Intermittent Fasting Ke Fayde: वेट लॉस के लिए क्यों फेमस हो रहा इंटरमिटेंट फास्टिंग, कैसे करते हैं और क्या-क्या हैं फायदे, जानें सारी डिटेल

Intermittent Fasting Kya Hai: इंटरमिटेंट फास्टिंग (IF) एक ईटिंग प्लान है, जो फास्टिंग और नियमित समय पर खाने के बीच स्विच करती है। आइए जानते हैं इसके फायदे और नुकसान के बारे में।;

Written By :  Shreya
Update:2025-02-27 07:40 IST

Intermittent Fasting (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

Intermittent Fasting Kya Hai In Hindi: दुनिया भर में एक समस्या तेजी से बढ़ रही है, वो है लोगों का ओवरवेट (Overweight) होना या फिर मोटापे (Obesity) का शिकार होना। ये दोनों ही स्थिति स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मानी जाती हैं। मोटापा कई बीमारियों के रिस्क फैक्टर्स में से एक है। यह न केवल बीपी और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है, बल्कि मोटापा शरीर में घर करने के बाद से आपके कई तरह के कैंसर का शिकार बनने का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाता है।

लेकिन मोटापा से होने वाले नुकसानों की लिस्ट यही पर खत्म नहीं होती है, बल्कि यह फैटी लीवर की वजह भी बन सकता है, स्लीप साइकिल को प्रभावित कर सकता है और आपको डिप्रेशन, डायबिटीज का भी शिकार बना सकता है। इतने सारे नुकसानों को जानने के बाद शायद ही कोई अपने वजन को नियंत्रित या कम करने की कोशिश नहीं करेगा। वैसे तो वजन घटाने के तमाम तरीके हैं, लेकिन आज के समय में इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) काफी ज्यादा पॉपुलर हो रही है। अब आखिर ये फास्टिंग है क्या और इसे फॉलो कैसे करते हैं, इसके फायदे क्या हैं, ये सब जानेंगे आज इस आर्टिकल में।

क्या होती है इंटरमिटेंट फास्टिंग (What Is Intermittent Fasting)?

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

Hopkins medicine के मुताबिक, इंटरमिटेंट फास्टिंग (IF) एक ईटिंग प्लान है, जो फास्टिंग और नियमित समय पर खाने के बीच स्विच करती है। सीधे भाषा में समझें तो इंटरमिटेंट फास्टिंग में आपको तय टाइम पीरियड में ही भोजन करना होता है और बाकी समय फास्टिंग करनी होती है। फास्टिंग का ये तरीका आपके वजन को घटाने के साथ ही शरीर को तमाम अन्य तरह के लाभ भी पहुंचाता है और कई बीमारियों के खतरे को कम करने का काम करता है। इसे कई तरीके से किया जा सकता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग के तरीके (Ways To Do Intermittent Fasting)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

इंटरमिटेंट फास्टिंग की खास बात ये है कि इसे लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से भी फॉलो कर सकते हैं। यानी वो अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से फास्टिंग का समय चुन सकते हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग के कुछ लोकप्रिय तरीकों में शामिल हैं:-

1- अल्टरनेट डे फास्टिंग

यह इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक पॉपुलर तरीका है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है। इस तरह के इंटरमिटेंट फास्टिंग में एक दिन सामान्य रूप से खाना खाया जाता है और अगले दिन या तो पूरी तरह उपवास रखा जाता है या फिर एक स्मॉल मील ली जा सकती है। लेकिन वो मील 500 कैलोरी से कम होनी चाहिए। इससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

2- 5:2 मैथेड

इस मैथेड में आपको हफ्ते के पांच दिनों तक सामान्य रूप से भोजन करना होता है और दो दिनों तक उपवास रखना होता है।

3- 16:8 मैथेड

इस तरह के मैथेड में 8 घंटे तक भोजन करें और अगले 16 घंटे तक फास्टिंग करें। इसके लिए 12 से 8 बजे, 11 से 7 बजे, या 1 से 9 बजे तक वाली टाइमिंग ईटिंग के लिए ट्राई कर सकते हैं। इसी दौरान आपको अपनी मील्स और स्नैक्स लेने होते हैं।

4- 14:10 मैथेड

इसके अलावा इंटरमिटेंट फास्टिंग का ये तरीका भी बेहद पॉपुलर है। इसमें 14 घंटे फास्ट करना होता है और 10 घंटे इटिंग के लिए होते हैं। इस मैथेड को बिगिनर्स के लिए बेहतर माना जाता है।

5- OMAD डाइट

सेलेब्स के बीच OMAD डाइट काफी लोकप्रिय हो चुकी है। इसे इंटरमिटेंट फास्टिंग का ही एक तरीका माना जाता है, लेकिन ये सबसे टफ फास्टिंग होती है, क्योंकि इसमें दिन में केवल एक ही बार खाना होता है। इसलिए इसका नाम OMAD है यानी One Meal A Day। इसे फॉलो करने वाला व्यक्ति एक दिन में बस एक ही बार बैलेंस्ड मील खाता है। जबकि अन्य 23 घंटे फास्टिंग करनी होती है।

क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग में उपवास के समय कुछ नहीं खाते?

इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि फास्टिंग टाइम पर यानी जब आप खाना नहीं खा रहे हों, तो पानी और जीरो-कैलोरी पेय जैसे ब्लैक कॉफी और चाय पीने की अनुमति होती है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे (Intermittent Fasting Health Benefits In Hindi)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

अब बात करते हैं कि आखिर इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) से आपको फायदे क्या-क्या मिल सकते हैं। शोध से पता चलता है कि हर दिन एक निश्चित घंटों तक उपवास करने या सप्ताह में एक-दो दिन सिर्फ एक बार भोजन करने से कई स्वास्थ्य लाभ (Intermittent Fasting Ke Fayde) हो सकते हैं। जैसे कि-

1- वजन घटाने में मददगार

इंटरमिटेंट फास्टिंग वेट लॉस करने के लिए एक बेहतरीन तरीका माना जाता है। यह शरीर में कई तरह के हॉर्मोन के बदलाव लाता है, जिससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और फैट बर्न करने में आसानी होती है।

2- गंभीर बीमारियों के खतरे को करता है कम

इंटरमिटेंट फास्टिंग को फॉलो करके आप खुद को कई तरह की बीमारियों से भी दूर रख सकते हैं। वैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान कई चीजें होती हैं जो ऑर्गन्स को टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज, एज से संबंधित न्यूरोडीजेनेरेटिव डिसऑर्डर्स, यहां तक ​​कि इंफ्लेमेटरी बॉयल डिजीज और कई कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों से बचा सकती हैं।

3- थिंकिंग और मेमोरी

अध्ययनों से पता चला है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग जानवरों में वर्किंग मेमोरी और वयस्क मनुष्यों में वर्बल मेमोरी को बढ़ाता है। साथ ही इससे दिमाग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है और आप अधिक फोकस रह पाते हैं।

4- हार्ट हेल्थ होती है बेहतर

वजन घटाने का ये तरीका आपके हार्ट को भी हेल्दी रखता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से ब्लड प्रेशर और रेस्टिंग हार्ट रेट्स के साथ-साथ हृदय संबंधी अन्य मापों में भी सुधार होता है।

5- अल्जाइमर के खतरे को करता है कम

कुछ शोध बताते हैं कि सूजन को कम करने और सूजन से जुड़ी स्थितियों में सुधार के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग अन्य डाइट की तुलना में अधिक फायदेमंद हो सकता है, जैसे कि:- अल्जाइमर रोग, गठिया, अस्थमा, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और स्ट्रोक।

इंटरमिटेंट फास्टिंग के क्या नुकसान हैं (Intermittent Fasting Side Effects In Hindi)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के कुछ तरह के दुष्प्रभाव (Intermittent Fasting Ke Nuskan) भी हो सकते हैं। जैसे कि-

1- डिहाइड्रेशन: उपवास के दौरान पेय पदार्थ का सेवन कम करने से आप डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं।

2- सिर दर्द: लंबे समय तक फास्टिंग के चलते सिर दर्द हो सकता है और यह शुरुआती एक या दो सप्ताह के दौरान आम हो सकता है।

3- पाचन संबंधी समस्याएं: भोजन की मात्रा कम करने से आपके पाचन पर निगेटिव असर पड़ सकता है और अपच, दस्त, मतली और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

4- मूड स्विंग्स: इंटरमिटेंट फास्टिंग के चलते आपका मूड प्रभावित हो सकता है। उपवास के दौरान ब्लड शुगर लेवल गिरने से शरीर के तनाव हार्मोन कोर्टिसोल बढ़ सकता है। साथ ही इस फास्टिंग से हैप्पी हार्मोन सेरोटोनिन का स्तर भी प्रभावित हो सकता है।

5- थकान: अल्टरनेट डे फास्टिंग या 5:2 मैथेड में 24 घंटे या उससे अधिक देर तक का उपवास रखना होता है। इससे लो ब्लड शुगर और कैलोरी की कमी के कारण थकान या चक्कर भी आ सकते हैं।

इस स्थिति में डॉक्टर से करें बात

Hopkins medicine की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस फास्टिंग का अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। अगर आपको इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के बाद असामान्य एंग्जायटी, सिर दर्द, मतली या अन्य लक्षण महसूस होने लगें तो अपने डॉक्टर से बात करें।

नोट- यह खबर सामान्य जानकारी के लिए और आपको जागरुक करने के लिए है। इसकी सत्यता, सटीकता या फिर असर की जिम्मेदारी न्यूजट्रैक नहीं लेता है।

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