Top

बिहार की शख्सियतें: दुनिया ने जाना जिनका काम, हर क्षेत्र में बनाया अपना मुकाम

चाहे वो कोई भी क्षेत्र हो, बिहार की प्रतिभा वहां तक पहुंची जरूर है। फिर चाहे वो राजनीति हो, फिल्म इन्डस्ट्री हो या फिर पढ़ाई का क्षेत्र हो। यहां हम आपको कुछ ऐसी ही शख्सियतों के बारे में बताएंगे जो बिहार की पावन मिट्टी से पैदा हुई है।

Newstrack

NewstrackBy Newstrack

Published on 16 July 2020 9:12 AM GMT

बिहार की शख्सियतें: दुनिया ने जाना जिनका काम, हर क्षेत्र में बनाया अपना मुकाम
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

पटना: भारत की आजादी के बाद देश का पहला राष्ट्रपति बिहार ने ही दिया, बिहार की धरती ने समय-समय पर ऐसे-ऐसे सपूतों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने पूर्वजों का ही नहीं बल्कि अपने गांव से लेकर जिला, जिला से लेकर राज्य, राज्य से लेकर देश और देश से लेकर पूरे विश्व में अपने भारत देश के नाम रौशन किया है। भारत देश अभी विकासशील देशों की श्रेणी में आता है। लेकिन यहां के लोगों ने मौजूद संसाधनों का अच्छा इस्तेमाल कर अपना और अपने देश का नाम ऊंचा किया है। चाहे वो कोई भी क्षेत्र हो, बिहार की प्रतिभा वहां तक पहुंची जरूर है। फिर चाहे वो राजनीति हो, फिल्म इन्डस्ट्री हो या फिर पढ़ाई का क्षेत्र हो। यहां हम आपको कुछ ऐसी ही शख्सियतों के बारे में बताएंगे जो बिहार की पावन मिट्टी से पैदा हुई है।

राजेन्द्र प्रसाद

राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था जिसकी परिणति 26 जनवरी 1950 को भारत के एक गणतंत्र के रूप में हुई थी। राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने स्वाधीन भारत में केन्द्रीय मन्त्री के रूप में भी कुछ समय के लिए काम किया था। पूरे देश में अत्यन्त लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेन्द्र बाबू या देशरत्न कहकर पुकारा जाता था। बिहार के जीरादेई में इनका जन्म हुआ था।

दशरथ मांझी

दशरथ मांझी जिन्हें “माउंटेन मैन” के रूप में भी जाना जाता है, बिहार में गया के करीब गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे। केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर इन्होंने अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना दिये।

ये भी देखें: हत्या का खुलासा: अधिशासी अधिकारी की मौत का मामला, वाहन चालक गिरफ्तार

यशवंत सिन्हा

बिहार में जन्मे यशवंत सिन्हा एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता रह चुके हैं, जो इस समय सत्ताधारी पार्टी है। वे भारत के पूर्व वित्त मंत्री रहने के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री भी रह चुके है।

सत्यम कुमार

बिहार के 12 साल के सत्यम ने आईआईटी जेईई पास कर एक रिकॉर्ड बनाया है। भोजपुर बखोरापुर के रहने वाले सत्यम कुमार है ।

मीरा कुमार

श्रीमति मीरा कुमार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से हैं। वे पंद्रहवीं लोकसभा में बिहार के सासाराम लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष (स्पीकर) के रूप में 3 जून 2009 को निर्विरोध चुनी गयी। इन्होंने 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में यू पी ए की उम्मीदवार के रूप में रामनाथ कोविन्द के विरुद्ध चुनाव लड़ा ।

नीतू चंद्रा

बिहार की बेटी नीतू चंद्रा नीतू हिन्दी फ़िल्मों की अभिनेत्री हैं। बिहार से निकलकर अपने संघर्षो के बल पर बॉलीवुड में कदम जमाने वाली इस बेटी पर पूरे बिहार को गर्व है।

ये भी देखें: पाकिस्तान हुआ मलामाल: खोज निकाला तेल और गैस का बड़ा भंडार, मिली कामयाबी

सुशील कुमार

KBC के सबसे चर्चित प्रतिभागियों में सुशील कुमार का नाम लिया जाता है। वो बिहार के हैं और उन्होंने सोनी टीवी पर प्रसारित गेम शो के पांचवे सीजन में पांच करोड़ रुपये जीते थे। हालांकि यह इतना आसान नहीं था।उन्होंने बेइंतहा तनाव से गुजरते हुए पांच करोड़ के सवाल का दबाव महसूस किया था।

सुशांत सिंह राजपूत

सुशांत सिंह राजपूत भारतीय टीवी और प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता थे । सर्वप्रथम उन्होनें किस देश में है मेरा दिल नामक धारावाहिक में काम किया पर उनको पहचान एकता कपूर के धारावाहिक पवित्र रिश्ता से मिली। इसके बाद उन्हें फ़िल्मो के प्रस्ताव मिलना शुरु हुए। फ़िल्म काय पो छे! में वो मुख्य अभिनेता थे और उनके अभिनय की तारीफ़ भी हुई।

इसके बाद वो शुद्ध देसी रोमांस में वाणी कपूर और परिणीति चोपड़ा के साथ दिखे। फ़िल्म सफल रही और सुशांत का फ़िल्मी करियर परवान चड़ गया। केदारनाथ और MS Dhoni की बायोपिक, से सुशांत ने बॉलीवुड में अपना झंडा गाड़ा।सुशांत का जन्म बिहार के पूर्णिया जिले के महीदा में हुआ था।

जय प्रकाश नारायण

जयप्रकाश नारायण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। उन्हें 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। इन्दिरा गांधी को पदच्युत करने के लिये उन्होने ‘सम्पूर्ण क्रांति’ नामक आन्दोलन चलाया। वे समाज-सेवक थे, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से भी जाना जाता है।

1998 में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मनित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिए १९६५ में मैगससे पुरस्कार प्रदान किया गया था। पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल’ भी उनके नाम पर है।

सोनाक्षी सिन्हा

सोनाक्षी सिन्हा भारतीय अभिनेत्री हैं। वो अभिनेता शत्रुघन सिन्हा और अभिनेत्री पूनम सिन्हा की पुत्री हैं। उन्होंने फ़िल्म दबंग से फ़िल्मों में पदार्पण किया जिसमें उन्हें सर्वश्रेष्ठ पदार्पण अभिनेत्री का फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिला।

ये भी देखें: हिंदी का दर्द चीन्हें ! आज कितने हिंदी प्रेमी आईसीयू (गहन चिकित्सा केंद्र) में भर्ती हुए हैं?

