parenting tips

हाइपर ऐक्टिव यानी अत्यधिक सक्रिय बच्चों का घर में होना किसी छोटे तूफ़ान से निपटने से कम नहीं होता, क्योंकि वे काफ़ी चुलबुले होते हैं। उनका दिमाग़ स्थिर नहीं होता और न ही वे एक जगह पर कुछ मिनट से ज़्यादा नहीं टिक पाते हैं। ऐसे में माँ बहुत परेशान हो जाती है

कुछ बच्चे बचपन से ही मस्त व सबसे घुलने मिलने वाले होते है तो कुछ बच्चा किसी से भी मिलने पर हिचकिचाता है, उसे अकेले रहना अच्छा लगता है और पैरेंट्स को भी लगता है कि बच्चा, बड़े होने पर समझ जाएगा, लेकिन समय बदलने के साथ ही बच्चे पर उसके भावी जीवन के बारे में तय करने और एक ऊंचाई छूने के लिए दौड़-भाग का दवाब बनने लगता है।

जब उन्हें मारेगें या डांटेगी तो अगली बार से वह अपनी बात या गलती को ईमानदारी के साथ शेयर नही करेगें। अगर उनसे गलती हो जाती है तो उनके मन में जो भी है उन्हें वह बेझिझक बोलने दें। उनके अंदर के मासूम बच्चे को कभी भी मरने न दें।

यह ट्रेनिंग 1 साल से अधिक उम्र के बच्चों को देना जरूरी है ताकि वे धीरे-धीरे इसे अपनी आदत बना ले।  कुछ ऐसे टिप्स जिनकी मदद से अपने बच्चों को खुद टॉयलेट का इस्‍तेमाल करना सिखाएंगे।

आस पड़ोस और इमरजेंसी नंबर की जानकारी उन्हें पहले ही दे दें। उन्हें वो नंबर याद करा दें या फिर फ्रिज या किसी कमरे के दरवाजे पर पेपर पर लिखकर लगा दें। उन्हें समझाएं कि अकेले रहने पर उन्हें स्थिति को कैसे संभालना है।

बच्चे में किस वजह से विकास संबंधी विकार (इसमें अटेंशन डेफिसिट- हाइपर एक्टिविटी डिस्ऑर्डर, अपोजीशनल डिफायंट डिस्ऑर्डर या व्यवहार संबंधी विकार शामिल है) आ रहे हैं, जिससे समय पर उचित ढंग से इसे ठीक किया जा सके।

बच्‍चों को एक जरूरी बात जरूर सिखाएं, कि जो व्‍यक्ति आपको इज्‍जत व सम्‍मान देता हो आप भी उसे इज्‍जत व सम्‍मान दें। जिंदगीं में वो काम करें, जिसमें आपको खुशी मिले क्‍योंकि खुशी से बढ़कर कुछ नहीं है। 

अगर गोद लिए हुए बच्चे को इस बात का लगातार एहसास कराते हैं कि वह परिवार के अन्य सदस्यों से अलग दिखता है तो यह गलत बात है। बच्चा इसके प्रति संवेदनशील हो सकता है।

जयपुर: हर घर में बड़ों का होना जरूरी हैं क्योंकि वे हमारे घर की छत नींव की मजबूती होते हैं जो जीवन में आने वाली परेशानियों से बचाव करते हैं।घर के बड़ों की सीख हमारे सुखमय जीवन के लिए बेहद फायदेमंद हैं।  जो हमें अपने घर के बड़ों से जरूर सीखनी चाहिए और ये सीख …

जयपुर:सही या गलत बातें बच्चे अपने माता-पिता से सीखते हैं। कई बार अनुशासन सीखाने के लिए डांट का भी सहारा लेते हैं। बड़ी-बड़ी बातें करते हैं ताकि बच्चे अच्छी आदतें अपनाएं,  लेकिन जाने-अनजानें हम कई बार उन्हें बिना कुछ बताए गलत चीजों की सीख भी देते हैं।  बच्चों के सामने अपने खुद के आचरण का …