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अश्वेत की मौत पर जल उठा अमेरिका

अमेरिका के कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जगह जगह पुलिस के साथ संघर्ष, आगजनी और लूटपाट की वारदातें हुईं हैं। लोग पुलिस की बर्बरता के खिलाफ अपना गुस्सा हिंसा के जरिये जता रहे हैं।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 1 Jun 2020 2:52 PM GMT

अश्वेत की मौत पर जल उठा अमेरिका
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लखनऊ। अमेरिका में 46 वर्षीय अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद कई शहरों में हिंसा भड़की हुई है और प्रदर्शनकारी तोड़फोड़ और आगजनी पर उतारू हैं। यहाँ तक कि बवाल व्हाइट हाउस के बाहर तक पहुँच गया जहां पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

अमेरिका के कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जगह जगह पुलिस के साथ संघर्ष, आगजनी और लूटपाट की वारदातें हुईं हैं। लोग पुलिस की बर्बरता के खिलाफ अपना गुस्सा हिंसा के जरिये जता रहे हैं। मिनेसोटा के मिनेपोलिस और सेंट पॉल शहर में कई हजार लोग इकट्ठा हुए और मौत के विरोध में मार्च निकाला। न्यूयॉर्क और मियामी में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। बराक ओबामा से लेकर अन्य बड़े बड़े नेताओं ने चिंता जाहिर करते हुये कालों के लिए एक नए अमेरिका के निर्माण का आह्वान किया है।

नस्लभेद का आरोप

बीते सालों में अमेरिका में कई काले लोगों की पुलिस हिरासत में मौत हुई है। इसे लेकर पुलिस अधिकारियों पर नस्लभेदी रवैया रखने के भी आरोप लगते हैं। दरअसल अमेरिका में सैकड़ों सालों से नस्लवाद पर बहस जारी है। गोरे-काले का भेद आज तक खत्म नहीं हो पाया है। ताजा मामला ऐसे समय में हुआ है जब देश ऐसी महामारी से परेशान है जिसमें अश्वेत लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुये हैं।

लगातार आफत

इस घटना के बाद देश भर में प्रदर्शन का निशाना पुलिस रही है। लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि वर्ष 2020 अश्वेतों के लिए काफी खराब रहा है। कोरोना वायरस से काले और लैटिन अमेरिकन लोग कहीं ज्यादा प्रभावित हुये हैं।

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बीमार होने और मरने वालों में इनकी तादाद गोरों की तुलना में काफी ज्यादा है। महामारी के कारण हुये लॉकडाउन से नौकरियाँ जाने का भी सबसे बड़ा असर कालों और अन्य अश्वेत लोगों पर पड़ा है। इन हालातों के बीच कालों के साथ गोरे लोगों और पुलिसिया हिंसा की कई घटनाएँ हुईं। ब्रेओन्ना टेलर, अहमौद आरबेरी और अब जॉर्ज फ्लॉयड की मौत ऐसी ही हिंसा में हुईं हैं।

पहले भी ऐसा हो चुका है

जॉर्ज फ्लॉयड और अन्य अश्वेतों की हिंसा में मौत और उसके बाद विरोध प्रदर्शन की हिंसा अमेरिका के लिए कोई नई बात नहीं है। हाल के वर्षों में तमाम अन्य कालों की मौत के बात बवाल हो चुका है। रोज़मर्रा के जीवन में भी काले लोगों के साथ आक्रामक रवैये की घटनाएँ आम हैं।

घरेलू आतंकवाद

ट्रंप प्रशासन ने पिछले एक हफ्ते से जारी हिंसा करने वालों को घरेलू आतंकवादी करार दिया है। ट्रंप ने हिंसा के लिए वामपंथियों पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अंतिफा नाम के संगठन को आतंकी गुट करार देने पर विचार किया जा रहा है।

