लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी पास हुआ नागरिकता संशोधन बिल

लोकसभा से पास होने के बाद सरकार आज राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल 2019 पेश हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बिल पेश किया और अब इसपर चर्चा शुरू होगी। बिल को पास कराने के लिए 121 वोटों की जरूरत होगी।

नई दिल्ली: लोकसभा से पास होने के बाद सरकार आज राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल 2019 पेश हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बिल पेश किया और अब इसपर चर्चा हो रही है। बिल को पास कराने के लिए 121 वोटों की जरूरत होगी। लोकसभा में इस बिल के समर्थन में 311 वोट पड़े, जबकि 80 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया।

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संवैधानिक इतिहास का काला दिन: सोनिया गांधी

बिल पास होने पर सोनिया गांधी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ये संवैधानिक इतिहास का काला दिन है।

राज्यसभा से पास हुआ बिल

नागरिकता संशोधन बिल राज्यसभा से भी पास हो गया है। बिल के पक्ष में 117 वोट और विरोध में 92 वोट पड़े। बता दें कि ये बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुका है।

सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव खारिज

नागरिकता बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव खारिज हो गया है। सेलेक्ट कमेटी में ना भेजने के पक्ष में पड़े 125 वोट, विरोध में 105 वोट पड़े। वहीं शिवसेना ने सदन से वॉकआउट कर दिया है। शिवसेना के सांसद वोटिंग में हिस्सा नहीं लें।

अमित शाह बोले- कांग्रेस नेताओं और इमरान खान के बयान एक जैसे

अमित शाह ने संसद में जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस के नेताओं के बयान और पाकिस्तान के नेताओं के बयान कई बार घुलमिल जाते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कल जो बयान दिया और जो बयान आज सदन में कांग्रेस के नेताओं ने दिए वे एक समान हैं.पाकिस्तान का नाम लेने पर कांग्रेस गुस्सा क्यों हो जाती है। कांग्रेस के नेताओं के बयान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने यूएन में कोट किया।

सभी राज्यों में लागू होगा बिल

अमित शाह ने कहा कि मुसलमानों को डरने की जरूरत नहीं है। नागरिकता बिल में किसी की भी नागरिकता लेने का प्रावधान नहीं है। देने का प्रावधान है। बंगाल समेत देश के सभी राज्यों में ये बिल लागू होगा।

कांग्रेस में अशिक्षा दर ज्यादा: स्वामी

राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि कांग्रेस इस बिल को लेकर सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रही है क्योंकि कांग्रेस खुद एनआरसी और नागरिकता बिल को लेकर कन्फ्यूज है। उन्होंने कहा कि आर्टिकल-14 नागरिकता संशोधन विधेयक को रोक नहीं सकता है। मुझे लगता है कि कांग्रेस में संविधान को लेकर अशिक्षा दर ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि इस बिल के लिए सरकार बधाई की पात्र है। स्वामी ने 2003 में दिए मनमोहन सिंह के बयान को याद दिलाया, जिसमें उन्होंने (मनमोहन सिंह) कहा था कि बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों का नागरिकता देने के लिए हमें उदार होना चाहिए।

आप का विरोध

आम आदमी पार्टी ने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि मैं इस बिल का विरोध करता हूं, क्योंकि यह बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान के विरुद्ध है, यह शहीद-ए-आजम भगत सिंह के सपनों के भारत के विरुद्ध है। यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के भारत के विरुद्ध है।

बीजेपी सांसद का कांग्रेस पर पलटवार

छत्तीसगढ़ से बीजेपी सांसद सरोज पांडेय ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होते रहे लेकिन किसी ने आवाज उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई। आज पहली बार कोई सरकार आई है जिसने ऐसा करने की हिम्मत दिखाई है, मैं इसके लिए देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को बधाई देती हूं।

उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक राजनीति के लिए नहीं बल्कि मानवीय आधार पर लाया गया है। इस विधेयक से जिन शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी उन्हें भारत के अन्य नागरिकों की तरह ही सारी सुख सुविधाएं मिलेंगी। बीजेपी सांसद ने कहा कि पड़ोसी देशों में रहने वाले हिन्दू अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार कम होती रही। आखिर कहां गए वे? हमें उनका संरक्षण करने की आवश्यकता है।

