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यूपी में महामारी का ये दर्दनाक इतिहास, यात्रा करना इन पर पड़ा भारी

भारतवर्ष पर दो शताब्दी पहले अंग्रेजी सरकार का हुकूमत था। जब अंग्रेजो ने भारत को गुलाम बनाया था । उस समय एक ब्रिटिश लेफ्टिनेंट ने भारत को मापने का काम किया था।

Vidushi Mishra

Vidushi MishraBy Vidushi Mishra

Published on 7 April 2020 8:24 AM GMT

यूपी में महामारी का ये दर्दनाक इतिहास, यात्रा करना इन पर पड़ा भारी
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बृजेन्द्र दुबे

मीरजापुर। भारतवर्ष पर दो शताब्दी पहले अंग्रेजी सरकार का हुकूमत था। जब अंग्रेजो ने भारत को गुलाम बनाया था । उस समय एक ब्रिटिश लेफ्टिनेंट ने भारत को मापने का काम किया था । जिसका चिन्ह आज भी एक पत्थर पर परिलक्षित है। जिले के कलेक्ट्रेक्ट परिसर में जमीन पर बिछे एक पत्थर पर अंग्रेजो ने मीरजापुर का अक्षांश मापते समय एक चिन्ह बनाया जो अपने आप मे एक रहस्य है। लेकिन उस पत्थर पर लिखे GTS DM ने अपने रहस्य से पर्दा उठाते हुए कुछ बताना चाहता है लेकिन यह एक अपने आपमे रहस्य और बस मात्र चिन्ह बनकर रह गया है।

जिसको लेकर तरह तरह के लोग कयास लगाते रहते है लेकिन सही जानकारी किसी के पास नही होने की वजह से इसे मौसम से सम्बंधित जोड़ देते है कि बारिस में जब यह जगह डूबेगी तो पूरा जिला डूब जाएगा और प्रलय आ जायेगा ।

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अक्षांश रेखा गुजरती है जिले के कलेक्ट्रेक्ट परिसर से

जिले के विंध्याचल में समय के मानक IST निर्धारित करने वाले कर्क रेखा बनाने का कार्य अंग्रेजी हुकूमत के शासन काल के दौरान किया गया था। जिसका प्रमाण आज भी जिले के कलेक्ट्रेक्ट परिसर में मौजूद है।

कलेक्ट्रेक्ट परिसर के अंग्रेजी दफ्तर के ठीक सामने बने एक बैठक हाल में GTS का लिखा एक निशान एक पत्थर पर लिखा है। फिलहाल यह जगह अधिवक्ताओं के कब्जे में है ।

आज इस पत्थर के ऊपर अधिवक्ताओं ने अपना चेम्बर बना रखा है । ब्रिटिश शासक रोसेंरोड ने ग्रेट टेगनोंमेंट्रीकल सर्वेक्षण के किताब में लिखा है कि जुलाई 1827 में तेज बारिश की वजह से मीरजापुर जलमग्न हो गया, जिसके वजह से सर्वे का काम रुक गया।

लेकिन उन्होंने जब अपने किये गए कार्य का सर्वेक्षण का अवलोकन किया तो 82.3 अक्षांस से होकर गुजरता दिखाई दिया वे लोग वही चिन्हित कर कार्य रोक दिए।

कलकत्ता के उत्तरी किनारे पर स्थित है GTS टॉवर

कलकत्ता के उत्तरी किनारे में चिड़ियामोड क्रॉसिंग के पास का टॉवर एक चौकोर आधार में बनाया गया है। जिसकी ऊंचाई थोड़ी ज्यादा और बहुत ऊपर है। इस पर चित्रित काले अंग्रेजी अक्षरों में लिखा है "G.T.S. टॉवर नाम लिखा है ।

यह टावर सीढ़ियों की ओर जाने वाला दरवाजा भी है हालांकि बंद है। यह सार्वजनिक निर्माण विभाग की संपत्ति है। टॉवर के चारों ओर की सुरक्षात्मक ग्रिल को सूखने के लिए डाले गए कपड़ों से सजाया गया है।

भारतीय गणितज्ञ राधानाथ सिकंदर ने नक्सा बनाने में किया

कलकत्ता का एक लड़का और गणितज्ञ सिकंदर, ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे जीटीएस में पहला भारतीय व्यक्ति था जिसने भारत का नक्शा बनाने की एक बड़ी पहल की थी।

