UP News: यूपी का होगा बंटवारा! दक्षिण के राज्यों ने बढ़ाया दबाव
UP News: 2026 में होने वाले देशव्यापी परिसीमन से पहले तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के एक बयान ने फिर से उत्तर-दक्षिण की जंग क्षेण दी है। इसके केंद्र में देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश घेरे में आ गया है।;
UP Vidhansabha (Photo: Social Media)
UP News: 2026 में होने वाले देशव्यापी परिसीमन से पहले तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के एक बयान ने फिर से उत्तर-दक्षिण की जंग क्षेण दी है। इसके केंद्र में देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश घेरे में आ गया है। 2025 में प्रस्तावित जनगणना के बाद उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ से ज्यादा होने की संभावना है जिससे 80 लोकसभा सीटों वाले प्रदेश की स्थिति बड़े स्तर पर बदल सकती है। माना जा रहा अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश की लोकसभा में 40 सीटें तक बढ़ सकती हैं। जिसके बाद केंद्र में उत्तर प्रदेश का दबदबा हो सकता है, जानकारों का मानना है कि अन्य राज्य इसे बिलकुल भी स्वीकार नहीं करेंगे। एमके स्टालिन के हालिया बयान से ये जाहिर भी होने लगा है। ऐसे में ये राज्य यूपी के बंटवारे की मांग जोर-शोर से उठा सकते हैं।
परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा में करीब 100 तो वहीँ लोकसभा के करीब 40 सीटें बढ़ने सकती है। यानि इसके बाद उत्तर प्रदेश 503 विधानसभा और 120 लोकसभा वाला सबसे बड़ा राज्य होगा और उतना ही सबसे बड़ा तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का कद होगा। इस परिस्थिति में राज्यसभा के सदस्यों की संख्या भी बढ़ जाएगी यानि उत्तर प्रदेश केंद्र की सरकार पर दवाब बनाने में सफल हो सकता है। ऐसे में उस दौरान उत्तर प्रदेश का जो मुख्यमंत्री होगा वो प्रधानमंत्री से कमजोर नहीं होगा।
क्या है परिसीमन
परिसीमन लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया है ताकि जनसंख्या के आधार पर उचित प्रतिनिधित्व दिया किया जा सके। परिसीमन हर जनगणना के बाद किया जाता है।
क्या है कानूनी आधार
• परिसीमन आयोग केंद्र सरकार द्वारा गठित एक स्वतंत्र निकाय होता है।
• अनुच्छेद 82 के तहत हर जनगणना के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है।
• राज्य विधानसभाओं का परिसीमन अनुच्छेद 170 के तहत होता है।
• इसका उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों में समान जनसंख्या और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
कब-कब हुआ परिसीमन?
1. 1952 – पहली बार परिसीमन हुआ, लोकसभा सीटें 494 हुईं।
2. 1963 – लोकसभा सीटें बढ़कर 522 हुईं।
3. 1973 – तीसरा परिसीमन हुआ, लोकसभा सीटों की संख्या 542 हुई।
4. 2002 – चौथा परिसीमन, लेकिन 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया।
बता दें, अगला परिसीमन 2026 में होना है। लेकिन उससे पहले सरकार को जनगणना करानी होगी। 2021 में होने वाली जनगणना को सरकार ने कोरोना की वजह से टाल दिया था।