-बीजेपी के सांसद केजे अल्फोंस ने कहा कि मैं इस बिल का समर्थन करता हूं, भारत ने वसुधैव कुटुम्बक को माना है। दुनियाभर के प्रताड़ित लोगों को भारत ने जगह दी है। लेकिन हिंदुओं की चिंता कौन करेगा।

शिवसेना कर सकती है वॉकआउट

नागरिकता संशोधन बिल पर मोदी सरकार को राहत मिल सकती है। बिल पर वोटिंग के दौरान शिवसेना सदन से वॉकआउट कर सकती है।

पुरखों ने भारत के साथ आकर गलती की: पीडीपी सांसद

पीडीपी के सांसद मीर मोहम्मद फैयाज ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से अब कोई मुसलमान इस देश में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को बिल के तहत नागरिकता दी जा रही है, हम उसका विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन मुसलमानों को बाहर निकालने का विरोध करते हैं।

पीडीपी के सांसद ने कहा कि हमारे पुरखों ने पाकिस्तान के साथ ना जाकर हिंदुस्तान के साथ आने का निर्णय लिया था लेकिन मुझे लगता है कि हमारे पुरखों ने गलती की थी।

बिल के विरोध में एनसीपी

एनसीपी के सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि इस बिल को बहुत जल्दबाजी में लाया गया है, देश में इसका पुरजोर विरोध हो रहा है। पूर्वोत्तर के जो हालात हैं, वो चिंता वाले हैं। इस बिल में कई कमियां हैं, संविधान में धर्म-जात के नाम पर भेदभाव नहीं होता है।

आरजेडी का सरकार पर हमला

लालू यादव की पार्टी आरजेडी के सांसद मनोज झा ने कहा कि ये बिल सैद्धांतिक, ऐतिहासिक, व्यवहारिक के मोर्चों पर गलत है। हमने वसुधैव कुटुम्बकम के बारे में पढ़ा था, उन्होंने शेर पढ़ा कि मायूस कर रहा नई रोशनी का रंग, ना इसका कुछ अदब है ना ऐतबार।

आरजेडी के सांसद ने कहा कि आपके विपक्ष में हूं, लेकिन शत्रु नहीं हूं, एक बार सोच लीजिए क्योंकि आप ब्लंडर करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी समुदाय से भेदभाव नहीं करना चाहिए। जर्मनी में जब यहूदियों को निकाला गया तो जर्मन वाले भी निकाले गए थे।

मनोज झा ने कहा कि मुझे पता है कि बिल पास करा लेंगे, लेकिन इतिहास में 10 साल की सरकार दो लाइन में खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि आज लालू यादव होते तो भी इसका घोर विरोध करते। एनआरसी में 1600 करोड़ खर्च हो गए, अगर पूरे देश में हुआ तो लाखों करोड़ खर्च हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर स्वर्ग में शोक सभा हो रही होगी, बापू को जिन्ना बोल रहे होंगे कि आपको इजरायल हुआ है।

बसपा ने बिल का विरोध किया

बसपा के सतीश चंद मिश्रा ने कहा कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान-बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यकों के बारे में सरकार ने सोचा उनको बधाई, लेकिन हम इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम पूछना चाहते हैं कि 31 दिसंबर 2014 की कटऑफ डेट क्यों रखी गई है। बसपा सांसद ने कहा कि ये बिल आर्टिकल 14, 15, 21 का उल्लंघन करता है।

बिल का भविष्य तय करेगा सुप्रीम कोर्ट: चिदंबरम

कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार जो बिल लेकर आ रही है, ये पूरी तरह से गैर-संवैधानिक है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी बनती है कि वही पास करें जो सही हो, अगर गैर-संवैधानिक बिल को हम पास करते हैं तो बाद में सुप्रीम कोर्ट इस बिल का भविष्य तय करेगी। पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि पूरा विश्वास है कि ये बिल अदालत में नहीं टिकेगा।

उन्होंने कहा कि ये बिल आर्टिकल 14 की बातों का उल्लंघन करता है, जिसमें समानता का अधिकार शामिल है। इसमें जो कानूनी कमियां हैं, उसका जवाब कौन देगा और जिम्मेदारी कौन लेगा। अगर कानून मंत्रालय ने इस बिल की सलाह दी है तो गृह मंत्री को कागज रखने चाहिए, जिसने भी इस बिल की सलाह दी है उसे संसद में लाना चाहिए।

चिदंबरम के सवाल

आपने तीन देशों को ही क्यों चुना, बाकी को क्यों छोड़ा?
आपने 6 धर्मों को ही क्यों चुना?
सिर्फ ईसाई को क्यों शामिल किया?
भूटान के ईसाई, श्रीलंका के हिंदुओं को क्यों बाहर रखा?

