MBBS कोर्स में बड़ा बदलाव, छात्रों को पढ़ाई से पहले लेनी होगी 'महर्षि चरक शपथ', जानें और क्या बदला
New MBBS Curriculum : मेडिकल छात्रों को अब पढ़ाई के पहले साल से ही कम्युनिटी हेल्थ ट्रेनिंग करनी होगी। साथ ही, उन्हें कोई गांव गोद भी लेना होगा।
New MBBS Curriculum : भारत में डॉक्टरी शिक्षा के अंतर्गत सिलेबस में कुछ बदलाव करते हुए नई गाइडलाइन (Guideline) जारी की गई है। अब, एमबीबीएस (MBBS) के छात्रों को पढ़ाई शुरू करने से पहले लिए जाने वाले शपथ में भी बदलाव किया गया है। मेडिकल स्टूडेंट्स को अब सदियों पुरानी 'हिप्पोक्रेटिक शपथ' (Hippocratic oath) के स्थान पर 'महर्षि चरक शपथ' (Maharshi Charak Shapath) लेनी होगी।
दरअसल, मेडिकल एजुकेशन की रेगुलेटरी बॉडी यानी नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने 'महर्षि चरक शपथ' को सिलेबस का हिस्सा बनाया है। इसके अलावा, मेडिकल छात्रों को अब पढ़ाई के पहले साल से ही कम्युनिटी हेल्थ ट्रेनिंग (Community Health Training) करनी होगी। इतना ही नहीं, उन्हें कोई गांव गोद भी लेना होगा। साथ ही, 10 दिनों का योग कोर्स (yoga course) भी करना होगा। इन सब के साथ कुछ कोर्स में फेरबदल भी किया गया है।
चरक शपथ से सरकार ने संसद में किया था इनकार
अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' के रिपोर्ट की मानें तो, महर्षि चरक शपथ को मेडिकल शिक्षा के सिलेबस में जोड़कर स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य बनाए जाने की जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब हाल ही में केंद्र सरकार की तरफ से संसद में इसे लेकर स्पष्टीकरण दिया गया था। अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है, कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था, कि 'राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (NMC) की तरफ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिप्पोक्रेटिक शपथ को चरक शपथ से बदलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।'
शपथ 'चरक-संहिता' से ली गई
जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मेडिकल स्टूडेंट्स को दिलाई जाने वाली ये नई शपथ महर्षि चरक द्वारा लिखी गई पुस्तक 'चरक-संहिता' से ली गई है। महर्षि चरक को दुनिया में सबसे प्राचीन कही जाने वाली आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का विशेषज्ञ माना जाता रहा है।
10 दिन का योगा कोर्स भी करना होगा
मेडिकल छात्रों के लिए नई गाइडलाइन के तहत 10 दिनों के योग फाउंडेशन कोर्स (Yoga Foundation Course) का भी सुझाव दिया गया है। यह कोर्स हर साल 12 जून से शुरू किया जाएगा और 21 जून को योग दिवस पर समाप्त होगा। इसे सभी मेडिकल कॉलेजों में अनिवार्य तौर पर कराया जाएगा। कॉलेजों को आजादी होगी कि वो तय कर सकेंगे कि इसे किस तरह कराया जाए।
लेना होगा गांवों को गोद
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिवाइज्ड करिकुलम (Revised Curriculum) में अब मेडिकल छात्रों को प्रारंभ हुए कोर्स के पहले साल से ही कम्युनिटी हेल्थ ट्रेनिंग में हिस्सा लेना होगा। जिसके तहत स्टूडेंट कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में विजिट करेंगे और ऐसे गांवों को गोद लेंगे जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं हैं। बता दें, कि डॉक्टरों का कहना है कि मौजूदा करिकुलम में कम्युनिटी मेडिसिन की पढ़ाई तीसरे साल में आती है।