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NASA को उम्मीद है कि इस बार पराली 200 मीट्रिक टन ज्यादा निकलेगा, जिसकी वजह से प्रदूषण और होगा। नासा का कहना है कि 2 किलोग्राम सल्फर डाईऑक्साइड (SO2), 3 किलोग्राम पर्टिकुलेट मैटर (PM), 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), 1,460 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड (CO2) और 199 किलोग्राम राख परानी जलाने से पैदा होती है।

लेकिन इन सबके बीच चन्द्रयान-2 की ताजा तस्वीरें निश्चित रूप से बहुत ही खुशी देने वाली हैं। लेकिन अब देखना होगा कि क्या लैंडर विक्रम को भी लेकर कोई ताजा जानकारी सामने आती है या नहीं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीय स्पेस स्टेशन में 15-20 दिन के लिए कुछ अंतरिक्ष यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होगी। अगर इसरो 5 से 7 साल में अपना स्पेस स्टेशन बना लेगा तो वह दुनिया का चौथा देश होगा, जिसका खुद का स्पेस स्टेशन होगा। इससे पहले रूस, अमेरिका और चीन अपना स्पेस स्टेशन बना चुके हैं।

दरअसल, नासा के लूनर रिकॉनिसंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्षयान ने 17 सितंबर को चंद्रमा के अनछुए दक्षिणी ध्रुव के पास से गुजरने के दौरान उस जगह की कई तस्वीरें अपने कैमरा मे कैद की है, जहां विक्रम ने सॉफ्ट लैंडिग के जरिए उतरने का प्रयास किया था लेकिन एलआरओसी की टीम लैंडर के

अभी हाल में ही खबर मिली थी कि नासा के जरिए लैंडर विक्रम से संपर्क साधन की कोशिश की जा रही है। लेकिन अब ये कोशिश शायद अंधेरे के साथ डूब जाएगी। दरअसल, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर काली अंधेरी रात होने वाली है, जिसके चलते लैंडर विक्रम से संपर्क करने के लिए की जा रही कोशिशें भी अंधेरे में जा सकती है।

साल 2018 में अमेरिका के मौसम उपग्रह (वैदर सैटेलाइट) को ढूंढ निकालने वाले खगोलविद स्कॉट टायली का कहना है कि विक्रम की तरफ से किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। बता दें, विक्रम को नासा के तीन डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना लगातार संदेश भेज रहे हैं।

साल 2018 में अमेरिका के मौसम उपग्रह (वैदर सैटेलाइट) को ढूंढ निकालने वाले खगोलविद स्कॉट टायली का कहना है कि विक्रम की तरफ से किसी तरह का कोई जवाब नहीं मिल रहा है। बता दें, विक्रम को नासा के तीन डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना लगातार संदेश भेज रहे हैं।

चांद के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में प्रारंभिक सौर प्रणाली के लुप्‍त जीवाश्म रिकॉर्ड मौजूद है। चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का उपयोग करेगा जो दो गड्ढों- मंज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदान में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर सफलतापूर्वक लैंडिंग का प्रयास करेगा।

अमेरिका में फुल मून अपने चरम पर 14 सितंबर 12:33 am पर पहुंचेगा। हालांकि भारत में फुल मून का नजारा नहीं दिखेगा। भारत में लोग इस खगोलीय घटना की लाइव स्ट्रमिंग देख सकते हैं।

चांद की सतह से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया था। इसके बाद से ही इसरो के वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। दूसरी तरफ अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने में इसरो की मदद कर रहा है।