प्रकाश झा

प्रकाश झा चंपारण बिहार में जन्मे भारत एक हिन्दी फ़िल्मकार है।फ़िल्में बन्दिश, मृत्युदंड, राजनीति, अपहरण, दामूल, गंगाजल, टर्निंग 30 आदि (सभी हिन्दी) एक भारतीय हिंदी फिल्म के निर्माता निर्देशक, चलचित्र के कथा लिखनेवाला, प्रकाश झा ऐसे फिल्मकार हैं, जो फिल्मों के माध्यम से सामाजिक-राजनीतिक बदलाव की उम्मीदें लेकर हर बार बॉक्स ऑफिस पर हाजिर होते हैं। उनके साहस और प्रयासों की इस मायने में प्रशंसा की जाना चाहिए कि सिनेमा की ताकत का वे सही इस्तेमाल करते हैं अपनी ‍पहली फिल्म ‘दामुल’ के जरिये गाँव की पंचायत, जमींदारी, स्वर्ण तथा दलित संघर्ष की नब्ज को उन्होंने छुआ है। इसके बाद सामाजिक सरोकार की फिल्में बनाईं।

बाद में मृत्युदण्ड, गंगाजल, अपहरण और अब राजनीति (2010 फ़िल्म) लेकर मैदान में उतरे हैं। अपने बलबूते पर उन्होंने आम चुनाव में उम्मीदवार बनकर हिस्सा लिया है। ये बात और है कि वे हर बार हार गए। भ्रष्ट व्यवस्था तथा राजनीति की सड़ांध का वे अपने स्तर पर विरोध करते हैं। यही विरोध उनकी फिल्मों में जीता-जागता सामने आता है। मृत्युदंड से लेकर अपहरण तक उनकी फिल्मों को दर्शकों ने दिलचस्पी के साथ देखा और सराहा है।

संजय मिश्रा

संजय मिश्रा का जन्म बिहार राज्य में हुआ ,एक भारतीय फ़िल्म के हास्य अभिनेता है। इन्होंने अधिकतर हिन्दी फ़िल्मों तथा टेलीविज़न धारावाहिकों में अभिनय किया है। २०१५ में इन्हें आँखों देखी के लिए फ़िल्मफ़ेयर क्रिटिक अवॉर्ड फ़ॉर बेस्ट एक्टर से नवाजा गया।

भिखारी ठाकुर

भिखारी ठाकुर भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, रंगकर्मी लोक जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक थे। वे बहु आयामी प्रतिभा के व्यक्ति थे। वे भोजपुरी गीतों एवं नाटकों की रचना एवं अपने सामाजिक कार्यों के लिये प्रसिद्ध हैं। वे एक महान लोक कलाकार थे जिन्हें ‘भोजपुरी का शेक्शपीयर’ कहा जाता है।

आरके सिन्हा

रविन्द्र किशोर सिन्हा, जिन्हें आर० के० सिन्हा भी कहा जाता है, एक भारतीय पत्रकार, राजनेता, सामाजिक उद्यमी और सुरक्षा पेशेवर हैं । SIS सुरक्षा कंपनी के स्तंभकार है।श्री सिन्हा भारतीय संसद में राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। 250 रुपया से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले आरके सिन्हा अपने संघर्ष के बल पर बिहार के जाने माने अरबपतियों में शुमार है। लाखो युवा इन्हें अपना रॉल मॉडल मानते है।

रामविलास पासवान

रामविलास पासवान भारतीय दलित राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक हैं।वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी हैं।

ये भी देखें: भरभराकर गिरा पुल: 264 करोड़ में हुआ था निर्माण, 29 दिन भी न टिका

कर्पूरी ठाकुर

जननायक कर्पुरी ठाकुर भारत के स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा बिहार राज्य के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। लोकप्रियता के कारण उन्हें जन-नायक कहा जाता था। कर्पूरी ठाकुर का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान समस्तीपुर के एक गाँव पितौंझिया, जिसे अब कर्पूरीग्राम कहा जाता है, में हुआ था। जननायक जी के पिताजी का नाम श्री गोकुल ठाकुर तथा माता जी का नाम श्रीमती रामदुलारी देवी था।

इनके पिता गांव के सीमांत किसान थे तथा अपने पारंपरिक पेशा नाई का काम करते थे।भारत छोड़ो आन्दोलन के समय उन्होंने २६ महीने जेल में बिताए थे। वह 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971 तथा 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979 के दौरान दो बार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे।

शेखर सुमन

शेखर सुमन एक हिन्दी फिल्म अभिनेता एवं दूरदर्शन कलाकार हैं। कॉमेडी और मिमक्री के लिए भी काफी फेमस है। बॉलीवुड में बिहार के लाल ने अपने संघर्ष के दम पर बनाया जगह।

