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अंग्रेजों का 107 साल पुराना ये थाना: कभी होता था यहां जुल्म, आज देता है सुरक्षा

1 एकड़ से ज्यादा में फैले बलिया के नरही थाने का निर्माण थाने के गजेटियर के अनुसार सन् 1913 में ब्रिटिश हुक्मरानों ने कराया था। इसका मकसद था बिहार राज्य में कोई भी विद्रोह हो, तो इस थाने से सैन्य बल भेजकर कम समय में  दबाया जा सके।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 15 March 2020 10:05 AM GMT

अंग्रेजों का 107 साल पुराना ये थाना: कभी होता था यहां जुल्म, आज देता है सुरक्षा
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रजनीश कुमार मिश्र बाराचवर (गाजीपुर)

बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया से करीब 20 किलोमीटर व बिहार सीमा से 16 किलोमीटर नेशनल हाईवे 31 पर मौजूद बलिया का नरही थाना जो कभी अंग्रेजों का बेसकैंप था। कहा जाता हैं कि जब अंग्रेज फौज इस रास्ते होकर बिहार की तरफ जाती थी, तो इसी जगह रुक कर विश्राम करती थी। उस वक्त बलिया गाजीपुर का एक तहसील हुआ करता था। सन् 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुआ जिसमें बलिया के मंगल पान्डेय का मुख्य रूप से नाम सामने आने के बाद तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने गाजीपुर के बलिया तहसील को अलग जिला बनाने का निर्णय लिया। ताकि किसी भी विद्रोह को दबाया जा सके। 1857 के विद्रोह के 22 साल बाद 1 नवंबर सन् 1879 में बलिया को गाजीपुर से अलग कर जिला घोषित किया गया। वक्त बीतने के साथ-साथ ब्रितानी हुकूमत ने बलिया जिले में अपनी शासन चलाने के लिए थानों का निर्माण कराना शुरू कर दिया।

नरही थाने का ब्रितानी हुकूमत ने सन् 1913 में कराया निर्माण

1 एकड़ से ज्यादा में फैले बलिया के नरही थाने का निर्माण थाने के गजेटियर के अनुसार सन् 1913 में ब्रिटिश हुक्मरानों ने कराया था। इसका मकसद था बिहार राज्य में कोई भी विद्रोह हो, तो इस थाने से सैन्य बल भेजकर कम समय में दबाया जा सके। क्योंकि इस जगह से बिहार की सीमा मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर पड़ती है।

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स्थानीय बुजुर्ग ग्रामीण बताते हैं, कि उस वक्त यहां जंगल हुआ करता था। जब ब्रिटिश सैन्य बल बलिया जिला मुख्यालय से चलती थी ।तो जंगल के रास्ते बिहार सीमा में प्रवेश करती थी। उस वक्त रास्ते न होने की वजह से ब्रिटिश अफसर जंगल में भूल जाते थे जिससे परेशान होकर ब्रिटिश हुक्मरान सड़क और थाना बनाने का निर्णय लिया।

जंगल के बीचो-बीच कराया थाने व सड़क का निर्माण

थाने का निर्माण ब्रितानी हुकूमत ने जंगल के बीचो बीच कराया और उसी थाने से लगकर एक सड़क का निर्माण भी कराया ताकी बिहार सीमा में प्रवेश किया जा सके। आजादी के बाद जब सड़कों का नवनिर्माण होने लगा तो भारत सरकार ने ब्रितानी सड़क का कुछ बदलाव कर इसका निर्माण कराया। जिसे अब नेशनल हाईवे 31 के नाम से जाना जाता है। स्थानीय निवासी बताते हैं, कि ब्रिटिश काल में यहं सड़क थोड़ा घुमावदार था ।जब इसका नव निर्माण हुआ तो यहां की सरकार ने चौड़ा और सीधा किया।

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थाने में आज भी मौजूद है ब्रितानियो द्वारा बनाया गया अस्तबल

नरही थाने के कोतवाल ज्ञानेश्वर मिश्र बताते हैं कि जब अंग्रेजों ने थाने का निर्माण कराया तो थाने के पीछे अश्वो के लिए अस्तबल का भी निर्माण कराया था। नरही कोतवाल बताते हैं कि अंग्रेजों द्वारा बनाया गया अस्तबल आज भी मौजूद हैं लेकिन अब दीवारों में दरारें पड़ने लगी हैं। यहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस प्रशासन को चाहिए की इस पुराने भवन को इतिहास के तौर पर संरक्षित रखें।

