migrant laborers

मजदूरों की मौत से गुजरात में मातम सा माहौल है। इस हादसे पर पीएम मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि इस दुख की घड़ी में वो परिवार के साथ खड़े हैं। इस बारे में उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'सूरत में एक ट्रक हादसा बहुत दुखद है।

प्राकृतिक तौर पर सूखा हर साल पड़ने के कारण बुंदेलखंड में पलायन दर देश के दूसरे हिस्सों से काफी ज्यादा है। यहां से हर साल लाखों गांव वाले बड़े शहरों में कमाने के लिए चले जाते हैं।

कोरोना काल मे प्रवासी मजदूरों की मदद कर फ़िल्म अभिनेता सोनू सूद पूरे देश में छा गए। सोनू सूद ने अपने खर्चे पर प्रवासी मजदूरों को बसों से उनके घर भेजवाया। सोशल मीडिया से लेकर राजनीति गलियारे में सोनू सूद की चर्चा होती रही।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रवासी मजदूरों के मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सभी मजदरों का रिजेस्ट्रेशन कराया जाए और 15 दिनों के अंदर उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाया जाए।

पुलिस मुख्यालय ने अपने इस पत्र में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि बाहर से बड़ी संख्या में आए प्रवासी मजदूर आर्थिक संकटों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में वह परेशान और तनाव ग्रस्त भी हैं, जिसे देखते हुए विधि व्यवस्था को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।

सरकार ने  कोरोना से बचाव के लिए कई कदम उठाए है। लेकिन लॉकडाउन 4 में हम चल रहे है और स्थिति अब बेकाबू हो गई है।  इस महामारी में मरीजों के साथ मजदूरों को भी हालत बहुत खराब हो गई है। प्रशासन मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

बरेली में आज प्रवासियों से भरी बस में एक महिला ने जुड़वा बच्चों  को जन्म दिया लेकिन दोनों बच्चों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक बंगाल की रहने वाली महिला फातिमा ने आज दो बच्चों को बस में जन्म दिया था।

जेडीयू पार्टी के विधायक क्वारंटीन सेंटर में प्रवासी मजदूरों का हाल जानने पहुंचे थे लेकिन जब मजदूरों ने उनसे रोजगार को लेकर सवाल पूछ लिया तो विधायक नाराज हो गए और अपशब्द बोलने लगे।

जो भी रोड पर चल रहे श्रमिकों से सभी को मेरी यही अपील है कि जो जहा है वही रहे है और सभी थानों को हमारा निर्देश है हमारे जिला प्रशासन का निर्देश है कि उनके आसपास के जो हमने सेल्टर होम निश्चित किये है वो वही रहें। इसके अलावा जो हमारे और भी शेल्टर होम है जहां पर अगर कोई आदमी चलता हुआ पाया जाता है तो हम उनको वहां पर रोक लेते हैं

ताजा मामला यूपी के कानपुर का है। कानपुर रेलवे स्टेशन पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन के पहुँचते ही मजदूरों के बीच खाने के पैकेट्स को लेकर मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान कई मजदूरों को चोटें भी आई। लॉकडाउन के नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं हुआ।