शारदा सिन्हा

शारदा सिन्हा बिहार की एक लोकप्रिय गायिका हैं,इन्होंने मैथिली, बज्जिका, भोजपुरी के अलावे हिन्दी गीत गाये हैं। मैंने प्यार किया तथा हम आपके हैं कौन जैसी फिल्मों में इनके द्वारा गाये गीत काफी प्रचलित हुए हैं। इनके गाये गीतों के कैसेट संगीत बाजार में सहजता से उपलब्ध है। दुल्हिन, पीरितिया, मेंहदी जैसे कैसेट्स काफी बिके हैं। बिहार एवं यहाँ से बाहर दुर्गा-पूजा, विवाह-समारोह या अन्य संगीत समारोहों में शारदा सिन्हा द्वारा गाये गीत अक्सर सुनाई देते हैं।लोकगीतों के लिए इन्हें ‘बिहार-कोकिला’, ‘पद्म श्री’ एवं ‘पद्म भूषण’सम्मान से विभूषित किया गया है।

संप्रदा सिंह

संप्रदा सिंह का जन्म बिहार के जहानाबाद में मोदनगंज प्रखंड के ओकरी गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्‍होंने गया यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई की थी और 8 अगस्‍त 1973 को उन्होंने अल्‍केम लैबोरेटरीज लिमिटेड की स्थापना की थी।

देश के सबसे बुजुर्ग अरबपति थे सम्प्रदा सिंह जिन्हें वर्ष 2018 में फोर्ब्स की ‘द वर्ल्ड बिलियनेयर्स लिस्ट ’में शामिल हुए थे। उनकी संपत्ति 1.2 अरब डॉलर थी जिसकी वजह से फोर्ब्स की लिस्ट में वे 1,867वें पायदान पर रहे थे। संप्रदा सिंह ने 45 साल पहले फार्मा कंपनी अल्‍केम की स्थापना की थी। अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर 26 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा की वैल्‍यूएशन वाली कंपनी खड़ी करने वाले संप्रदा सिंह कभी एक केमिस्‍ट शॉप में नौकरी किया करते थे।

शिल्पा शुक्ला

बिहार हाजीपुर की एक बेटी जो हाजीपुर जैसे छोटे से शहर से निकलकर बॉलीवुड में खुद को स्थापित किया | 2008 में इन्हें चक से इंडिया के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है | 2014 में बी ए पास के लिए इन्हें बेस्ट एक्ट्रेस इन नेगेटिव रोल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, साथ ही इसी रोल के लिए इन्हें बेस्ट एक्ट्रेस क्रिटिक्स का भी अवॉर्ड मिला | जी हाँ हम बात कर रहे हैं हाजीपुर के तितढा गाँव की रहने वाली शिल्पा शुक्ला की जिन्होंने खुद तो बतौर एक बेहतरीन अभिनेत्री साबित किया |

ये भी देखें: बुरे फंसे सैफ अली खान: इस मामले में पूरे परिवार को नोटिस, कोर्ट में होगी पेशी

शिल्पा सिंह

शिल्पा सिंह एक भारतीय ऐक्ट्रेस, डांसर, मॉडल है। शिल्पा मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिला के है।

ब्यूटी पेजेंट टाइटिल बिजेता, मिस यूनिवर्स 2012 सेमीफाइनलिस्ट भी बनी है।

तथागत अवतार तुलसी

बिहार के एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में पैदा हुए तथागत की विलक्षणता का इल्म उनके माता-पिता को उनके छह वर्ष के होने पर ही हो गया था और इसे उन्होंने नौ साल में दसवीं पास करके, और 12 वर्ष, दो महीने, 19 दिन में पटना यूनिवर्सिटी से 70.5 प्रतिशत अंकों के साथ एमएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करके पुष्ट भी किया।उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिलाया। और 21वें साल में इंडियन स्कूल ऑफ साइंस, बंगलुरू से डॉक्टरेट की उपाधि उनके हाथों में थी। तथागत अवतार तुलसी (22) अब बतौर असिस्टेंट प्रफेसर आईआईटी मुंबई के स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे है।

फणीश्वरनाथ रेणु

फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ जन्म बिहार के अररिया जिले के औराही हिंगना, फारबिसगंज में हुआ था। एक हिन्दी भाषा के साहित्यकार थे। इनके पहले उपन्यास मैला आंचल को बहुत ख्याति मिली थी जिसके लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

शत्रुध्न सिन्हा

बिहार की आन बान शान शत्रुघ्न सिन्हा बिहारी बाबू के नाम से मशहूर है। वे एक सफल फ़िल्म अभिनेता और राजनीतिज्ञ है। अटल सरकार में वे कैबिनेट मंत्री भी रह चुके है।

नेहा शर्मा

नेहा शर्मा भारतीय सिनेमा की एक अभिनेत्री हैं। ये मूल रूप से बिहार की हैं | इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा माउंट कारमेल स्कूल, भागलपुर से पूर्ण की| और नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली से फ़ैशन डिज़ाइन में शिक्षा प्राप्त की।

मनोज तिवारी

मनोज तिवारी भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार, राजनेता और संगीत निर्देशक हैं। वे 17वीं लोकसभा के सदस्य हैं। बीजेपी दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष है।

शितिकंठ

शितिकंठ ने IIT 2008 प्रवेश परीक्षा में AIR 1 लाकर पूरे देश में बिहार को गौरवान्वित किया।

रतन राजपूत

गांव की प्रतिभा भी पूरे विश्व में अपना परचम लहराती रही हैं। ऐसी ही एक प्रतिभा समस्तीपुर मोहनपुर प्रखंड के एक छोटे से गांव विशनपुर बेड़ी की बेटी’रत्तो’उर्फ रतन राजपूत है। छोटे पर्दे पर अपनी प्रतिभा के लिए दर्जनों बार सम्मानित हो चुकी गांव की इस बेटी’ललिया’को लोगों ने आज तक नहीं भुलाया है।’अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’में लोहा की बहू और शेखर की पत्नी का किरदार निभा चुकी रतन एक दर्जन से अधिक सीरियल में मुख्य भूमिका अदा कर चुकी है जिसमें’राधा की बेटिया कुछ कर दिखाएगी’,’हाउज दैट’,’रावण शो’,’महाभारत’,’बिग बॉस’,’फना’एवं संतोषी मां की अदाकारी में लोगों को मुग्ध किया।