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एटॉर्नी जनरल बिल बार के मुताबिक, हिंसा को भड़काने का काम अंतिफा और अन्य समान समूहों द्वारा किया जा रहा है और उनके साथ इसी के मुताबिक बर्ताव किया जाएगा।ट्रम्प ने ट्वीट किया था कि जब लूटपाट शुरू हुई तो पुलिस ने भी शूटिंग शुरू कर दी। ट्रम्प के इस ट्वीट की काफी आलोचना हो रही है।

क्या हुआ था

मिनेसोटा के मिनेपोलिस शहर में एक रेस्तरां में बतौर सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले जॉर्ज फ्लॉयड को 25 मई को पुलिसकर्मियों ने हथकड़ी पहनाकर जमीन पर लिटा दिया था। पांच मिनट तक पुलिस अधिकारी ने अपने घुटने से उनके गले को दबाकर रखा और इस दौरान फ्लॉयड रहम की गुहार लगाते रहे।

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इस घटना का वीडियो पास ही खड़े किसी शख्स ने बनाया। बाद में अस्पताल ले जाने के बाद फ्लॉयड को मृत घोषित कर दिया गया। इसी के बाद देश के अलग-अलग शहरों में हिंसा और लूटपाट की घटनाएँ भड़क उठीं। वॉशिंगटन, लॉस एंजेलिस और ह्यूस्टन में रात का कर्फ्यू लगा दिया गया।

पुलिसवालों पर कार्रवाई

फ्लॉयड की मौत के बाद पुलिस द्वारा निहत्थे लोगों पर बल के अत्यधिक इस्तेमाल की आलोचना हो रही है। घुटने से दबाने वाले आरोपी अफसर डेरेक शोविन पर थर्ड डिग्री हत्या का आरोप लगा है। उनके साथ तीन और अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है लेकिन उन पर कोई आरोप नहीं लगा है। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज ने राज्य के सभी नेशनल गार्ड की तैनाती कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए की है।

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अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई और राज्य का प्रशासन हिरासत में हुई मौत की जांच कर रहे हैं। इस घटना ने 2014 में एरिक गार्नर के मामले की याद ताजा कर दी है। तब न्यूयॉर्क की पुलिस ने गार्नर को पकड़ रखा था और वह सांस ना ले पाने की शिकायत कर रहा था।

जॉर्ज फ्लॉयड पर आरोप

46 साल के जॉर्ज एक रेस्तरां में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते थे। हाल में कोरोना वाइरस के कारण बंदी से उनकी नौकरी चली गई थी। पुलिस का कहना है कि हिरासत में लिया गया शख्स एक राशन की दुकान पर हुई जालसाजी के मामले में संदिग्ध जैसा दिख रहा था और उसने गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की।

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ये वीडियो जमीन पर गिरे बिना शर्ट वाले शख्स की तस्वीर से शुरू होता है। इसके ठीक पहले क्या हुआ यह पता नहीं चल रहा। एक अधिकारी ने अपने घुटने से उसकी गर्दन को दबा रखा था। पुलिस अधिकारी ने तब तक अपना घुटना नहीं हटाया, जब तक कि स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे स्ट्रेचर पर नहीं चढ़ा दिया। इस दौरान बहुत सारे लोग वहां जमा हो गए और कुछ लोगों ने वीडियो भी बना लिया। मिनेसपोलिस राज्य में संदिग्ध के गर्दन को घुटने से दबाने की मंजूरी है। इसके लिए अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है लेकिन उसमें ध्यान रखना होता है कि वे कैसे दबाव बनाएं कि सांस बंद ना हो। पुलिस के हैंडबुक में इसे बिना जान लिए किसी को काबू में करने का तरीका माना गया है।

आंकड़ों की बात

अमेरिका की जनसंख्या करीब 32.82 करोड़ की है जिसमें 4 करोड़ 20 लाख काले लोग हैं।

72.4 फीसदी गोरे

12.6 फीसदी काले

4.8 फीसदी एशियन

0.9 फीसदी अमेरिकन इंडियन और अलास्का मूल के लोग

0.2 फीसदी हवाई तथा पेसिफिक के निवासी हैं।

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