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अब दुश्मनों के दांत खट्टे करने की तैयारी, सेना ने एलएसी पर जवानों को दी बड़ी छूट

लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। सरकार की ओर से...

Ashiki
Published on: 21 Jun 2020 3:24 AM GMT
अब दुश्मनों के दांत खट्टे करने की तैयारी, सेना ने एलएसी पर जवानों को दी बड़ी छूट
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। सरकार की ओर से पूरी तरह छूट मिलने के बाद सेना की ओर से युद्ध के नियम (रूल आफ इंगेजमेंट) में एक बड़ा बदलाव किया गया है। इस बदलाव के बाद अब एलएसी पर तैनात सभी कमांडरों को हालात को संभालने के लिए सामरिक स्तर पर कोई भी कार्रवाई करने की पूरी छूट दे दी गई है। गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ झड़प में कर्नल सहित 20 सैन्य कर्मियों की शहादत के बाद सेना की ओर से यह बड़ा कदम उठाया गया है।

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चीन को जवाब देने में सक्षम होंगे सैन्यकर्मी

सरकार से जुड़े दो वरिष्ठ अफसरों में एलओसी पर सेना की ओर से उठाए गए इस बड़े कदम के बारे में जानकारी दी। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने कहा कि इस कदम को उठाने के बाद अप्रत्याशित स्थितियों में भारतीय सैन्य कर्मी चीन को जवाब देने में पूरी तरह सक्षम होंगे। एक अधिकारी ने कहा कि अब इस छूट के बाद एलएसी पर तैनात भारतीय सेना के कमांडर हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के नियम से नहीं बंधे होंगे। किसी भी मुश्किल घड़ी में विपक्षी सेना के साथ निपटने में वे अपने सैन्य कर्मियों की ताकत का पूरा इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे।

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पीएम मोदी ने भी किया था इशारा

शुक्रवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को यह जानकारी दी थी कि एलओसी पर तैनात सेनाओं को यथोचित कार्रवाई करने के लिए सरकार की ओर से पूरी छूट दे दी गई है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा था कि सीमाओं की रक्षा करने के लिए हमारी सेना में पूरी तरह डटी हुई है और हमारी सेनाएं अपने खिलाफ की जाने वाली हर कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि हमने कूटनीतिक माध्यमों से चीन तक दो टूक अंदाज में अपनी बात पहुंचा दी है मगर इसके साथ ही सेना को भी अपने स्तर पर कदम उठाने की पूरी छूट दी गई है। एलएसी पर चीनी सेना की ओर से की गई धोखेबाजी से पूरे देश के लोगों में गुस्सा और नाराजगी है। विपक्षी नेताओं ने भी इस मुश्किल घड़ी में पूरे देश के लोगों के सेनाओं के साथ खड़े होने की बात दोहराई थी।

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समझौते से बंधे थे भारतीय सेना के हाथ

लद्दाख की गलवान घाटी में पिछले दिनों 20 भारतीय सैन्य कर्मियों की शहादत के बाद देश की सियासत भी गरमा की गई थी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय सैनिकों के निहत्थे होने का मुद्दा उठाया था। दरअसल भारतीय सैनिकों ने हथियार होने के बावजूद भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय समझौतों में बंधे होने के कारण उनका इस्तेमाल नहीं किया था।

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राहुल गांधी की ओर से यह मुद्दा उठाए जाने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर की ओर से भी स्पष्ट किया गया था कि भारतीय सैनिक निहत्थे नहीं थे। उन्होंने 1996 और 2005 के द्विपक्षीय समझौतों से बंधा होने का कारण हथियारों का उपयोग करने से परहेज किया। 1996 में हुए समझौते में कहा गया है कि कोई भी पक्ष दूसरे पक्ष के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि कोई भी पक्ष भारत और चीन के सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता को खतरे में डालने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि में शामिल नहीं होगा।

दोनों पक्षों के बीच होता रहा है टकराव

भारत और चीन के बीच 15 जून की रात को हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैन्य कर्मी शहीद हो गए थे। दोनों पक्षों के बीच हुई झड़प में 43 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर है। वैसे चीन ने अभी तक आधिकारिक रूप से यह बात नहीं स्वीकार की है। गलवान घाटी में हुई झड़प को नाथू ला में 1967 में हुई झड़प के बाद सबसे बड़ा संघर्ष बताया जा रहा है। नाथू ला में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष में चीन के 300 सैनिक मारे गए थे जबकि भारतीय सेना के भी करीब 80 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद 1975 में अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में चीनी सैनिकों के घात लगाकर किए गए हमले में चार भारतीय जवान शहीद हुए थे।

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बातचीत में विवाद का अंत नहीं

इस बीच पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच विवाद को खत्म करने के लिए कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। दोनों पक्षों की सेनाएं अभी भी मोर्चे पर डटी हुई हैं। दोनों पक्षों के सैन्य कमांडरों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है मगर अभी तक विवाद जस का तस बना हुआ है।

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