रतन राजपूत बिहार निर्वाचन आयोग की ब्रांड एम्बेसेडर भी रही है। महज 27 वर्ष की उम्र में गांव की इस बेटी ने अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है। पिता सेल टैक्स में संयुक्त आयुक्त थे। रतन ने सातवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। हालांकि बाद में पारिवारिक दबाव के कारण गृह विज्ञान से स्नातक की। तीन वर्ष तक भरत नाट्यम की शिक्षा लेने के बाद भाग्य आजमाने मुंबई चली गई। वर्ष 2009 में अगले जन्म मोहे बिटिया ही किजो में लाली का किरदार मिलने के बाद वह कभी पीछे मुड़कर नहीं देखी।

ये भी देखें: ये क्या हुआ अंकिता लोखंडे के साथ, सारे सपने बिखर गए

शिवसागर रामगुलाम

सर शिवसागर रामगुलाम मारिशस के प्रथम मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री एवं छठे गवर्नर-जनरल थे। भोजपुरी मोरिशस में काफी प्रचलित है।

राजकेश्वर पुरयाग

मॉरिशस के राष्ट्रपति राजकेश्वर पुरयाग जब बिहार पहुंचे तो फफक-फफक कर रो पड़े. उन्होंने कहा कि बिहार के गांव वाजितपुर से उनका गहरा नाता है। पटना से 30 किलोमीटर दूर पुनपुन मसौढ़ी अंचल के वाजितपुर गांव में वो पत्नी अनीता पुरयाग और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ पहुंचे थे। नागरिक अभिनंदन के दौरान बोलने के क्रम में वो अपने परदादा पुरयाग नोनिया को याद कर रोने लगे। उन्होंने कहा कि 150 वर्ष पहले उनके परदादा पुरयाग नोनिया बिहार के वाजितपुर गांव से मॉरिशस गए थे।

अभयानंद

अभयानंद बिहार के पूर्व डीजीपी रह चुके है। गरीब प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स के सपने को आईआईटी तक पहुचाने के लिये super 30 नामक संस्था के स्तम्भकार है। रहमानी ,मगध , अभयानंद सुपर 30 नामक संस्था के जरिये आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स को निःशुल्क शिक्षा देकर उनके सपने को पंख लगा रहे। हजारो युवायों के रॉल मॉडल है।

आरके श्रीवास्तव ( मैथमेटिक्स गुरु फेम)

मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव यानी गणित पढ़ाने का दीवाना, पूरी रात लगातार 12 घण्टे स्टूडेंट्स को गणित का गुर सिखाते , सिर्फ 1 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर पढ़ाते है गणित। सैकड़ो गरीब प्रतिभा को आईआईटी , एनआईटी, बीसीईसीई , एनडीए में सफलता दिलाकर उनके सपने को लगा चुके पंख। विगत कई वर्षों से अखबारों में इनके शैक्षणिक कार्यशैली खूब सुर्खियां बटोर रहा। ZEE News पर इनके शैक्षणिक कार्यशैली पर स्टोरी भी दिखाई जा चुकी है।

वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव मशहूर है कि वे जादुई तरीके से खेल खेल में गणित का गुर सिखाते है। चुटकले सुनाकर खेल-खेल में पढ़ाते हैं । उनकी पढ़ाई की खासियत है कि वह बहुत ही स्पष्ट और सरल तरीके से समझाते हैं। सामाजिक सरोकार से गणित को जोड़कर, चुटकुले बनाकर सवाल हल करना आरके श्रीवास्तव की पहचान है।

गणित के लिये इनके द्वारा चलाया जा रहा निःशुल्क नाईट क्लासेज अभियान पूरे देश मे चर्चा का विषय बना हुआ है। पूरे रात लगातार 12 घण्टे स्टूडेंट्स को गणित का गुर सिखाना कोई चमत्कार से कम नही। सबसे बड़ी बात है कि वैसे स्टूडेंट्स जिन्हें गणित के नाम से ही डर लगता है परंतु वे आरके श्रीवास्तव के क्लास में जब शिक्षा ग्रहण करते है तो वे गणित के हौवा को भूल जाते है।स्टूडेंट्स अगले दिन भी यह कहते है कि हमे आरके श्रीवास्तव के नाईट क्लासेज में पूरे रात लगातार 12 घण्टे गणित पढ़ना है। पूरे रात लगातार 12 घण्टे स्टूडेंट्स बिना किसी तनाव के एन्जॉय करते हुए गणित के प्रश्नों को हल करते है।

इस क्लास को देखने और उनका शैक्षणिक कार्यशैली को समझने के लिए कई विद्वान इनका इंस्टीटूट देखने आते है। नाईट क्लासेज अभियान हेतु स्टूडेंट्स को सेल्फ स्टडी के प्रति जागरूक करने और गणित को आसान बनाने के लिए यह नाईट क्लासेज अभियान अभिभावकों को खूब भा रहा। स्टूडेंट्स के अभिभावक इस बात से काफी प्रसन्न दिखे की मेरा बेटा बेटी जो ठीक से घर पर पढ़ने हेतु 3-4 घण्टे भी नही बैठ पाते, उसे आरके श्रीवास्तव ने पूरे रात लगातार 12 घण्टे पूरे कंसंट्रेशन के साथ गणित का गुर सिखाया।

आपको बताते चले कि अभी तक आरके श्रीवास्तव के द्वारा 450 क्लास से अधिक बार पूरे रात लगातार 12 घण्टे स्टूडेंट्स को निःशुल्क गणित की शिक्षा दी जा चुकी है जो आगे जारी भी है।वैसे आरके श्रीवास्तव का प्रतिदिन क्लास में तो स्टूडेंट्स गणित का गुर सीखते ही है परंतु यह स्पेशल नाईट क्लासेज प्रत्येक शनिवार को लगातार 12 घण्टे बिना रुके चलता है।

