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उन्हें देख कर प्यार से मुस्कुराना, अपने बच्चे के गाल पर किस करना आदि बच्चों के साथ की गई अभिभावकों की छोटी-छोटी ये क्रियाएं दर्शाती हैं कि ‘मुझे तुम्हारा खयाल है।’

जब परिवार के लोग घर लौटकर आए, तो ये दृश्य देख दंग रह गये। इस घटना की सूचना जैसे ही पुलिस को मिली। वहां पर उनकी टीम पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर तीनों लाशों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए बीते पांच से अधिक महीनों से स्कूल बंद थे। लेकिन अब सरकार के आदेश के बाद सोमवार से एक बार फिर से स्कूल खुलने जा रहे हैं।

भगवान शिव को भोला भंडारी भी कहते हैं। मान्यता है कि शिव जी को प्रसन्न करने के लिए  बहुत सारी चीजों की जरूरत नहीं होती, बल्कि सच्चे मन और भाव से दिया गया एक फूल भी भगवान आशुतोष को प्रसन्न कर सकता है।इस बार महाशिवरात्रि 21  फरवरी को मनाई जा रही है।

बच्चों के लिए अपने मम्मी पापा ही सब कुछ होते हैं। पापा हर बच्चे का हीरो उसके पापा होते हैं। अच्छा पिता बनना आसान नहीं है क्योंकि जब एक पिता बनते हैं तो पुरानी बहुत सी आदतों में बदलाव लाने होते हैं।एक अच्छा पिता बनना आसान नहीं है।

सर्दी का मौसम है।  और इस समय जो सर्दी है उसमें अगर खुद का और बच्चों का ध्यान नहीं रखा जाएं तो बीमारी दस्तक देना लाजिमी है।  इसलिए सर्द हवाओं वाली सर्दी में बच्चों का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। बच्चों प्यार से संभालने की जरूरत है

बारिश का मौसम है। जो लोग बारिश में घूमने का मजा लेना चाहते है। घूमने का मजा लेते हैं लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो बरसात मे घूमना चाहते तो है लेकिन अपने बच्चों की वजह से कहीं नहीं जा पाते हैं तो वो भी घूमने का मजा ले सकते है। जानते है कैसे लें बच्चों के साथ घूमने का असली मजा...

अधिकतर पैरेंट्स की दिल से इच्छा होती है कि उनका बच्चा हर क्षेत्र में टॉपर हो। इसके कुछ पैरेंट्स तो बच्चे के जन्म के साथ ही यथा शक्ति तैयारी शुरु कर देते है। बच्चो के बड़े होते ही तरह तरह की किताबे लाने लगते है ताकि उनका बच्चा कुछ सीखे व जानें। स्कूल जाने से पहले घर में ही पढ़ाई शुरु कर देते हैं।

बच्चों के कमरे के वास्तु का भी ध्यान रखना चाहिए। बच्चों के कमरे की सजावट उनके अनुकूल होना जरूरी है, तभी वे निरोगी रहेंगे। बच्चों के कमरे में रोशनी और प्राकृतिक उजाले का होना बहुत जरूरी है।

ये बचपन भी थोड़ा अजीब है कंधों पर किताबों का नहीं जीवन का बोझ है। ना कोई उल्लास है ना कोई रोमांच है, आंखों में नींद नहीं, पेट में अजब सी आग है हाथों में खिलौने हैं ना आंखों में खेलने  की ललक इन्हें तो अपने समान ही बच्चों को खिलाने का काम है। बाल …