LAC से बड़ी खबर: सेना को मिले सारे अधिकार, चीन की टेंशन टाइट

लद्दाख की गलवान घाटी में बीते दिनों भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प के बाद रूल्स ऑफ इंगेजमेंट (आरओई) में कुछ बेहद जरूरी बदलाव किए गए हैं।

Update: 2020-06-21 07:42 GMT

नई दिल्ली : लद्दाख की गलवान घाटी में बीते दिनों भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प के बाद रूल्स ऑफ इंगेजमेंट (आरओई) में कुछ बेहद जरूरी बदलाव किए गए हैं। गलवान घाटी में हुई इस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात कमांडर्स को फ्री हैंड यानी कि पूरी छूट दी गई है जिससे वे सामरिक स्तर पर स्थिति को संभाल सकें।

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युद्ध के नियम (आरओई) में संशोधन

सेना के एक अधिकारी ने कहा, 'कमांडर अब हथियार के उपयोग को लेकर प्रतिबंध से बाध्य नहीं होंगे और असाधारण स्थितियों से निपटने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग करते हुए उनके पास उसका जवाब देने का पूर्ण अधिकार होगा।'

जानकारी के लिए बता दें कि 45 साल बाद गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प के बाद युद्ध के नियम (आरओई) में संशोधन किया गया है।

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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि सेना को सीमा पर आवश्यक कदम उठाने की स्वतंत्रता दी गई है और भारत ने कूटनीतिक माध्यम से अपनी स्थिति (चीन को) बता दी थी।

क्रूर रणनीति का जवाब देने के लिए

इस पर दूसरे अधिकारी ने कहा, ‘ युद्ध के नियम (आरओई) में बदलाव के बाद कुछ भी ऐसा नहीं है जो भारतीय कमांडरों की क्षमता को सीमित करे। अब वे एलएसी पर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं। चीनी सैनिकों द्वारा अपनाई जाने वाली क्रूर रणनीति का जवाब देने के लिए आरओई में संशोधन किया गया है।’

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आगे उन्होंने कहा, ‘15 जून से पहले 5-6 मई को पेंगोंग त्सो और गलवां घाटी (मई मध्य) में हुई हिंसक झड़प हुई थी। सभी मौकों पर वे भारी संख्या में आए और हमारे सैनिकों पर लोहे की रॉड में कील और बेंत में लगे नुकीले तारों से हमला किया। हमारे सैनिकों ने निडर होकर लड़ाई लड़ी लेकिन आरओई पर गौर करना जरूरी था।’

सैनिकों को हथियार ले जाने की अनुमति

इसी सिलसिले में उत्तरी सेना के पूर्व सेनानिवृत्त कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल ने कहा, ‘चूंकि एलएसी पर गश्त के दौरान सैनिकों को हथियार ले जाने की अनुमति है। यह अंतर्निहित है कि वे गलवां घाटी में हुए हमले जैसी अभूतपूर्व स्थिति में हथियारों का उपयोग कर सकते हैं।’

आपको बता दें कि पेट्रोलिंग के दौरान फॉरवर्ड सैनिक पीठ पर टंगी अपनी बंदूक की नली को जमीन की ओर और गोलियों को जेब में रखते हैं। क्योंकि लद्दाख सीमा ने हथियार का इस्तेमाल करना बनाए गए नियमों के विरूध्द था।

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