Sonbhadra News: एनटीपीसी ने लोको पायलट को बताया मेडिकली अनफिट, मेडिकल कालेज और बीएचयू की रिपोर्ट में सब ठीक, जांच के निर्देश

Sonbhadra News: वह एनटीपीसी में सहायक लोको पायलट के रूप में कार्यरत था। कार्य के दौरान एनटीपीसी रिहंद के बीजपुर स्थित हॉस्पिटल की तरफ से 25 जनवरी 2024 को की गई जांच में पूरी तरह से फिट बताया।;

Update:2025-04-03 19:25 IST

एनटीपीसी ने लोको पायलट को बताया मेडिकली अनफिट, मेडिकल कालेज और बीएचयू की रिपोर्ट में सब ठीक (Photo- Social Media)

Sonbhadra News: सोनभद्र में एनटीपीसी रिहंद में कार्यरत लोको पायलट को मेडिकली अनफिट बताकर निकाले जाने का मामला केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तक जा पहुंचा है। बीजपुर स्थित एनटीपीसी रिहंद प्रबंधन की तरफ से संबंधित लोको पायलट को मेडिकली अनफिट बताने और बीएचयू तथा जिले के मेडिकल कॉलेज की तरफ से शारीरिक-मानसिक दोनों रूप से फिट बताए जाने के मामले को देखते हुए, उप श्रमायु क्त कानपुर को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय के निर्देश पर जारी पत्र में केंद्रीय मुख्य श्रमायुक्त की तरफ से कहा गया है कि प्रकरण में जांच कर अविलंब जरूरी कार्रवाई की जाए। साथ ही, की गई कार्रवाई की रिपोर्ट श्रमायुक्त को भेजने के साथ ही, पीड़ित को भी, अमल में लाई गई कार्रवाई से अवगत कराने के लिए कहा गया है।

एनटीपीसी बीजपुर में सहायक लोको पायलट के पद पर कार्यरत रहे दीपक कुमार का आरोप है कि उसके खिला फमेंटल डिसऑर्डर के झूठे आरोप लगाकर नौकरी से हटाने की कार्रवाई की गई है। प्रकरण को लेकर पीड़ित की तरफ से एक प़त्र भी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को भेजा गया है। आरोप लगाया गया है कि वह एनटीपीसी में सहायक लोको पायलट के रूप में कार्यरत था। कार्य के दौरान एनटीपीसी रिहंद के बीजपुर स्थित हॉस्पिटल की तरफ से 25 जनवरी 2024 को की गई जांच में पूरी तरह से फिट बताया।

लगभग 11 महीने तक काम करने के बाद अचानक से 23 नवंबर 2024 को एनटीपीसी प्रबंधन की तरफ से सीजर मेंटल डिसऑर्डर की मानसिक बीमारी बताते हुए मेडिकली अनफिट करार दिया गया और इसके आधार पर नौकरी से निकाल दिया गया।

उठा सवाल: बीएचयू और मेडिकल कालेज ने बताया फिट

एक तरफ एनटीपीसी प्रबंधन की तरफ से मानसिक बीमारी का दावा करते हुए सहायक लोको पायलट को नौकरी से निकाल दिया गया। वहीं, दूसरी तरफ, बीएचयू और जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में उसे मानसिक और शारीरिक रूप से फिट पाया गया। इसको देखते हुए, एनटीपीसी प्रबंधन की कार्रवाई पर जहां सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, शिकायतकर्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों को दृष्टिगत रखते हुए, श्रम मंत्रालय की तरफ से प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।


ओवरटाइम का किया विरोध तो रच दिए गए मनगढ़ंत आरोप

पीड़ित का आरोप है कि वह ओवरटाइम का विरोध कर रहा था। इसके लिए उसे लगातार टारगेट किया जा रहा था। उसने श्रमिक अधिकारों की बात की तो उसे गलत तरीके से मानसिक बीमार बताकर नौकरी से निकाल दिया गया। दावा किया गया है कि उसे इस मामले में सुनवाई या पक्ष-तथ्य रखने का भी मौका नहीं दिया गया। प्रकरण को लेकर पीड़ित की तरफ से केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय, केंद्रीय श्रम मंत्रालय, केंद्रीय श्रमायुक्त सहित अन्य को शिकायत भेजी गई थी। मांग की गई थी कि एनटीपीसी प्रबंधन झूठे आरोपों को वापस ले और उसे पुनः कार्य पर नियोजित करें। साथ ही गलत तरीके से की गई छंटनी अवधि का मय ब्याज वेतन भुगतान कराए जाने की भी मांग उठाई गई है।

श्रम मंत्रालय ने लिया एक्शन, जारी किए गए कड़े निर्देश

क्षेत्रीय श्रमायुक्त केंद्रीय ओपी सिंह की तरफ से उप मुख्य श्रमायुक्त केंद्रीय कानपुर को गत 27 मार्च को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मंत्रालय को मेडिकली अनफिट बताकर अवैधानिक ढंग से निकाले जाने की शिकायत प्राप्त हुई है। उसके क्रम में अनुरोध है कि पत्र में वर्णित तथ्यों की छानबीन कर उचित कार्रवाई करें और की गई कार्रवाई से आवेदक के साथ, उनके कार्यालय को अवगत कराएं। जारी किए गए पत्र और दिए गए निर्देश की जानकारी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अवर सचिव दिलीप कुमार को भी भेजी गई है। इस मामले में एनटीपीसी रिहंद का पक्ष जानने के लिए, एनटीपीसी रिहंद के जनसंपर्क अधिकारी/एचआर रोशन कुमार से फोन पर संपर्क किया गया लेकिन वह उपलब्ध नहीं हुए।

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