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लॉकडाउन: सूना पड़ा पंजाब, 1984 के बाद पहली बार हुआ ऐसा

कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते जनजीवन ठप सा हो गया है। हालत यह बन गए हैं कि सड़कें सूनी और बाजार विरान हो गए हैं। इससे पहले ऐसा माहोल 1984 में हुआ था

Aradhya Tripathi

Aradhya TripathiBy Aradhya Tripathi

Published on 27 March 2020 9:17 AM GMT

लॉकडाउन: सूना पड़ा पंजाब, 1984 के बाद पहली बार हुआ ऐसा
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कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते जनजीवन ठप सा हो गया है। हालत यह बन गए हैं कि सड़कें सूनी और बाजार विरान हो गए हैं। इस बीच लॉकडाउन का उल्‍लंघन करने वालों की भी कमी नहीं है। पिछले चार दिनों में कर्फ्यू का उल्‍लंधन करने के आरोप में 300 से अधिक लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं।

इससे पहले 1984 में लगा था कर्फ्यू

यहां के लोगों का कहना है कि यह दूसरी बार ऐसा मामला है जब पंजाब में कर्फ्यू लगाना पड़ा है। 80 साल की गुरमुख कौर कहती हैं कि पहली बार 1984 में कर्फ्यू लगा था। उसके बाद अब कर्फ्यू लगा है। कर्फ्यू की वजह से सब्‍जी और राशन आदि मिलने में परेशानी हो रही है। इसी तरह पवन कुमार, गुरप्रताप और बगीचा सिंह कहते हैं कि कोरोना से बचाने के लिए लगाया गया यह कर्फ्यू ठीक है, लेकिन लोगों परेशानी भी हो रही है। सारा काम काज ठप हो गया है।

गोल्डन टेंपल में पसरा सन्नाटा

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कर्फ्यू के कारण विश्‍वप्रसिद्ध स्‍वर्ण मंदिर, दुर्ग्‍याणा मंदिर और जलियावालाबाग में सन्‍नाटा पसरा हुआ है। कुछ यही हाल शहर के विभिन्‍न मंदिरों और गुरुद्वारों का है। आमतौर पर 24 घंटे गुलजार रहने वाले अमृतसर में विरानगी छाई हुई है। इस बीच कर्फ्यू के कारण पिछले चार दिनों से गोल्‍डन टेंपल में फंसे दिल्‍ली और हरियाणा के करीब 150 श्रद्धालुओं को मंदिर प्रशासन में तीन बसों में उन्‍हें दिल्‍ली और हरियाणा भिजवाया।

पर्यटन पर पड़ रहा असर

कर्फ्यू के कारण अमृतसर का करोबार तो प्रभावित हो ही रहा है। लेकिन इसका सबसे बुरा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है। टूरीज्म विभाग चंडीगढ़ से मिले आंकड़ों के मुताबिक अमृतसर में प्रतिदिन 50 हजार से अधिक पर्यटक विभिन्‍न संसाधनों से पहुंचते थे। कोरोना वायरस के कारण अटारी बार्डर से लेकर जलियावालाबाग तक एक अजीब सा सूनापन छाया हुआ है।

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इसके चलते हैरिटेज स्‍ट्रीट, पार्टिशन म्‍यूजियम, जलियांवालाबाग, किला गोबिंदगढ़, म्‍यूजियम रामबाग, वार मेमोरियल सहित अन्‍य स्‍थानों को बंद कर दिया गया है।

सड़कों बाजारों में सन्नाटा

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1947 और 1984 की बात छोड़ दी जाय तो यह पहला ऐसा मौका है जब, अमृतसर की बाजारों में आदमी तो क्‍या वहां की सड़कों पर पशु भी दिखाई नहीं दे रहे। पिछले करीब चार दिनों से यहां के प्रमुख बाजारों में शास्‍त्री मार्केट, हाल गेट, बाजार सुनियारा, बर्तनवाली बाजार, बाजार पापड़ां वाली, आटा मंडी, घी मंडी, नमकमंडी, जलेबी वाला चौक, लॉरेंस रोड, क्‍वींस रोड सहित शहर के सभी प्रमुख बाजार बंद हैं।

भूख से तड़प रहे जानवर

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पिछले चार दिनों में ही हालत यह हो गई है सड़कों पर घूमने वाले पशु गाय और कुत्‍ते भूख से बिलबिला रहे हैं। आम तौर पर लोग रोजाना कुत्‍तों को दूध पिलाते थे और गायों को चारा आदि डालते थे। लेकिन कर्फ्यू की वजह से कोई घर से बाहर नहीं निकल रहा है। ऐसे में भूख की वजह से रात को कुत्‍तों का रोना और गायों का रंभाना यहां के लोगों विचलित कर रहा है। हर जगह, हर नाकों पर पुलिस बल तैनात है।

मदद को आगे आए समाज सेवी

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गोल्‍डन टेंपल की गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी, राधास्‍वामी डेरा व्‍यास, दुर्ग्‍याणा मंदिर कमेटी, जामा मस्जिद, रेलवे स्‍टेशन सहित प्रीत ढाबा सहित शहर के विभिन्‍न कारोबारियों ने जरुरत मंद लोगों को सुबह-शाम खाने का पैकेट, साबुन, ब्रस और पेस्‍ट, बोतलबंद पानी, सैनिटाइजर, ग्‍लब्‍स और मास्‍क बितरित कर रहे हैं।

Aradhya Tripathi

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