अंग्रेजो ने बनवाये भवन में अब भी चल रहा थाना:

1913 में बना ये ब्रिटिश कालीन थाना उसी शानो शौकत से क्षेत्र की सुरक्षा कर रहां है, जैसा 107 साल पहले अंग्रेजों के शासन में करता था। उस समय यहां बैठे गोरे यहां कहर ढ़ाते थे और अब यहां से जनता को सुरक्षा दी जाती है। यहां के स्थानीय बुजुर्ग रामलाल कटाक्ष करते हुए कहते हैंकि जब अंग्रेज अफसरान थाने में बैठ कर हुक्म चलाते थे। उस समय लगता था कि चांद में दाग है, लेकिन अब अपने लोगों को देख लगता हैं इस थाने में चार चांद लग गया हो।

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इस थाने को देख आती है ब्रिटिश हुक्मरानों की याद

यहां के क्षेत्रीय लोग कहते हैं कि ब्रिटिश कालीन थाने को देखने के बाद वह दौर याद आ जाता हैं, जब यहां गोरे अफसरान बैठ कर कैसे लोगों के ऊपर जुल्म ढाते थे। जब भी कोई व्यक्ति इनके खिलाफ आवाज उठाता था बेरहम अंग्रेज इस थाने में लाकर कोड़ो की बरसात करते थे। ताकि कोई दूसरा विद्रोह ना करें।

हरियाली से सुसज्जित है नरही थाना

जंगलों को काटकर थाने का निर्माण ब्रितानियो ने कराया था। क्योंकि उस समय इस जगह सिर्फ घनघोर जंगल था करीब 107 साल बाद आज भी इस थाने के चारों तरफ बाग बगीचे दिखाई देते हैं। इस थाने के आगे से निकला हुआ नेशनल हाईवे थाने की शोभा बढ़ा रहा है। शांत वातावरण में बना नरही थाने पहुंचने पर स्वर्ग जैसा महसूस होता हैं।

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थाने का नहीं हुआ अब तक नवनिर्माण

1913 में अंग्रेजों ने थाना स्थापित कर भवन का निर्माण तो करा दिया लेकिन आजादी के बाद भी यहां के सत्ताधारियों ने इस थाने में किसी नए भवन का निर्माण नहीं कराया। हालंकि फिर भी इस थाने का ऐतिहासिक भवन आज भी उसी तरह खड़ा और चमक रहा हैं। थाना प्रभारी ज्ञानेश्वर मिश्र के मुताबिक़, इस थाने में जितने भी भवन हैं सभी पुराने भवन है। यहां के कोतवाल बताते हैं कि थाने की साफ-सफाई व रंगाई के लिए जब बजट पास होता है। तो रंगाई पुताई कराई जाती है। कोतवाल ने कहा कि बजट के बाद कोई कार्य कराया जाता है, तब जनसहयोग द्वारा होता है।

1 एकड़ 16 बिस्वा में बना है थाना

बलिया जिले का नरही का ब्रिटिश कालीन थाना जो बिहार सीमा से 16 किलोमीटर नेशनल हाईवे 31 पर मौजूद थाने का ब्रिटिश हुकूमत ने निर्माण कराया था। उस वक्त स्टेशन आफिसर के लिए भवन ,आरक्षी निवास अस्तबल व आफिस के साथ साथ कुछ अन्य भवनों का निर्माण कराया था, जो आज भी नरही पुलिस ने इसको जीवन्त रखा हैं। थाना प्रभारी ज्ञानेश्वर मिश्र बताते हैं, कि इस समय कुछ नए भवनों का निर्माण कराया गया है।

ऑफिस के साथ-साथ आरक्षियों के रहने के लिए बैरक भी

थाने के निर्माण के दौरान ऑफिस के साथ-साथ आरक्षियों के रहने के लिए बैरक भी बनवाया गया था। जो आज भी मौजूद हैं, जिसमें आरक्षी आज भी रहते हैं। 107 साल पहले बना थाने का भवन आज भी जीवंत है। जैसे 107 साल पहले था यह बात दीगर है कि उस समय यहां बैठ गोरे हुकूमत करते थे। लेकिन समय बदला देश आजाद हुआ और अब भारतीय बैठ यहां की सुरक्षा करने लगे।

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