इतिहास बदलने जा रहे: सिब्बल

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत का भरोसा 2 नेशन थ्योरी में नहीं है। सरकार आज दो नेशन थ्योरी सही करने जा रही है। कांग्रेस एक नेशन में भरोसा करती है। उन्होंने कहा कि आप संविधान की बुनियाद को बदलने जा रहे हैं। आप हमारा इतिहास बदलने जा रहे हैं। यह काली रात कभी खत्म नहीं होगी। आप कहते हैं सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास लेकिन आपने सबका विश्वास खो दिया है।

खत्म कर दो पाकिस्तान: शिवसेना

शिवसेना के सांसद संजय राउत ने कहा कि लोकतंत्र में अलग आवाजें होती हैं। ये कहा जा रहा है कि जो इस बिल के साथ नहीं है वो देशद्रोही है, जो साथ है वही देशभक्त है। ये पाकिस्तान की संसद नहीं है, अगर पाकिस्तान की भाषा पसंद नहीं है तो पाकिस्तान को खत्म कर दो, हम आपके साथ हैं।

संजय राउत ने कहा कि अगर वहां हमारे भाईयों पर जुल्म हो रहा है, तो आप मजबूत हैं उनका साथ दीजिए। हमें किसी से देशभक्ति का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है, हम कितने कठोर हिंदू हैं जिस स्कूल में आप पढ़ते हो वहां हम पर हेडमास्टर हैं।

संजय राउत ने कहा कि इस देश से घुसपैठियों को बाहर निकलाना चाहिए, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का हनन हुआ है जिन लाखों-करोड़ों को यहां पर ला रहे हैं, तो क्या उन्हें वोटिंग का हक मिलेगा अगर इन्हें 20-25 साल वोटिंग का हक नहीं मिलता है तो बैलेंस रहेगा।

-बीपीएफ के सांसद विश्वजीत दैमारी ने कहा कि उत्तर पूर्व के लोगों को इस बिल को लेकर शंका है, इसलिए वहां विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बाहरी लोगों की वजह से वहां स्थानीय लोग हाशिए पर चले गए थे। बाहर के लोग शरणार्थी के तौर पर आए थे, उन्हें अगर नागरिकता मिल गई तो वहां क्या होगा। 35 साल बीतने के बाद भी असम अकॉर्ड के वादों को पूरा नहीं किया गया। उम्मीद करता हूं कि गृह मंत्री उत्तर पूर्व के लोगों की शंकाओं को दूर करेंगे। मैं इस बिल का समर्थन करता हूं।

-तमिलनाडु से डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो यह हमारे धर्मनिरपेक्षता के लिए एक आघात होगा। आपको (बीजेपी) जनादेश देश के सभी नागरिकों के साथ न्याय के लिए जनादेश मिला है।

-AIADMK के सांसद एस.आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि मैं पीएम और गृह मंत्री से अपील करता हूं कि इस बिल में मुसलमानों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी कुछ चिंताएं हैं लेकिन हम इस बिल का समर्थन करते हैं। मैं इस बिल का समर्थन करता हूं।

-राज्यसभा में सीपीआई (एम) ने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया है। सीपीआई(एम) के सांसद टीके रंगराजन ने कहा कि श्रीलंका से जो तमिल माइग्रेंट आए वो 35 साल से नागरिकता के लिए भटक रहे हैं, लेकिन किसी ने उनके बारे में नहीं सोचा।

 

-टीआरएस के सांसद केशव राव ने कहा इस बिल को वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इस बिल का राज्यसभा में विरोध किया है।

जेडीयू ने बिल का समर्थन किया

जेडीयू रामचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि इस बिल को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है। इस बिल में संविधान का उल्लंघन नहीं हुआ है, न ही आर्टिकल 14 का उल्लंघन किया गया है। जेडीयू ने राज्यसभा में इस बिल का समर्थन किया है। जेडीयू के सांसद ने कहा है कि हमारा देश गणतंत्र है, यहां के नागरिकों को समान अधिकार है। हमारे देश में चीफ जस्टिस, राष्ट्रपति भी अल्पसंख्यक समाज से हुए हैं, लेकिन क्या पड़ोसी मुल्क में ऐसा हुआ?

