IPS

गौरतलब है कि इसी साल 2 जुलाई को कानपुर में विकास दुबे और उसके गैंग ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, जिसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

बता दें कि हाथरस मामले में बीते शुक्रवार देर शाम एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर हाथरस के एसपी, डीएसपी समेत कुछ पुलिस अधिकारियों को निलंबित करते हुए पीड़िता के परिवार समेत इस मामलें में शामिल सभी का नारको पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने को कहा गया था।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद विजिलेंस ने दोनों IPS अधिकारियों समेत पांच आरोपितों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

योगी सरकार के मार्च 2017 से सस्ता में आने के बाद से अब तक यूपी के 14 आईपीएस अफसरों और 6 आईएएस अफसरों को सस्पेंड किया जा चुका है।

पिछले दिनों प्रदेश के पांच आईपीएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्ट्राचार के मामले की जांच में हुई देरी को लेकर एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौपी है।

वर्दी की बोली सिर्फ योगी सरकार में ही नहीं बल्कि अखिलेश या मायावती सरकार में भी लगती रही। पुलिस भ्रष्टाचार हर सरकार के कार्यकाल में देखने को मिलता रहा है। 

प्रशासनिक व्यवस्था को चाक चौबंद करने की दिशा में जुटी प्रदेश की योगी सरकार ने आधी रात को 13 पुलिस अधिकारियों के तबादले कर उन्हे नई जगहों पर तैनात कर दिया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के मामलों में और अधिक कड़ा रूख अपनाते हुये प्रयागराज के निलम्बित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित तथा महोबा के निलम्बित पुलिस अधीक्षक मणि लाल पाटीदार की सम्पत्तियों की जांच विजलेंस के माध्यम से कराये जाने के निर्देश दिये हैं।

यूपी में दूसरे राज्यों से आए प्रशासनिक अधिकारियों को इस प्रदेश में स्थायित्व नहीं मिल पा रहा है। इसे संयोग कहा जाए अथवा कुछ और, पर अधिकतर अधिकारी अपने पदों पर टिक नहीं पा रहे हैं।

सूबे की योगी सरकार ताबड़तोड़ अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में अपराध कम नहीं हो रहा है।