nasa

बताया जा रहा है कि ब्लैक होल गैलेक्सी कल्टर Abell 2261 में होना चाहिए था, लेकिन ये वहां से गायब है। वैज्ञानिक लगातार इस ब्लैक होल को खोजने में लगे हुए हैं, लेकिन अब तक इसका कोई पता नहीं चल सका है। 

सबसे बड़े क्षुद्रग्रह (Asteroid) का नाम 2008 एएफ4 है। उसकी लंबाई करीब आधा किलोमीटर है। खबर यह भी आ रही है कि अगर ये क्षुद्रग्रह (Asteroid) पृथ्वी (Earth) से टकराए तो इसका असर परमाणु हमले जैसा होगा।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा(NASA) के अनुसार, 5 लाख से ज्यादा मलबे के टुकड़े हमारी धरती के इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं। मलबे के इन टुकड़ों में से कई तेज गति पर घूम रहे हैं जिनकी वजह से हमारी सैटलाइट्स या स्पेसक्राफ्ट तक को काफी नुकसान पहुंच सकता है।

उत्तर में तिब्बत का पठारी इलाका है कहा जाता हैं। इसके साथ ही इसे 'दुनिया की छत' या Roof of the World कहा जाता है। यह फोटो भारत की राजधानी दिल्ली और पाकिस्तान के लाहौर की सिटीलाइट्स खूबसूरती को और निखार रही हैं।

राजाचारी का जन्म मिल्वौकी में हुआ था, लेकिन उनका गृह प्रांत आयोवा को माना जाता है। उन्होंने एस्ट्रॉनाटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री हासिल की है।

नासा के चंद्रा एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट ने इन फोटोज को शेयर किया था। इन फोटोज में सुपरमैसिव ब्लैक होल के विलय की प्रक्रिया को दिखाया गया है।

अन्तरिक्ष के जिस चैम्बर में मूली को उगाया गया है, वहां लाल, नीली और हरी और व्हाइट एलईडी लाइट की रोशनी डाली गई थी जिससे पौधे की ग्रोथ अच्छी हो। अंतरिक्ष में उगाई गई मूली की तुलना फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर में उगाई गई मूली से की जाएगी।

2020 दुनिया को व्यापक स्तर पर तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा। कभी क्लाइमेंट चेंज तो कोरोना वायरस का संक्रमण इस तरह से कोई न कोई परेशानी लगभग अभी तक बनी हुई ही है। अब जब ये साल खत्म होने की कगार पर है तो कुछ समय पहले एक उल्कापिंड पृथ्वी की तरफ अपने कदम बढ़ा रहा है।

13 नवंबर को जब एक ऐस्टरॉयड धरती के बेहद करीब से गुजरा तो स्पेस एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी। यह धरती से केवल 300 मील से भी कम दूरी से गुजरा था।

स्पेस स्टेशन रवाना होने वाले चार अंतरिक्ष यात्रियों में अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री माइकल हॉपकिंस, विक्टर ग्लोवर और शैनन वॉकर और जापानी अंतरिक्ष यात्री सोइची नोगुची शामिल हैं।