IPS

अरविन्द शर्मा प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने वाले कोई पहले अधिकारी नही हैं। इससे पहले कई रिटायर्ड आईएएस और आईपीएस अधिकारी अपनी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं।

आईपीएस सजंय कुमार को पुलिस अधीक्षक क्षेत्रीय अभिसूचना वाराणसी बनाया गया है, जबकि बृजेश कुमार सिंह का ललितपुर से ट्रांसफर कर गोरखपुर भेज दिया गया है। बृजेश कुमार को पुलिस अधीक्षक रेलवे गोरखपुर पर बनाया गया है।

राज्य सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव को देखते हुए बड़े अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। कार्मिक विभाग की ओर से देर रात एक साथ जारी की गई इन तीन तबादला सूचियों में अधिकांश तबादले मंत्रियों और विधायकों की इच्छा के आधार पर किए गए हैं।

गौरतलब है कि इसी साल 2 जुलाई को कानपुर में विकास दुबे और उसके गैंग ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, जिसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

बता दें कि हाथरस मामले में बीते शुक्रवार देर शाम एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर हाथरस के एसपी, डीएसपी समेत कुछ पुलिस अधिकारियों को निलंबित करते हुए पीड़िता के परिवार समेत इस मामलें में शामिल सभी का नारको पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने को कहा गया था।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद विजिलेंस ने दोनों IPS अधिकारियों समेत पांच आरोपितों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर ली है।

योगी सरकार के मार्च 2017 से सस्ता में आने के बाद से अब तक यूपी के 14 आईपीएस अफसरों और 6 आईएएस अफसरों को सस्पेंड किया जा चुका है।

पिछले दिनों प्रदेश के पांच आईपीएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्ट्राचार के मामले की जांच में हुई देरी को लेकर एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौपी है।

वर्दी की बोली सिर्फ योगी सरकार में ही नहीं बल्कि अखिलेश या मायावती सरकार में भी लगती रही। पुलिस भ्रष्टाचार हर सरकार के कार्यकाल में देखने को मिलता रहा है। 

प्रशासनिक व्यवस्था को चाक चौबंद करने की दिशा में जुटी प्रदेश की योगी सरकार ने आधी रात को 13 पुलिस अधिकारियों के तबादले कर उन्हे नई जगहों पर तैनात कर दिया।