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सबसे सनकी तानाशाह: जो करता था भारतीयों से नफरत, खाता था इंसानी गोश्त

आपने हिटलर जैसे कई तानाशाहों के बारे में सुना और पढ़ा होगा, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे तानाशाह के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी क्रूरता के आगे अच्छे से अच्छे तानाशाह भी फेल हैं।

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ShreyaBy Shreya

Published on 5 July 2020 11:45 AM GMT

सबसे सनकी तानाशाह: जो करता था भारतीयों से नफरत, खाता था इंसानी गोश्त
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लखनऊ: दुनियाभर में ऐसे कई तानाशाह हुए, जो अपनी क्रूरता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। आपने हिटलर जैसे कई तानाशाहों के बारे में सुना और पढ़ा होगा, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे तानाशाह के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी क्रूरता के आगे अच्छे से अच्छे तानाशाह भी फेल हैं। हम बात कर रहे हैं, युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन की। उसे इंसानियत का दुश्मन, हैवान, राक्षस जैसे ना जाने कितने नामों से पुकारा जाता था।

लाखों लोगों की हुई थी हत्या, हजारों लोग निकले देश से बाहर

कहा जाता है कि युगांडा पर करीब आठ साल की तानाशाही में उसने लाखों लोगों को मरवा दिया था। केवल यही नहीं, बल्कि ईदी अमीन वो भारतीयों से नफरत करता था। इतनी नफरत की उसने अपने तानाशाही में भारतीय मूल के करीब 90 हजार लोगों को देश से निकाल दिया था।

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ऐसा रहा मामूली सैनिक से देश के शासक तक का सफर

साल 1925 में कोबोको में जन्मे ईदी ने 1946 में ‘किंग्स अफ़्रीकी राइफल्स ‘ में सहायक रसोइये के रूप में इंट्री ली। वहीं उसके कद और ताकतवर शरीर के चलते उसका रुतबा भी काफी बढ़ चुका था। 6 फीट 4 इंच लंबे और लगभग डेढ़ सौ किलो वजन वाले ईदी साल 1971 में सैन्य तख्तापलट के दौरान रसोइये से मेजर जनरल बना चुका था। ईदी ने मामूली सैनिक से देश के शासक तक का सफर बहुत ही खूंखार तरीके से तय किया।

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एशियाई लोगों से करता था बेहद नफरत

ईदी अमीन एशियाई लोगों से नफरत करता था। दरअसल, ईदी का मानना था कि उन्हीं की वजह से मूल अफ्रीकन लोग पिछड़े रह गए हैं। शासक बनने के बाद उसने कहा कि सपने में उसे भगवान ने एशियाई लोगों को देश से बाहर भेजने को कहा है। जिसके बाद साल 1972 में अमीन ने लोगों को 3 महीने का नोटिस दिया और लोगों को देश छोड़ने को कहा। इसके बाद युगांडा में सालों से बसे लोगों को अपना घर और देश छोड़कर भागना पड़ा।

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एशियाई लोगों को दूसरे देशों में लेनी पड़ी थी शरण

तानाशाही की इस क्रूरता के चलते कईयों एशियाई लोगों ने खुदकुशी तक कर ली थी। लोगों को अपना घर और कारोबार छोड़कर रातोंरात ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में शरण लेनी पड़ी। केवल इतना ही नहीं क्रूरता की हद तो तब हो गई जब ईदी ने लोगों को अपने साथ अधिकतम दो सूटकेस और केवल 50 पाउंड ले जाने की इजाजत थी। जिसके बाद लोगों को अपना घर-संपत्ति तोहफे में देने पड़े। हालांकि ईदी के इस कदम की वजह से युगांड़ा की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई, क्योंकि वहां पर भारतीय लोग ही बिजनेस मूल में थे।

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उसके शासनकाल में मारे गए पांच लाख से अधिक लोग

वहीं ईदी के बारे में एक और बात कही जाती है कि उसकी तानाशाही में देशभर में पांच लाख से अधिक लोगों को मार डाला गया। उसको जर्मनी, लीबिया और सोवियत संघ का समर्थन हासिल था। लेकिन अपने ही देश में तंजानिया के खिलाफ लड़ाई ईदी अमीन को भारी पड़ गई। जिसके कारण उसे देश छोड़कर भागना पड़ा। जिसके बाद पहले तो लीबिया, फिर सऊदी अरब ने उसे शरण दी। साल 2003 में सऊदी में ही ईदी की मौत हो गई थी।

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इस किताब में ईदी की दरिंदगी का है जिक्र

ईदी अमीन के शासन काल में स्वास्थ्य मंत्री रहे हेनरी केयेंबा ने एक किताब लिखी थी 'अ स्टेट ऑफ ब्लड: द इनसाइड स्टोरी ऑफ ईदी अमीन'। इस किताब में उन्होंने अमीन की दरिंदगी बयां की है। इस किताब में उन्होंने लिखा है कि कई बार राष्ट्रपति और दूसरे लोगों के सामने अमीन ने शेखी बघारी थी कि उसने इंसानों का मांस खाया है। इस तानाशाह के बारे में यह भी कहानियां प्रचलित हैं कि वो इंसानों का खून पीता था, आदमखोर था।

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छह महिलाओं से की थी शादी

कहा जाता है कि ईदी अमीन ने कम से कम छह महिलाओं से शादी की थी। जिसमें से उसने तीन को बाद में तलाक दे दिया था। अमीन के कितने बच्चे थे, इस बारे में कुछ सटीक जानकारी तो नहीं है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि उसके 30 से 45 बच्चे थे।

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