एवरेस्ट को भारत के सर्वेक्षक जनरल के रूप में सफल बनाने वाले वॉ के चीफ कंप्यूटर सिकंदर से पूछा कि आज के पार्लियामेंट में डेटा एनालिस्ट एक पहाड़ की ऊंचाई को दूर से पढ़ने के लिए एक फॉर्मूला के साथ आया है।

जिस पर सिकंदर ने खुद को न्यूनतम वर्गों का सिद्धांत सिखाया और इसे पीक XV की गणनाओं पर लागू किया। जिससे त्रुटि कम हो गई। जब वॉ ने अपने प्रमुख एवरेस्ट के बाद पीक XV का नाम तय किया तो सिकंदर ने मंजूरी दे दी।

25 अगस्त, 1856 को सिकदर को लिखे एक पत्र में वॉ ने लिखा है मुझे खुशी है कि मैंने सबसे ऊंची बर्फीली चोटी को जो नाम दिया है। माउंट एवरेस्ट का नाम लिया गया।

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पहाड़ों में कोई दिलचस्पी नहीं थी - न तो चढ़ाई में और न ही उन्हें मापने में। यह एंड्रयू स्कॉट वॉ था, जिसे पहले संदेह था कि पीक XV पृथ्वी पर उच्चतम बिंदु था। और यह वह जगह है जहाँ पुनर्निधारण योग्य सिकंदर अंदर आया था।

भारत के समुद्री और सड़क मार्ग से अनभिज्ञ थे अंग्रेज

भारत देश के रास्तों से अनभिज्ञ थे अंग्रेज जिस तरह से ईस्ट इंडिया कंपनी ने लड़ाई लड़ी थी जिसमे टीपू सुल्तान के खिलाफ युद्ध जीता था और मैसूर पर विजय प्राप्त कीया था। अंग्रेजी शासन में एक सैनिक था लैंबटन, जो सोने की चिड़िया भारत के बारे में बखूबी से जान गया था और वह अपने आप मे एक सर्वश्रेष्ठ सैनिक था।

उसने आर्थर वेलेस्ले को सुझाव दिया यह नया अधिग्रहित किया देश है। इसका नक्शा बनाने का एक अच्छा अवसर हो सकता है। जिससे यह पता चलेगा कि यहां की मिट्टी, खनिज, फसलों के बारे में जानकारी किया जा सकता है।

भारत का नक्सा बनाने के लिए अंगेजो ने बनाया था पहला टावर

भारत का नक्सा बनाने के लिए अंगेजो ने बनाया था पहला टावर स्ट्रेट और लेवल बैरकपुर रोड के साथ एक स्ट्रेच को चुना गया था। जिसे अब हम बीटी सड़क और यह तब है जब इस खिंचाव के सिरों को चिह्नित करने के लिए इन दो 75 मीटर ऊंचे टॉवरों का निर्माण किया गया था। रीडिंग को एक थियोडोलाइट एक टेलीस्कोप जैसे उपकरण के साथ लिया गया था।

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सन 1820 की महामारी में यात्रा के दौरान छः अंग्रेजो की मीरजापुर में हुयी थी मौत

अंग्रेजी शासक रसानरोड ने GTS के किताब में लिखा है कि जुलाई 1827 में बारिश के वजह से काम रुक गया। जिसके बाद अंग्रेजी शासक अगले वर्ष का इंतजार करने लगे।

उन्होंने बताया कि साल काफी भयानक बिमारियों में गुज़रा, ओलिवर ने गया से बताया की साल काफी कठिन था दोनों ही असिस्टेंट तेज़ बुख़ार से पीड़ित थे। अन्य बचे स्टाफ उपयोग के लायक नहीं रहे। बीमारी इतनी भयानक था कि छः लोगो की मौत हो गयी।

कंचनजंघा और माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई की गणना अंग्रेजो ने की थी

ग्रेट टेगणोंमेंट्रीकल सर्वे के दौरान ही भारत के सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट और कंचनजंघा के उचाई की गणना अंग्रेजी हुकूमत के दौरान किया गया था।

अंग्रेजो जहाँ भी गणना के लिए गए जिस जगह पर ज्यादा समय गुजारा उस जगह पर कुछ न कुछ कही न कही GTS का निशान बना कर छोड़ गए। जिसका एक अद्भुत निशान मीरजापुर के कलेक्ट्रेट परिसर में अंग्रेजी दफ्तर के पास में ऐसा निशान देखने को मिल रहा है। जो लगभग दो शताब्दी वर्ष पहले का है।

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Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

Desk Editor

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