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हार्दिक-कांग्रेस की यारी: सामने आई ये बड़ी वजह, इसलिए दी गई ये जिम्मेदारी

कांग्रेस ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को अब बड़ी जिम्मेदारी दे दी है। पार्टी ने हार्दिक पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है।

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ShreyaBy Shreya

Published on 15 July 2020 9:07 AM GMT

हार्दिक-कांग्रेस की यारी: सामने आई ये बड़ी वजह, इसलिए दी गई ये जिम्मेदारी
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नई दिल्ली: कांग्रेस ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को अब बड़ी जिम्मेदारी दे दी है। पार्टी ने हार्दिक पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव से एन पहले हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हुए थे। वह बीते काफी समय से कांग्रेस में सक्रिय भी चल रहे हैं।

कांग्रेस ने अचानक क्यों दी ये बड़ी जिम्मेदारी?

बता दें कि हार्दिक पटेल के खिलाफ कई केस भी चल रहे हैं, बावजूद इसके कांग्रेस ने उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया। कांग्रेस ने अहमद पटेल और बेनी प्रसाद वर्मा जैसे कद्दावर नेताओं को दरकिनार करते हुए हार्दिक पटेल को बड़ी जिम्मेदारी दे दी। जिसके बाद अब सवाल ये उठता है कि आखिर अचानक कांग्रेस ने हार्दिक पटेल को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों दे दी? जबकि बेनी प्रसाद वर्मा अवध क्षेत्र में सबसे कद्दावर कुर्मी नेता हैं।

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कुर्मी वोट बैंक साधने की कोशिश में है कांग्रेस

पार्टी के इस कदम से साफ जाहिर है कि कांग्रेस ने गुजरात में पार्टी को मजबूत करने के लिए हार्दिक पटेल पर दांव खेला है। कांग्रेस ने हार्दिक पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। जो सीधे तौर पर कुर्मी वोट बैंक को हासिल करने की कोशिश है। बता दें कि कुछ ऐसा ही दांव कांग्रेस आठ सल पहले भी खेल चुकी है।

आठ साल पहले भी हुआ था कुछ ऐसा

साल 2012 में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। उस दौरान राहुल गांधी चुनाव अभियान के लिए उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे। तब यूपी की सत्ता मायावती के हाथों में थी। कांग्रेस उत्तर प्रदेश के माध्यम से केंद्र की सत्ता वापस पाने के उद्देश्य से ताबड़तोड़ रैलियां करने में जुटी हुई थी।

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मध्य यूपी में एक चुनावी सभा से पहले राहुल गांधी ने अपना काफिला रोका और बेनी प्रसाद वर्मा के बारे में जानना चाहा कि वो कहां हैं? उस दौरान बेनी प्रसाद ने कहा था कि राहुल जी ने मेरे लिए रास्ते में इंतजार किया था और मेरे पहुंचने के बाद ही उन्होंने काफिला आगे बढ़ाया। बता दें कि 27 मार्च 2020 को बेनी प्रसाद वर्मा का निधन हो चुका है।

लोकसभा के पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे बेनी प्रसाद

बेनी प्रसाद वर्मा भी 2009 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए। जिससे पार्टी को उन क्षेत्रों में जीत मिली, जहां पर उन्होंने कुर्मी समुदाय को प्रभावित किया था। वर्मा के बदौलत कांग्रेस ने यूपी की गोंडा, बाराबंकी, बहराइच, श्रावस्ती, फैजाबाद और खीरी में जीत हासिल की थी। यह कांग्रेस की पहली कोशिश रही, जब पिछड़े, विशेष रूप से कुर्मी राजनीति पर फोकस किया गया।

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कांग्रेस के पास बेनी प्रसाद वर्मा और अमर सिंह के दबदबे के साथ सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने का मौका था। बता दें कि उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव के बाद कुर्मी संख्यात्मक तौर पर सबसे बड़ी भूमि-स्वामित्व वाली पिछड़ी जाति समूह है।

कांग्रेस पार्टी आजादी के बाद पहले चार दशकों तक पश्चिम, उत्तर और मध्य भारत में सबसे अधिक हाशिए के समुदायों के बीच एक साथ गठबंधन करने में कामयाब रही। इस प्रकिया में पार्टी सबसे ज्यादा पिछड़े समुदायों पर निर्भर थी, इनमें कुर्मी भी शामिल थे।

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हार्दिक को नियुक्त किया कार्यकारी अध्यक्ष

कांग्रेस ने गुजरात में भी युवा पाटीदार प्रतिनिधि परेश दानानी को साल 2017 का चुनाव लड़ाने के बाद विधानसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर नामित किया था और अब हार्दिक पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। जो सीधे तौर पर कुर्मी वोट बैंक को हासिल करने की कोशिश है।

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरा थे हार्दिक पटेल

आपको बता दें कि हार्दिक पटेल पाटीदार आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरा थे। अब हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल होने के बाद बीजेपी के खिलाफ और तीखे तेवर अपना हुए हैं। लोकसभा चुनान के प्रचार के दौरान मार्च 2019 में गांधीनगर जिले की एक रैली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हुए थे।

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सिर्फ 16 महीने में हार्दिक को मिली इतनी बड़ी जिम्मेदारी

2019 के लोकसभा चुनाव से एन पहले हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हुए थे। हार्दिक पटेल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जामनगर सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन 2015 में गुजरात में हुई हिंसा में वह दोषी पाए गए थे। इस मामले में वह हाईकोर्ट में भी अपील की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली और वह चुनाव नहीं लड़ पाए। गुजरात सरकार की तरफ से कहा गया था कि हार्दिक पटेल का आपराधिक इतिहास रहा है। उनके खिलाफ 17 एफआईआर और दो देशद्रोह केस दर्ज हैं।

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