कोरोना संकट में भी ऑनलाइन क्लासेज में आरके श्रीवास्तव ने स्टूडेंट्स को पूरे रात भर गणित पढाया। सुबह क्लास ऑफ़ होने पर स्टूडेंट्स ने कहा कब रात से सुबह हो गया पता ही नही चला , ऐसा जादूई तरीके से पढाने वाला शिक्षक आज तक नही देखा।ऑनलाइन शिक्षा में पूरी रात वही शिक्षक स्टूडेंट्स को जगा सकता है जिनके पढाने का तरीका जादूई हो। आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्यशैली पर बहुत सारी संस्थाएँ रिसर्च कर रहे है।

महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी कर चुके हैं मैथेमैटिक्स गुरू के पढाने के तरीके की प्रशंसा। आरके श्रीवास्तव का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स, इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज हो चुका है। आरके श्रीवास्तव गणित बिरादरी सहित पूरे देश मे उस समय चर्चा में आये जब वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम के सामने इन्होंने क्लासरूम प्रोग्राम में बिना रुके पाइथागोरस थ्योरम को 50 से ज्यादा अलग-अलग तरीके से सिद्ध कर दिखाया। आरके श्रीवास्तव ने कुल 52 अलग अलग तरीको से पाइथागोरस थ्योरम को सिद्ध कर दिखाया।

ये भी देखें: तो ये बचा रहा कोरोना से भारतीयों की जान, शोध में सामने आया इम्यूनटी का राज

जिसके लिए इनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स लंदन में दर्ज चुका है।वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स लंदन के छपी किताब में यह जिक्र भी है कि बिहार के आरके श्रीवास्तव ने बिना रुके 52 विभिन्न तरीकों से पाइथागोरस थ्योरम को सिद्ध कर दिखाया। इसके लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट के सांसद वीरेंद्र शर्मा ने आरके श्रीवास्तव को इनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई एवं शुभकामनाये भी दिया। इसके अलावा आरके श्रीवास्तव संख्या 1 क्या है, पर शैक्षणिक सेमिनार में घण्टो भाषण देकर अपने प्रतिभा से बिहार को गौरवान्वित कराया।

आरके श्रीवास्तव अपने पढ़ाई के दौरान टीबी की बीमारी के चलते नही दे पाये थे आईआईटी प्रवेश परीक्षा। उनकी इसी टिस ने बना दिया सैकड़ो स्टूडेंट्स को इंजीनयर।आर्थिक रूप से गरीब परिवार में जन्मे आरके श्रीवास्तव का जीवन भी काफी संघर्ष भरा रहा।

आरके श्रीवास्तव सिर्फ 1 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर पढ़ाते है गणित, प्रत्येक अगले वर्ष 1 रुपया अधिक लेते है गुरु दक्षिणा।सैकड़ो आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स ( सब्जी विक्रेता का बेटा, गरीब किसान, मजदूर ,पान विक्रेता )को आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई में सफलता दिलाकर बना चुके है इंजीनियर। आज ये सभी स्टूडेंट्स अपने गरीबी को पीछे छोड़ अपने सपने को पंख लगा रहे।

इनके द्वारा चलाया जा रहा वंडर किड्स प्रोग्राम क्लासेज भी अद्भुत है, इस प्रोग्राम के तहत नन्हे उम्र के बच्चे जो वर्ग 7 और 8 में है परंतु अपने वर्ग से 4 वर्ग आगे के प्रश्नों को हल करने का मद्दा रखते है। वर्ग 7 व 8 के स्टूडेंट्स 11 वी , 12 वी के गणित को चुटकियो में हल करते है।

आरके श्रीवास्तव के वंडर किड्स प्रोग्राम क्लासेज के इन स्टूडेंट्स से मिलने और शैक्षणिक कार्यशैली को समझने के लिये अन्य राज्यो के लोग इनके इंस्टीटूट को देखने आते है।इसी खासियत और इनके गणित पढ़ाने के जादुई तरीके ने उन्हें मैथमेटिक्स गुरु का दर्जा दिला दिया ।

श्रीवास्तव अपने शैक्षणिक तरीको से स्टूडेंट्स में काफी लोकप्रिय है।चाहे वह नाईट क्लास के रूप में लगातार 12 घण्टे गणित का गुर सीखना हो या वे इस बात से भी काफी लोकप्रिय है कि 10 से भी ज्यादा तरीकों से 1 सवाल को बना सकते है। इसी खासियत ने उन्हें आज देश मे मैथमेटिक्स गुरु का दर्जा दिला दिया। अमेरिकी विवि से भी हो चुके है सम्मानित। गूगल बॉय कौटिल्य पंडित के गुरु के रूप में भी देश इन्हें जानता है।

मनोज बाजपेयी

मनोज बाजपेयी भारतीय हिन्दी फ़िल्म उद्योग बॉलीवुड के एक जाने माने अभिनेता हैं। मनोज को प्रयोगकर्मी अभिनेता के रूप में जाना जाता है। उन्होने अपना फ़िल्मी कैरियर १९९४ मे शेखर कपूर निर्देशित अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फ़िल्म बैंडिट क्वीन से शुरु किया। बॉलीवुड मे उनकी पहचान राम गोपाल वर्मा निर्देशित फ़िल्म सत्या से बनी। इस फ़िल्म ने मनोज को उस दौर के अभिनेताओं के समकक्ष ला खङा किया। इस फ़िल्म के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

रामधारी सिंह दिनकर

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। ‘दिनकर’ स्वतन्त्रता पूर्व एक विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतन्त्रता के बाद ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से जाने गये। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे।

लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद यादव भारत के बिहार राज्य के राजनेता व राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष हैं। वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। बाद में उन्हें 2004 से 2009 तक केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में रेल मन्त्री का कार्यभार सौंपा गया।

ये भी देखें: अखिलेश यादव ने बीजेपी पर साधा निशाना, किसानों के लिए कही ये बात

रवीश कुमार

रवीश कुमार एक भारतीय टीवी एंकर, लेखक और पत्रकार हैं,। रवीश एनडीटीवी समाचार नेटवर्क के हिंदी समाचार चैनल ‘एनडीटीवी इंडिया’ में वरिष्ठ कार्यकारी संपादक है, और चैनल के प्रमुख कार्यक्रमों जैसे ‘हम लोग’ और ‘रवीश की रिपोर्ट’ के होस्ट रहे हैं। रवीश कुमार का प्राइम टाइम शो वर्तमान में काफी लोकप्रिय है। 2016 में “द इंडियन एक्सप्रेस” ने अपनी ‘100 सबसे प्रभावशाली भारतीयों’ की सूची में उन्हें भी शामिल किया था।

रैमन मैग्सेसे अवार्ड से हो चुके सम्मानित।रवीश कुमार पांडेय का जन्म बिहार के पूर्व चंपारन जिले के मोतीहारी में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ। उन्होंने लोयोला हाई स्कूल, पटना, से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, और फिर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह दिल्ली आ गये। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया।

रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी भारत के एक महान विचारक, चिन्तक, मनन करने वाले क्रान्तिकारी साहित्यकार, पत्रकार, संपादक थे।वे हिन्दी साहित्य के शुक्लोत्तर युग के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। वे बिहार के बेनीपुरी गांव में जन्मे थे।

बाबू कुंवर सिंह

बाबू कुंवर सिंह सन 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही और महानायक थे। अन्याय विरोधी व स्वतंत्रता प्रेमी बाबू कुंवर सिंह कुशल सेना नायक थे। इनको 80 वर्ष की उम्र में भी लड़ने तथा विजय हासिल करने के लिए जाना जाता है।

वीर कुंवर सिंह का जन्म बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर गांव में हुआ था। इनके पिता बाबू साहबजादा सिंह प्रसिद्ध शासक भोज के वंशजों में से थे।

रविशंकर प्रसाद

रवि शंकर प्रसाद एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं।वर्तमान में वे भारतीय संसद के ऊपरी सदन में बिहार राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भारत के कोयला एवं खान मंत्रालय, न्याय एवं विधि मन्त्रालय तथा सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय में राज्य मन्त्री रह चुके हैं। प्रसाद भारत के मुख्य राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अग्रणी सदस्यों में से एक हैं। वर्ष 2019 में पटना साहिब से जीतकर पहली बार लोकसभा सांसद बने। मोदी के दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट में मंत्री है।

संजय झा

दुनिया भर में सबसे अधिक कमाई करने वाले CEO की लिस्ट में जब बिहार के संजय झा का नाम सामने आया तो समस्त देशवासियों का गर्व से सीना फूल गया। संजय झा वर्तमान में Global Foundries के सीईओ हैं।इससे पहले संजय झा मोटोरोला कंपनी और Qualcomm जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के सीईओ रह चुके हैं।

संदली सिन्हा

बिहार में जन्मी संदली सिन्हा भारतीय बॉलीवुड अभिनेत्री और मॉडल है। वह रोमांटिक हिट तुम बिन (2001) में पिया के किरदार के लिए जानी जाती है।

नागार्जुन

नागार्जुन हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार नागार्जुन ने हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली संस्कृत एवं बाङ्ला में मौलिक रचनाएँ भी कीं तथा संस्कृत, मैथिली एवं बाङ्ला से अनुवाद कार्य भी किया। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले थे।

ये भी देखें: 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामलें में SC में सुनवाई, हो सकता है ये बड़ा फैसला

जगजीवन राम

बिहार में जन्मे जगजीवन राम एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा भारत के प्रथम दलित उप-प्रधानमंत्री एवं राजनेता थे,

जगजीवन राम – जिन्हें आम तौर पर बाबूजी के नाम से जाना जाता है एक राष्ट्रीय नेता स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक न्याय के योद्धा, दलित वर्गों के समर्थक, उत्कृष्ट सांसद, सच्चे लोकतंत्रवादी, उत्कृष्ट केंद्रीय मंत्री, योग्य प्रशासक और असाधारण मेधावी वक्ता थे।

उनके पिता डा. बीरबल एक प्रतिष्ठित चिकित्सक थे और उन्होंने ब्रिटिश सेना में कार्य किया था तथा 1889-90 में चीन-लुशई युद्ध में उनकी सेवाओं के लिए तत्कालीन वायसराय लार्ड लैंसडाउन द्वारा उन्हें विक्टोरिया मैडल से सम्मानित किया गया था। जगजीवन राम का जन्म शोभी राम और वसंती देवी के यहां 5 अप्रैल, 1908 को बिहार के शाहाबाद जिले अब भोजपुर के एक छोटे से गांव चंदवा में हुआ था।

जगजीवन राम को आदर्श मानवीय मूल्य और सूझबूझ अपने पिता से विरासत में मिली जो धार्मिक प्रविृति के थे अैर शिव नारायणी मत के महंत थे। जब वे विद्यालय में ही थे तब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया और उनका पालन-पोषण उनकी माता जी को करना पड़ा।

अपनी माताजी के मार्गदर्शन में जगजीवन राम ने आरा टाउन स्कूल से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। जाति आधारित भेदभाव का सामना करने के बावजूद जगजीवन राम ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से विज्ञान में इंटर की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की और तत्पश्चात, कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा पास की।

बिस्मिल्ला खान

उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ हिन्दुस्तान के प्रख्यात शहनाई वादक थे। उनका जन्म डुमराँव, बिहार में हुआ था। सन् 2001 में उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