उन्होंने कहा कि यहां एनआरसी की बात हो रही है, लेकिन C के आगे D भी होता है, हमारे लिए D का मतलब डेवलेपमेंट है। रामचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि यूपीए से ज्यादा एनडीए की सरकार ने मदरसे बनाए, हमारी सरकार वेतन आयोग को आगे बढ़ा रही है। पहले की सरकारों से ज्यादा आज मदरसों का बजट किया गया है, बिहार में आज जाति-धर्म के नाम पर भेदभाव नहीं हुआ।

सपा का हमला

समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली ने कहा कि अगर संसद में किसी विशेष समुदाय के नाम लेने पर आपत्ति हो सकती है, लेकिन ये जो बिल आया है वो इसका उल्लंघन करता है। भारत का संविधान किसी धर्म विशेष के लिए नहीं है, ऐसे में जो भी इस देश को किसी एक धर्म का राष्ट्र बनाना चाहता है तो उसका खंडन होना चाहिए।

सपा सांसद ने कहा कि हमारे देश का बंटवारा हुआ था। टू नेशन थ्योरी। सावरकर मानते होंगे हिंदू एक राष्ट्र है। जिन्ना मानते होंगे, मुस्लिम एक राष्ट्र हैं। लेकिन मैं पूरे होशोहवास के साथ कह रहा हूं कि मैं नहीं मानता कि राष्ट्र धर्म के आधार पर बन सकता है। हिंदू राष्ट्र का मतलब क्या? इस्लामी राष्ट्र का मतलब क्या? कि जो हम आए दिन सुनते हैं भाषणों में कि हम हिंदुस्तान को मुस्लिम मुक्त बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि कई लोग तो तारीख तक बता देते हैं। इस्लामी राष्ट्र का क्या मतलब था कि पाकिस्तान हिंदू मुक्त होगा। जो ख्वाब जिन्ना का 1947 में बंटवारे के वक्त पूरा नहीं हो पाया कि पाकिस्तान हिंदू मुक्त हो और भारत मुस्लिम मुक्त हो, एनआरसी और सीएबी आने के बाद हमारी सरकार जिन्ना का ख्वाब पूरा करना करने जा रही है।

भारत विरोधी, बंगाल विरोधी है ये बिल: डेरेक ओ ब्रायन

राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि इस बिल पर संसद में संग्राम होगा, लेकिन उसके बाद ये बिल सुप्रीम कोर्ट में भी जाएगा। उन्होंने इस दौरान कहा कि ये बिल भारत विरोधी, बंगाल विरोधी है। टीएमसी सांसद ने कहा कि बीजेपी की नींव तीन बातों पर है सिर्फ झूठ, झांसा और जुमला। आप घुसपैठियों पर अधिकार छीनने का आरोप लगाते हैं लेकिन आपकी सरकार ने 2 करोड़ लोगों का रोजगार छीन लिया।

उन्होंने कहा कि जो देश में है, उनका आप ध्यान रख नहीं सकते हैं और बाहरी लोगों की बात कर रहे हैं। एजेंसियों के जो आंकड़े हैं उनके मुताबिक सिर्फ 31 हजार की शरणार्थी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने नोटबंदी, अर्थव्यवस्था, कश्मीर की बात की लेकिन हर बार सरकार ने वादा तोड़ा है। सरकार को वादा तोड़ने में महारत हासिल है।

डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि जिन्ना की कब्र पर गोल्डन अक्षरों में इस बिल के बारे में लिखा जाएगा, यहां पर इसके बारे में नहीं लिखा जाएगा। डेरेक ओब्रायन का कहना है कि इस बिल की बस दोबारा पैकेजिंग हो रही है। बंगाल के बारे में बात करने से पहले वहां पर आइए, हम भी ढोकला खाते हैं, लेकिन आपको बंगाल को समझने की जरूरत है।

डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि मेरे दादा क्रिश्चियन थे और उन्होंने बंगाली महिला से शादी की थी। मेरे दादा और उनके छोटे भाई भारत में रहे, एक भाई पाकिस्तान चले गए। पाकिस्तान में जो ओब्रायन गए उन्होंने या तो देश छोड़ा या धर्म परिवर्तन कर लिया, लेकिन आज भारत में ओब्रायन अभी भी हैं जो यहां की खूबी है।

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देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ: जेपी नड्डा

बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने कहा कि आनंद शर्मा जी का भाषण विद्वतापूर्ण था। अक्सर वकीलों के पास तर्क की कमी होती है तो वो कई तर्क ले आते हैं जिसका मूल से संबंध नहीं होता। उसमें आवाज बहुत होती है, लेकिन तथ्य कम दिखते हैं। आज जिस बिल के बारे में बात कर रहे हैं, उसका आधार सिर्फ एक है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में जिन अल्पसंख्यकों की प्रताड़ना हुई है उनको सिटिजनशिप देने का प्रावधान हुआ।

उन्होंने कहा कि देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ। इतना बड़ा नरसंहार न पहले कभी हुआ न उसके बाद हुआ। रातों-रात लोगों को घर छोड़कर जाना पड़ा। दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हो यह इच्छा थी। उस समय पाकिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध अल्पसंख्यक थे। हमें स्पष्ट होना चाहिए कि हिंदू पाकिस्तान में अल्पसंख्यक थे। पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक की सुरक्षा की बात हम आज से नहीं कह रहे जनसंघ के दिनों से कह रहे हैं।

सेक्युलरिज्म और समानता के खिलाफ है यह बिल: आनंद शर्मा

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि आपने (गृह मंत्री अमित शाह) कहा यह ऐतिहासिक बिल है। इतिहास कैसे देखेगा यह तो समय बताएगा। सरकार ने जल्दबाजी क्यों की। ये बिल हमारे संविधान के खिलाफ है। प्रजातंत्र के खिलाफ है। यह सेक्युलरिज्म और समानता के खिलाफ है।

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आनंद शर्मा ने कहा कि असम क्यों जल रहा है, वहां आज बच्चे सड़क पर क्यों हैं, जो डिटेंशन सेंटर बनाया गया है तो वहां पर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को भेजना चाहिए। किसी राजनीतिक दल का घोषणापत्र देश का संविधान नहीं हो सकता है।

उन्होंने असम में आज लोग जल रहे हैं, उनके मन में असुरक्षा है लेकिन आप पूरे देश में एनआरसी लाने की बात कह रहे हैं। आनंद शर्मा ने कहा कि गांधी-पटेल का नाम लेने से कुछ नहीं होगा।

आनंद शर्मा ने कहा कि सुना है हमारे धर्म में पुनर्जन्म को मानते हैं। अगर सरदार पटेल पीएम मोदी से मिल लिए तो बहुत दुखी होंगे। गांधी तो दुखी होंगे ही कि मेरे 150 साल मना रहे और ऐसा करते हो। गांधी का चश्मा और नाम केवल विज्ञापन के लिए नहीं है। उनके चश्मे से हिंदुस्तान को देखो। समाज को देखो। मानवता को देखो। गांधी का चश्मा सिर्फ विज्ञापन के लिए नहीं

मुस्लिम देश के नागरिक थे, हैं और रहेंगे: अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि पाकिस्तान और उस समय के पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में लगभग 20-20% अल्पसंख्यकों की आबादी कम हो चुकी है। आखिर कहां गए वो लोग, या तो वो मार दिए गए या धर्म परिवर्तन हो गया या वो लोग शरणार्थी बनकर अपने धर्म और सम्मान को बचाने के लिए भारत आ गए। अमित शाह ने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि हम वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं, मैं उन सब साथियों को कहना चाहता हूं कि हमने चुनाव के पहले ही ये इरादा देश के सामने रखा था, जिसे देश की जनता ने समर्थन दिया है।

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उन्होंने कहा कि इस बिल में हम तीनों पडोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को संरक्षण देकर उनको नागरिक बनाने की प्रक्रिया का संशोधन लेकर आए हैं। इसके साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए भी हम प्रावधान लेकर आए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा भ्रांति फैलाई जा रही है कि ये बिल मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है जो इस देश के मुसलमान हैं उनके लिए इस बिल में कोई चर्चा या चिंता का उल्लेख नहीं है। फिर ये किसकी चिंता कर रहे हैं?

