

इसके साथ ही मॉर्निंग वॉक, साइक्लिंग से परहेज करें, घर की बालकिनी या फिर छत पर एरेका पाम, मनी प्लांट, ऐलोवेरा, इंग्लिश आइवरी जैसे पौधे लगाएं। ये प्रदूषण कम करने में मददगार साबित होते हैं।

13. वैसे बुजुर्ग जिन्हें अस्थमा या सांस से जुड़ी कुछ बीमारी है, वे अपनी दवा और इन्हेलर रेगुलर लेते रहें। साथ ही निमोनिया वैक्सीनेशन भी जरूर करवाएं। बुजुर्गों को निमोनिया हुआ तो लंबे समय तक वे परेशान हो सकते है।

इसके साथ ही अच्छी क्वॉलिटी का मास्क प्रदूषण के कण को लंग्स में जाने से रोकता है। अगर आप मास्क नहीं पहनते तो यह कण शरीर में जाकर ब्लड में घुल जाते हैं, जो बेहद खतरनाक साबित होते हैं। आप एन-95 या एन-99 मास्क का इस्तेमाल करें।

14. गर्भवती महिलाएं घर से बाहर निकलने से बचें और साथ ही घर में भी मास्क लगाकर रहें। गांव, देहात या शहरों में भी कई जगह महिलाएं खाना बनाने के लिए लकड़ियां जलाती हैं और पाइप से फूंक मारती हैं, ऐसा न करें।

इसके साथ ही घर में ऐसी चीज न बनाएं या न जलाएं, जिससे धुआं हो क्योंकि इससे घर में प्रदूषण फैलता है, कोशिश करें कि घर में प्रदूषण का स्तर 10 से ज्यादा न हो।

15. अस्थमा या सांस से संबंधित कोई बीमारी है, तो अपनी दवाएं नियमित लें,डॉक्टर द्वारा दिए गए इन्हेलर (पंप) को बंद न करें। ऐसे मौसम में नियमित इन्हेलर लेते रहें, डायबीटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज दवाओं में लापरवाही न बरतें।

ध्यान दें कि समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप करवाते रहें, प्रदूषण के साथ-साथ सर्दियों का भी मौसम है, इसलिए स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। सावधानी बरतें और डॉक्टर के संपर्क में रहें।

16. प्रदूषण का स्तर 150 से ज्यादा हो, तो बच्चों को बाहर खेलने से रोकें, बच्चों को सुबह बाइक या स्कूटर से स्कूल छोड़ने न जाएं। बस या मेट्रो का इस्तेमाल करें।


बाइक या स्कूटर से जाते वक्त प्रदूषण के कण सीधे शरीर में प्रवेश करते हैं, अधिक प्रदूषण होने पर अगर बच्चे की आंख लाल हो जाती है या फिर आंख में जलन होती है तो उसे तुरंत आंखों के डॉक्टर को दिखाएं।

बच्चे जब स्कूल से या बाहर कहीं से घर आएं तो उनकी आंखों और नाक को गुनगुने पानी से धोएं – बच्चों की स्किन सॉफ्ट होती है। प्रदूषण होने पर स्किन से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं।

17. प्रतिदिन नये मास्क का उपयोग करें… अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो मास्क लगाकर निकलें। हो सके तो पूरा चेहरा ढक लें। एक मास्क को एक बार ही प्रयोग करें। एक ही मास्क का प्रयोग बार-बार करके आप वायरस और कई तरह के इंफेक्शन फैलाने वाले बैक्टीरिया की चपेट में आ सकते हैं।

18. चश्मा पहन कर ही बाहर निकलें। ताकि आंखों में बैक्टीरिया न फैल सके।

19. इसके साथ ही बार-बार हाथों से स्कीन को न छूएं।

20. घर के बाहर सड़कों को गीला करके रखें ताकि धूल के दूषित कण हवा में न उड़े पाएं।

21. वायु प्रदूषण से हो सकती हैं ये बीमारियां जैसे- जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी, टीबी और गले में में इन्फेक्शन, साइनस, अस्थमा, फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियां हो सकती है।

‘ज्यादा गंभीर’ स्थिती में दिल्ली…

दिपावली के बाद से लगातार दिल्ली में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर ‘ज्यादा गंभीर’ श्रेणी में प्रवेश कर गया है।

यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के एक पैनल ने पर्यावरण प्रदूषण प्राधिकरण(रोकथाम और नियंत्रण) ने सर्दियों के मौसम में पटाखे फोड़ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

पराली जलाए जाने से वायु गुणवत्ता ‘अति गंभीर’…

पंजाब और हरियाणा में प्रतिबंध के बावजूद लगातार पराली जलाए जाने के कारण दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की वायु गुणवत्ता बहुत ज्यादा बिगड़ गई है।

बता दें कि अधिकारियों ने यह जानकारी दी है, सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) इंडिया के अनुसार, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 412 पर पहुंच गया है जो ‘अति गंभीर’ श्रेणी में आता है।