वह तीसरे भारतीय संगीतकार थे जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।

पंकज त्रिपाठी

बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी की गिनती आज सफल अभिनेताओं में होती है। इस सफलता के बाद भी वे अपने गांव-अपनी जमीन से गहरे जुड़े हैं, हाल में वे एक सप्ताह के लिए अपने गांव आये, अपने मां-पिता के साथ रहे और फिर उन यादों व अनुभव को लेकर मायानगरी मुंबई लौट गये। पंकज त्रिपाठी बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने गांव, परिवार की तसवीरें अपने फेसबुक एकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा – माई, बाबूजी के साथ बरसों बाद पूरा हफ्ता गुजार कर आया हूं, सब कुछ वहीं है जहां छोड़ कर आया था।

जाहिर है गैंग्स ऑफ बासेपुर व मसान फिल्मों का यह अभिनेता अपनी गांव, माटी को अपने दिल में गहरे बसाये हुए है। मुंबई लौटने से पहले पंकज त्रिपाठी ने अपने गांव जाने के दौरान का फोटो शेयर किया था, जिसमें लिखा था – भिखारी ठाकुर जी की धरती से गुजरते हुए अपनी धरती की ओर। इसमें उन्होंने नदी और नाव की तसवीर पोस्ट की थी. गांव में माता-पिता के साथ पंकज त्रिपाठी। पटना में कॉलेज के दिनों सक्रिय रूप से रंगमंच से जुड़ने वाला यह कलाकार बाद के दिनों में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और फिर मायानगरी मुंबई पहुंच गया। उन्होंने अबतक 35 फिल्मों में अभिनय किया है।

2004 में उन्होंने फिल्म रन से शुरुआत की थी।गैंग्स आॅफ वासेपुर की दोनों सीरीज में उन्होंने सुल्तान कुरैशी की भूमिका निभाई।मसान में उन्होंने सत्याजी का किरदार निभाया।

ये भी देखें: चीनी सरकार से ड्राइवर का बदला: बस के साथ किया ऐसा, 21 लोगों की मौत

नवीनचन्द्र रामगुलाम

नवीनचन्द्र रामगुलाम मारिशस के पूर्व प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता हैं। वर्षों पहले गिरमिटिया मजदूर बिहार से मॉरीशस गए थे

बिहार के के भोजपुर ज़िले के एक गाँव के लोगों को अपनी क़िस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा है, सड़कें बन गईं हैं, स्कूल, पानी-बिजली सब कुछ बिहार सरकार ने उपलब्ध कराया है.

हरिगाँव को बुनियादी सुविधाएँ इसलिए उपलब्ध हो सकी हैं क्योंकि उसका एक बेटा हज़ारों मील दूर मज़दूरी करने मॉरीशस गया था।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के पिता सर शिवसागर रामगुलाम ने, न सिर्फ़ मॉरीशस को आज़ादी दिलाई थी बल्कि 1961 से 1982 तक वे वहाँ के प्रधानमंत्री भी रहे थे.

बिहार सरकार ने शिवसागर रामगुलाम की पटना में एक प्रतिमा स्थापित की है. इसका अनावरण मॉरीशस के प्रधानमंत्री और उनके बेटे नवीनचंद्र रामगुलाम ने किया। नवीनचंद्र रामगुलाम ने बिहार के भोजपुर के ‘हरिगाँव’ की उस भूमि के दर्शन का सपना पूरा किया जिसे छोड़ कर 140 साल पहले उनके पूर्वज रोज़ी-रोटी की खोज में मॉरीशस चले गए थे।

अंजना ओम कश्यप

अंजना ओम कश्यप एक भारतीय पत्रकार और समाचार प्रस्तोता है। वह आज तक समाचार चैनल की एक कार्यकारी संपादक है। वह भारत के सबसे सफल और प्रसिद्ध पत्रकारों में से एक है। वह अपने कार्यक्रम हल्ला बोल और आज तक विशेष रिपोर्ट के लिए जानी जाती हैं।उन्होंने पहले अन्य हिंदी चैनलों में बडी बहस और दो टूक जैसे बहस कार्यक्रमों की मेजबानी की है। अंजना ओम कश्यप के पिता बिहार के आरा जिले से है और माता नालंदा के बिहारशरीफ से हैं। अंजना ओम कश्यप ने स्कूलिंग लॉरेंटो कान्वेंट स्कूल रांची से की थी। आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गयी थी।

आनंद कुमार

आनन्द कुमार एक भारतीय गणितज्ञ, शिक्षाविद है। उन्हें प्रसिद्धि सुपर 30 कार्यक्रम के कारण मिली, जो कि उन्होंने पटना, बिहार से 2002 में प्रारम्भ किया था, जिसके अन्तर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाया जाता है। 2018 के आँकड़ों के अनुसार, उनके द्वारा प्रशिक्षित 480 में 422 छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के लिये चयनित हो चुके हैं। डिस्कवरी चैनल ने भी इनके कार्यों पर लघु फ़िल्म बनाई है। इनपर बायोपिक भी बन चुका है। जिसे फ़िल्म अभिनेता हृतिक रोशन ने उनके किरदार को निभाया।।

कृष्णा सिंह

महान स्वतंत्रता सेनानी “बिहार केसरी” डॉ. श्रीकृष्ण सिंह भारत के अखंड बिहार राज्य के प्रधानमंत्री व प्रथम मुख्यमंत्री (1946–1961) थे। स्वतंत्रता सेनानी व उनके सहयोगी डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह उनके मंत्रिमंडल में उपप्रधानमंत्री, उपमुख्यमंत्री व वित्तमंत्री के रुप में आजीवन साथ रहे। उनके मात्र 10 वर्षों के शासनकाल में बिहार में उद्योग,कृषि, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, कला व सामाजिक क्षेत्र में की उल्लेखनीय कार्य हुये।