अमित शाह ने कहा कि इस बिल के बारे में भ्रांति फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि कहा जा रहा है कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ है। इस देश के मुसलमानों के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। वे नागरिक थे, हैं और रहेंगे। मुसलमान किसी के बहकावे में नहीं आएं। उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं करेगा।

गृह मंत्री ने कहा कि इस बिल के प्रावधान में, लाखों, करोड़ों लोग जो नर्क की यातना का जीवन जी रहे हैं, उन्हें नई आशा दिखाने का ये बिल है। विभाजन के बाद हमारी कल्पना थी कि जो नागरिक यहां अल्पसंख्यक रहते हैं और जो पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हैं वो सम्मान के साथ जीवन जी पाएंगे।

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गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की चिंता का भी ख्याल रखा गया है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान देशों की सीमा भारत से सटी है। यहां के अल्पसंख्यक किसी भी समय भारत में आए हैं उन्हें नागरिकता देने का प्रावधान है। पूर्वोत्तर में अलग अलग प्रकार से हितों की चिंता भी की है। इस देश के मुस्लिम नागरिक थे, हैं और रहेंगे और उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस बिल में जो प्रावधान हैं उसके मुताबिक जो लाखों, करो़ड़ों लोग यातना का जीवन जी रहे हैं उनके लिए उम्मीद की किरण है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश औ पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा नहीं हुई। इन देशों में अल्पसंख्यकों में कमी आई है। वे अपने ही देश में प्रताड़ना झेल रहे हैं।

पाक की भाषा बोल रहे कुछ विपक्षी नेता: पीएम मोदी

संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल 12 बजे राज्यसभा में पेश होगा और आसानी से ये उच्च सदन में पास होगा। राज्यसभा में नागरिकता बिल पेश होने से पहले बुधवार को बीजेपी की संसदीय दल की बैठक हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी संसदीय दल की बैठक में कहा कि कुछ मुद्दों पर कुछ विपक्षी दल पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि जैसे पाकिस्तान बोलता है वैसा ही कुछ विपक्ष के नेता बोलते हैं। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि सरकार की 6 महीने की उपलब्धियों को जनता के बीच में जाना चाहिए। 2 महीने तक उनके बीच रहें। पीएम मोदी ने कर्नाटक जीत के लिए संगठन और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुशासन की बात करते हुए कहा कि मैं अनुशासन का बड़ा ध्यान रखता हूं। संसदीय दल की बैठक में दो बार नहीं आ पाया, क्योंकि झारखंड जाना था।

बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी

शिवसेना पर सस्पेंस

उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना के रुख पर सस्पेंस बरकार है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल को लेकर पार्टी को राज्यसभा में क्या करना है इसपर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बहस के दौरान हम देखेंगे कि किस तरीके के मुद्दे सामने आ रहे हैं, उसके आधार पर हम निर्णय लेंगे कि बिल पर क्या करना है।

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राज्यसभा में सरकार का आंकड़ा

नागरिकता संशोधन बिल पर लोकसभा में जिन दलों ने समर्थन दिया है उसके मुताबिक राज्यसभा में आंकड़ों को देखें तो बीजेपी के 83, जेडीयू के 6, बीजेडी के 7, एआईएडीएमके के 11, एसएडी के 3, आरपीआई के 1, एलजेपी के 1, वाईएसआर कांग्रेस के 2, टीडीपी के 2, एजीपी के 1, बीपीएफ के 1, एनपीएफ के 1, एसडीएफ के 1, नॉमिनेटेड 3 सदस्य, निर्दलीय एवं अन्य 4 सदस्यों के साथ सभी 127 सांसद हैं बिल के पक्ष में वोट कर सकते हैं। राज्यसभा में नागरिक संशोधन बिल पास कराने के लिए मोदी सरकार को जितने वोट की जरूरत है उससे काफी ज्यादा संख्या में सांसद उनके पक्ष में वोट कर सकते हैं।

विपक्ष के सांसदों की संख्या

नागरिकता संशोधन बिल क पर विपक्ष का जिस तरह से रुख है। इसके बावजूद विपक्ष राज्यसभा में इस विधेयक को रोकने में बहुत मजबूत स्थिति में दिख नहीं रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस के 46, टीएमसी के 13, एनसीपी के 4, सपा के 9, आप के 3, बसपा के 4, सीपीआई के 1, सीपीएम के 5, डीएमके के 5, आईयूएमएल के 1, पीडीपी के 2, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस एम के 1, एमडीएमके के 1, पीएमके के 1, आरजेडी के 4, शिवसेना के 3, टीआरएस के 6, 1 नॉमिनेटेड सदस्य और 2 निर्दलीय सांसद हैं। इस तरह विपक्ष के पास 113 सांसद हैं। हालांकि शविसेना पर सस्पेंस है।

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क्या है नागरिकता संशोधन बिल

नागरिकता संशोधन विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है।