जन्मदिन विशेष: सोनिया गांधी के बारे में ये दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी का सोमवार को 73वां जन्मदिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उनको जन्मदिन की बधाई दी है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि श्रीमती सोनिया गांधी जी को जन्मदिन की बधाई।

नई दिल्ली: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष और यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी का सोमवार को 73वां जन्मदिन है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उनको जन्मदिन की बधाई दी है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि श्रीमती सोनिया गांधी जी को जन्मदिन की बधाई। उनकी दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

डीएमके नेता एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई अन्य नेताओं ने भी सोनिया गांधी को जन्मदिन की बधाई दी है। कांग्रेस ने भी इस मौके पर बधाई दी है। बधाई देते हुए पार्टी ने ट्वीट कर लिखा है कि उनकी ताकत से पार्टी काफी मजबूत हुई है। कांग्रेस ने लिखा है कि सोनिया गांधी हमारी शक्ति और हमारी बड़ी नेता हैं। उस शख्स को जन्मदिन का मुबारकबाद जिसने महिलाओं की शक्ति, हमारे देश की संस्कृति और हमारे देश के लोगों की क्षमता को खुद में समाहित किया है।

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हालांकि सोनिया गांधी ने फैसला किया है कि वह अपना जन्मदिन मनाएगी। देश भर में बढ़ रहे महिलाओं के खिलाफ अपराध और अत्याचार को लेकर वह दुखी हैं जिसकी वजह से अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगी।

यह पहला ऐसा अवसर नहीं है जब सोनिया गांधी ने अपना जन्मदिन नहीं मनाने का फैसला किया है। इससे पहले 2014 में भी उन्होंने जन्मदिन नहीं मनाया था। उस वक्त जम्मू और कश्मीर और छत्तीसगढ़ में आतंकी और नक्सली घटनाओं को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया था। दोनों हमलों में शहीद हुए सेना और पुलिस के जवानों के सम्मान में उन्होंने यह फैसला किया था। 2013 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला के निधन पर जन्मदिन नहीं मनाया था।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनके बारे कुछ दिलचस्प जानकारी देंगे जिसके बारे में कम ही लोग जानते होंगे।

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सोनिया गांधी को चौंकाने वाले फैसले लेने लिए जाना जाता है। बताया जाता है कि 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के नेताओं ने जब राजीव गांधी से प्रधानमंत्री पद संभालने का आग्रह किया था, तो सोनिया ने अपने पति से प्रधानमंत्री नहीं बनने का आग्रह किया था। सोनिया गांधी अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं।

1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद जब पार्टी नेताओं ने सोनिया गांधी से जब कांग्रेस की कमान संभालने की गुजारिश की तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया। इसके सात साल बाद 1998 में जब कांग्रेस केंद्र में बेहद कमजोर हो गई थी और महज चार राज्यों में पार्टी की सरकार थी। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी अलग क्षेत्रीय पार्टी बना ली थी। तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी के घर जाकर उनसे पार्टी की कमान संभालने का अनुरोध किया, तब वह यह जिम्मेदारी संभालने पर राजी हुईं।

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वर्ष 2004 में हुए लोकसभा में सोनिया गांधी ने कांग्रेस को जीत दिलाई और पार्टी की सत्ता में वापसी कराई है। यह वह समय था जब कांग्रेस कमजोर नजर आ रही थी, लेकिन इसके बावजूद सोनिया ने पार्टी को जीत दिलाई। साल 2004 में बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को हराने के बाद जब कांग्रेस ने जीत हासिल की तब कहा जा रहा था सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनेंगी, लेकिन उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिससे सभी लोग चौंक गए।

उन्होंने मीडिया को बताया कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी और उन्होंने इस पद के लिए मनमोहन सिंह के नाम का ऐलान किया। इसके बाद यूपीए सरकार में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें।

स्वास्थ्य अच्छा नहीं होने की वजह से सोनिया गांधी ने राजनीति से थोड़ी दूरी बना ली। इसके बाद उनके बेटे राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने, लेकिन 2019 के चुनाव में हार के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सोनिया गांधी एक बार फिर अपने हाथ कांग्रेस की कमान ली है जब कांग्रेस देश में कमजोर दिख रही है। अब पार्टी नेताओं को आशा है कि कांग्रेस एक बार फिर केंद्र की सत्ता पर काबिज होगी।

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इंदिरा गांधी की छवि

कांग्रेस के कुछ बुजुर्ग नेताओं की मानें तो सोनिया गांधी जब सूती साड़ी पहनती हैं तो उन्हें उनमें इंदिरा गांधी की झलक दिखाई देती है। उन्होंने पिछले कई सालों से हिंदी में ही भाषण दिया है और अपने इतालवी मूल को लेकर विपक्षी बीजेपी की ओर से किए जाने वाले हमलों का करारा जवाब दिया है। सोनिया की अगुवाई में कांग्रेस 2004 से 2014 तक सत्ता पर काबिज रही। कांग्रेस दो बार केंद्र में सरकार बनाई और कुछ राज्यों की सत्ता पर काबिज होने में भी कामयाब रही। समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ सफल चुनावी गठबंधन करके उन्होंने यह उपलब्धियां हासिल कीं।

यूपीए-1 और यूपीए-2 की गठबंधन सरकार गैर बीजेपी पार्टियों को एक साथ लाने की सोनिया की काबिलियत के सबसे अच्छे उदाहरण हैं। हालांकि कांग्रेस को अकेले दम पर केंद्र की सत्ता में लाने का सोनिया का लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। कांग्रेस के महाधिवेशन के दौरान एक बार उन्होंने कहा था कि कांग्रेस केंद्र में अकेले दम पर सत्ता में आएगी।

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इटली में हुआ जन्म

सोनिया का जन्म 9 दिसंबर 1946 को इटली के लुसियाना, विसेंजा में हुआ था। इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान वह राजीव गांधी से मिलीं। साल 1965 में सोनिया गांधी अंग्रेज़ी, फ्रेंच व रूसी भाषा सिखने के लिए ब्रिटेन के कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहीं थीं। राजीव गांधी भी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते थे। उस समय राजीव गांधी टीएन कौल के बेटे दीप कौल के साथ अपार्टमेंट शेयर करते थे। टीएन कौल पूर्व राजनयिक थे।

वहीं सोनिया गांधी भी एक पेइंग गेस्ट में रहती थी। एक रोज सोनिया गांधी का इटालियन फूड खाने का मन किया। इसके बाद वह इटालियन फूड खाने के लिए रेस्त्रां की तलाश में निकल पड़ी। सोनिया गांधी रेस्त्रां की तालश करते करते ‘ग्रीक रेस्त्रां’ पहुंची। उस दौरान राजीव गांधी भी लंच के लिए ‘ग्रीक रेस्त्रां’ में पहुंचे हुए थे। राजीव गांधी के एक दोस्त ने सोनिया गांधी से उनका परिचय कराया। इसके बाद सोनिया और तत्कालीन प्रधानमंत्री के बेटे राजीव ने 1968 में शादी कर ली।

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साल 1997 में सोनिया गांधी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और उन्होंने 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला। 1999 में उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद चुनी गईं। इसके बाद वह लोकसभा में विपक्ष की नेता बनीं। बाद में राहुल को अमेठी से चुनाव लड़ाने के लिए उन्होंने अपने लिए रायबरेली सीट चुनी और वहां से 2004, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की।

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