उनमें आजाद भारत की पहली रिफाइनरी- बरौनी ऑयल रिफाइनरी, आजाद भारत का पहला खाद कारखाना- सिन्दरी व बरौनी रासायनिक खाद कारखाना, एशिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग कारखाना-भारी उद्योग निगम (एचईसी) हटिया, देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट-सेल बोकारो, बरौनी डेयरी, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड-गढ़हरा, आजादी के बाद गंगोत्री से गंगासागर के बीच प्रथम रेल सह सड़क पुल-राजेंद्र पुल, कोशी प्रोजेक्ट, पुसा व सबौर का एग्रीकल्चर कॉलेज, बिहार, भागलपुर, रांची विश्वविद्यालय इत्यादि जैसे अनगिनत उदाहरण हैं।

उनके शासनकाल में संसद के द्वारा नियुक्त फोर्ड फाउंडेशन के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री श्री एपेल्लवी ने अपनी रिपोर्ट में बिहार को देश का सबसे बेहतर शासित राज्य माना था और बिहार को देश की दूसरी सबसे बेहतर अर्थव्यवस्था बताया था। अखंड बिहार के विकास में उनके अतुलनीय, अद्वितीय व अविस्मरणीय योगदान के लिए “बिहार केसरी” श्रीबाबू को आधुनिकबिहार के निर्माता के रूप में जाना जाता है ।अधिकांश लोग उन्हें सम्मान और श्रद्धा से “बिहार केसरी” और “श्रीबाबू” के नाम से संबोधित करते हैं।

वशिष्ठ नारायण सिंह

वशिष्ठ नारायण सिंह एक भारतीय गणितज्ञ है। उनका जन्म बिहार के भोजपुर जिला में बसंतपुर नाम के गाँव में हुआ। उन्होने बर्कली के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से १९६९ में गणित में पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त की।

तकरीबन 40 साल वे मानसिक बीमारी सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित रहे अमेरिका से आने के बाद वशिष्ठ नारायण सिंह बिमारी के दौरान पटना के एक अपार्टमेंट में 40 वर्षो तक गुमनामी का जीवन बिताते रहे । ऐसी विलक्षण प्रतिभा को सरकार का कभी भरपुर सहयोग नही मिला। बिमारी में भी किताब, कॉपी और एक पेंसिल उनकी सबसे अच्छी दोस्त हमेशा रहा।

पटना में रह रहे उनके भाई अयोध्या सिंह बताते है, “अमरीका से वह अपने साथ 10 बक्से किताबें लाए थे, जिन्हें वह पढ़ते थे। यादास कमजोर होने पर भी उनको किसी छोटे बच्चे की तरह ही उनके लिए तीन-चार दिन में एक बार कॉपी, पेंसिल लानी पड़ती थी।वशिष्ठ नारायण सिंह जब पटना साइंस क़ॉलेज में पढ़ते थे तभी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन कैली की नज़र उन पर पड़ी।

कैली ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और 1965 में वशिष्ठ नारायण अमरीका चले गए साल 1969 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए।नासा में भी काम किया लेकिन मन नहीं लगा और 1971 में भारत लौट आए।

पहले आईआईटी कानपुर, फिर आईआईटी बंबई, और फिर आईएसआई कोलकाता में नौकरी की। आईंस्टीन की थ्योरी को कर चुके थे चैलेंज। इनके रिसर्च को दुनिया करती है सलाम। इस दुनिया से चले जाने के बाद भारत सरकार ने उनको पद्मश्री से नवाजा। पद्मश्री वशिष्ठ नारायण सिंह की प्रतिभा को पूरी दुनिया आज भी करती है सलाम।

नीतीश कुमार

नीतीश कुमार एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो बिहार के मुख्य मंत्री हैं, उन्होंने 2005 से 2014 तक बिहार के मुख्यमंत्री और 2015 से 2017 उसके बाद 2017 से वर्तमान में अभी मुख्यमंत्री है। उन्होंने भारत सरकार के एक मंत्री के रूप में भी सेवा की। वह जनता दल यू राजनीतिक दल के प्रमुख नेताओं में से हैं।नीतीश कुमार का जन्म बख्तियारपुर, बिहार में हुआ था।एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो बिहार के मुख्य मंत्री हैं।

उन्होंने खुद को बिहारीओं के साथ मिलकर पिछली सरकारों से कम उम्मीदों का सामना किया, जब मुख्यमंत्री के रूप में, उनकी समाजवादी नीतियों ने 100,000 से अधिक स्कूल शिक्षकों को नियुक्त करने में लाभांश दिया, यह सुनिश्चित करना कि डॉक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में काम करते हैं, गांवों के विद्युतीकरण, बेहतर सड़कों , आधे से मादा निरक्षरता को काटने, अपराधियों पर टूटकर और औसत बिहारी की आय को दोगुना करके एक बढ़ता बिहार बनाने की ओर आगे लेकर आये।

ये भी देखें: मत रहिए हर्ड इम्यूनिटी के भरोसे, विशेषज्ञों ने किया सावधान

सात शहीद स्मारक

शहीद स्मारक सात शहीदों की एक जीवन-आकार की मूर्ति है जो पटना में सचिवालय भवन के बाहर स्थित है। इन युवाओं ने भारत छोड़ो आन्दोलन (अगस्त 1942) में अपने जीवन का बलिदान दिया था,और उस भवन पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था जो अब सचिवालय भवन है।

15 अगस्त 1947 को बिहार के राज्यपाल श्री जयराम दास दौलतराम ने अखण्ड बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा की उपस्थिति में शहीद स्मारक की आधारशिला रखी। मूर्तिकार देवप्रसाद रायचौधरी ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ सात विद्यार्थियों की कांस्य प्रतिमा का निर्माण किया।

Newstrack

Newstrack

Next Story