parenting tips

जब उन्हें मारेगें या डांटेगी तो अगली बार से वह अपनी बात या गलती को ईमानदारी के साथ शेयर नही करेगें। अगर उनसे गलती हो जाती है तो उनके मन में जो भी है उन्हें वह बेझिझक बोलने दें। उनके अंदर के मासूम बच्चे को कभी भी मरने न दें।

यह ट्रेनिंग 1 साल से अधिक उम्र के बच्चों को देना जरूरी है ताकि वे धीरे-धीरे इसे अपनी आदत बना ले।  कुछ ऐसे टिप्स जिनकी मदद से अपने बच्चों को खुद टॉयलेट का इस्‍तेमाल करना सिखाएंगे।

आस पड़ोस और इमरजेंसी नंबर की जानकारी उन्हें पहले ही दे दें। उन्हें वो नंबर याद करा दें या फिर फ्रिज या किसी कमरे के दरवाजे पर पेपर पर लिखकर लगा दें। उन्हें समझाएं कि अकेले रहने पर उन्हें स्थिति को कैसे संभालना है।

बच्चे में किस वजह से विकास संबंधी विकार (इसमें अटेंशन डेफिसिट- हाइपर एक्टिविटी डिस्ऑर्डर, अपोजीशनल डिफायंट डिस्ऑर्डर या व्यवहार संबंधी विकार शामिल है) आ रहे हैं, जिससे समय पर उचित ढंग से इसे ठीक किया जा सके।

बच्‍चों को एक जरूरी बात जरूर सिखाएं, कि जो व्‍यक्ति आपको इज्‍जत व सम्‍मान देता हो आप भी उसे इज्‍जत व सम्‍मान दें। जिंदगीं में वो काम करें, जिसमें आपको खुशी मिले क्‍योंकि खुशी से बढ़कर कुछ नहीं है। 

अगर गोद लिए हुए बच्चे को इस बात का लगातार एहसास कराते हैं कि वह परिवार के अन्य सदस्यों से अलग दिखता है तो यह गलत बात है। बच्चा इसके प्रति संवेदनशील हो सकता है।

जयपुर: हर घर में बड़ों का होना जरूरी हैं क्योंकि वे हमारे घर की छत नींव की मजबूती होते हैं जो जीवन में आने वाली परेशानियों से बचाव करते हैं।घर के बड़ों की सीख हमारे सुखमय जीवन के लिए बेहद फायदेमंद हैं।  जो हमें अपने घर के बड़ों से जरूर सीखनी चाहिए और ये सीख …

जयपुर:सही या गलत बातें बच्चे अपने माता-पिता से सीखते हैं। कई बार अनुशासन सीखाने के लिए डांट का भी सहारा लेते हैं। बड़ी-बड़ी बातें करते हैं ताकि बच्चे अच्छी आदतें अपनाएं,  लेकिन जाने-अनजानें हम कई बार उन्हें बिना कुछ बताए गलत चीजों की सीख भी देते हैं।  बच्चों के सामने अपने खुद के आचरण का …

जयपुर:आज  इंसान अपनी जरूरतों को पूरी करने के चक्कर में अपने परिवार को समय नहीं दे पाता है जिसका उनके रिश्तों पर गहरा असर पड़ता हैं। खासकर बच्चों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता हैं। पैरेंट्स अपने बच्चों के लिए ही सबकुछ कर रहें हैं लेकिन  समय के बिना बच्चे खुद को अकेला महसूस करने …