राम जन्मभूमि विवाद पर सुनवाई पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर बुधवार को सुनवाई खत्म हो गई है। पहले हिंदू और फिर मुस्लिम पक्ष ने देश की सबसे बड़ी अदालत में अपनी-अपनी आखिरी दलीलें रखीं। आखिर में मुस्लिम पक्ष ने दलीलें रखीं। इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर बुधवार को सुनवाई खत्म हो गई है। पहले हिंदू और फिर मुस्लिम पक्ष ने देश की सबसे बड़ी अदालत में अपनी-अपनी आखिरी दलीलें रखीं। आखिर में मुस्लिम पक्ष ने दलीलें रखीं।

इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस अगले महीने 18 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि उससे पहले इस ऐतिहासिक मामले पर फैसला आ सकता है।

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अब सुप्रीम कोर्ट ने लिखित हलफनामा, मोल्डिंग ऑफ रिलीफ को लिखित में जमा करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मुद्दे पर नियमित सुनवाई तय होने के बाद 40 दिनों तक हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। बुधवार को सुनवाई के 40वें और आखिरी दिन कोर्ट में तीखी बहस हुई।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हिंदू पक्ष की तरफ से जमा किए एक नक्शे को फाड़ दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के वकीलों में तीखी नोकझोक हुई। इस पर चीफ जस्टिस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने देखा कि मामले में शामिल पक्ष एक ऐसा माहौल पैदा कर रहा है, जो सुनवाई के अनुकूल नहीं है।

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चीफ जस्टिस रंजन गगोई ने कहा कि हम सुनवाई को इस तरह से जारी नहीं रख सकते। लोग खड़े हो रहे हैं और बिना बारी के बोल रहे हैं। हम भी अभी खड़े हो सकते हैं और मामले की कार्यवाही को खत्म कर जा सकते हैं।

सुनवाई के दौरान हिंदू महासभा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में किताब रखी इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने आपत्ति जताई। इसी दौरान उन्होंने अदालत में एक नक्शा भी फाड़ दिया।

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हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एक किताब रखने की कोशिश की तो मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वह इनके सवालों का जवाब नहीं देंगे। इसपर चीफ जस्टिस रंजन गगोई ने कहा कि ठीक है, आप जवाब मत देना।

दरअसल, हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने एडिशनल डॉक्यूमेंट के तौर पर पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल की किताब बेंच को दी थी।

बता दें कि गुजरात कैडर और 1972 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल ने अपनी लिखी किताब ‘अयोध्या रीविजिटेड’ में दावा किया है कि अयोध्या के मंदिरों को बाबर ने नहीं बल्कि औरंगजेब ने तोड़वाये थे। कुणाल का दावा है कि बाबर कभी अयोध्या नहीं आया था।

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अयोध्या में राम मंदिर बाबर के शासनकाल के दौरान नहीं, बल्कि औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया था। उन्होंने बताया है कि संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेंच विद्वानों ने भी अपनी पुस्तक में लिखा है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर मौजूद था।

राजीव धवन की आपत्ति पर विकास सिंह ने कहा कि मैं किताब पर अपना जवाब नहीं दे रहा हूं, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक एक नक्शा दिखाना चाहता हूं।

हालांकि, राजीव धवन ने इसपर भी ऐतराज जताया और कहा कि ये भी किताब का हिस्सा है, इसे मंजूरी नहीं दी जा सकती। इतना कहते ही राजीव धवन ने उस नक्शे को फाड़ दिया और उसके पांच टुकड़े कर डाले। हिंदू महासभा के वकील ने इस दौरान बुकनन और थ्रेलर की किताबों का भी हवाला दिया।

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इसके बाद राजीव धवन क्रोधित हो गए और गुस्से में कहा कि आपने कोर्ट का मजाक बना दिया है। इसके जवाब में विकास सिंह ने भी कहा कि मजाक तो आप बना रहे हैं।

इसके अलावा विकास सिंह ने ऑक्सफोर्ड की किताब का हवाला दिया और जन्मस्थान की पुष्टि की। विकास सिंह ने कहा कि बाबर उदार था, लेकिन औरंगजेब कट्टर शासक था। बाबरनामा में ऐसी किसी बात का जिक्र नहीं है।

नक्शा फाड़े जाने पर किताब के लेखक कुणाल किशोर ने कहा कि धवन इंटेलेक्चुअल हैं। वह जानते हैं कि अगर नक्शा कोर्ट के सामने पेश होता तो उनका केस न के बराबर रह जाता। अगर धवन को दिक्कत थी तो उन्हें अपने मिले वक्त में उसपर बात करनी चाहिए थी।

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अब राम जन्मभूमि मामले फैसला आने से पहले योगी सरकार ने प्रदेश की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आदेश जारी कर पुलिस-प्रशासन के सभी अधिकारियों की छुट्टियां 30 नवंबर तक के लिए रद्द कर दी हैं। उन्हें लखनऊ में रहने के लिए कहा गया है।

अयोध्या में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की जा रही है। अयोध्या को हाई अलर्ट पर रखा गया है और दस अतिरिक्त कंपनियों को शहर में तैनात किया जा रहा है। जिले में धारा 144 भी लागू कर दी गई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम ड्रोन के साथ इलाके में निगरानी सुनिश्चित करेंगे। वहीं जिला प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों को ठहराने के लिए व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। स्थानीय गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं, स्कूलों और कॉलेजों का इस्तेमाल सुरक्षाबलों को ठहराने के लिए किया जाएगा।