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चीन का अड़ियल रुख: एलएसी पर तनाव बरकरार, फैसलों पर अमल नहीं कर रहा ड्रैगन

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के रवैये में बदलाव आता नहीं दिख रहा है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई सहमति के बावजूद...

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AshikiBy Ashiki

Published on 27 Jun 2020 3:48 AM GMT

चीन का अड़ियल रुख: एलएसी पर तनाव बरकरार, फैसलों पर अमल नहीं कर रहा ड्रैगन
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के रवैये में बदलाव आता नहीं दिख रहा है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई सहमति के बावजूद धरातल पर फैसले लागू होते नहीं दिख रहे हैं। सेना से जुड़े सूत्रों का कहना है चीन के अड़ियल रुख के कारण एलएसी पर अभी भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। भारतीय पक्ष चीनी सेना के पीछे हटने की प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है। चीन के रुख में बदलाव न आने से एलएसी पर डोकलाम से भी लंबा विवाद खिंचने के आसार दिखने लगे हैं।

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पीछे नहीं हट रही चीन की सेना

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच 15 जून की रात हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प के दौरान भारतीय सेना के कमांडिंग ऑफिसर सहित 20 सैन्यकर्मी शहीद हुए थे। इस घटना में चीन के सैनिक भी हताहत हुए थे। इस घटना के बाद दोनों पक्षों के सैन्य कमांडरों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। 22 जून को दोनों पक्षों के बीच में इस बात पर सहमति बनी थी कि दोनों सेनाएं 6 जून को बनी सहमति के अनुरूप पीछे हटेंगी। बाद में दोनों पक्षों की सेनाओं के हटने का मैकेनिज्म भी तय हुआ था, लेकिन अभी तक चीन की ओर से इस फैसले पर क्रियान्वयन नहीं शुरू किया गया है। चीनी सेनाओं के अड़ियल रवैये के कारण एलएसी पर 22 जून से पहले वाली स्थिति अभी भी बनी हुई है।

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सेनाओं के जमावड़े से माहौल तनावपूर्ण

एलएसी पर भारत और चीन दोनों पक्षों की सेनाओं के जमावड़े से अभी भी माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना हुआ है। चीन की ओर से जवानों की संख्या बढ़ाए जाने के बाद भारत ने भी अग्रिम मोर्चे पर काफी संख्या में सैनिक तैनात कर रखे हैं। दोनों पक्षों की वायुसेना भी हाई अलर्ट पर है। इस कारण तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। हालांकि भारत की ओर से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि तनाव बढ़ाने के लिए चीन ही जिम्मेदार है और भारत ने चीनी सेना के जमावड़े का जवाब देने के लिए ही अपने सैनिकों की तैनाती की है।

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चीन ने नहीं उठाया कोई कदम

सैन्य सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों में बनी सहमति के अनुसार दोनों पक्षों को पहले अपने सैनिकों की संख्या कम करनी है। इसके साथ ही नए बनाए गए स्थायी और अस्थायी ढांचों को भी खाली करना है। हालांकि अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं और इस प्रक्रिया में लंबा वक्त भी लग सकता है।

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डोकलाम से लंबा खिंच सकता है विवाद

जानकारों का कहना है कि चीन के रवैये से साफ है कि दोनों सेनाओं के बीच एलएसी पर तनाव डोकलाम से भी लंबा खिंच सकता है। डोकलाम में करीब 72 दिनों तक चीनी सेना मोर्चे पर डटी हुई थी और जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत की ओर से भी सैन्य कर्मियों की तैनाती की गई थी। दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत का अभी तक सिर्फ इतना ही फायदा मिल सका है कि 15 जून की घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से कोई नई गतिविधि नहीं की गई है। हालांकि चीनी पक्षी अभी भी पुराने अड़ियल रुख को अख्तियार किए हुए है।

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कूटनीतिक स्तर पर भी कामयाबी नहीं

इस विवाद को हल करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है क्योंकि चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से लगातार विवाद बढ़ाने के लिए भारत पर ही तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। भारत की ओर से यह स्पष्ट किया जा चुका है कि भारत अपनी संप्रभुता को लेकर किसी दबाव में नहीं आने वाला है।

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