Jammu-Kashmir: चुनाव की घोषणा से पहले ही गुपकार में फूट, नेशनल कांफ्रेंस के रुख से भाजपा को हो सकता है फायदा
Jammu-Kashmir: नेशनल कांफ्रेंस के रुख से साफ हो गया है कि चुनाव के दौरान क्षेत्रीय दलों में एकजुटता बन पाना काफी मुश्किल है।
Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही राज्य में मजबूत माने जाने वाला गुपकार गठबंधन बिखरता हुआ नजर आ रहा है। गुपकार गठबंधन में शामिल सभी दलों ने गत 22 अगस्त को बाहरी लोगों को मतदान का अधिकार देने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का फैसला लिया था। दो दिन बाद ही राज्य में सियासी नजरिए से मजबूत मानी जाने वाली पार्टी नेशनल कांफ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर की सभी 90 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का स्पष्ट संकेत दे दिया है। डॉक्टर फारूक अब्दुल्ला की अगुवाई वाले नेशनल कान्फ्रेंस के इस रुख के बाद गुपकार गठबंधन का टूटना तय माना जा रहा है।
सियासी जानकारों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रीय दलों के एकजुट होकर लड़ने पर भाजपा को मजबूत चुनौती मिल सकती थी मगर नेशनल कांफ्रेंस के रुख से साफ हो गया है कि चुनाव के दौरान क्षेत्रीय दलों में एकजुटता बन पाना काफी मुश्किल है। ऐसे में भाजपा को इसका बड़ा सियासी फायदा मिल सकता है।
सभी 90 सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी
गुपकार गठबंधन में नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के अलावा जम्मू-कश्मीर की कई पार्टियां शामिल है। इस गठबंधन को सियासी नजरिए से मजबूत माना जाता रहा है मगर नेशनल कांफ्रेंस ने विधानसभा चुनाव के दौरान अकेले चलने की रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है। नेशनल कांफ्रेंस की कश्मीर के प्रांतीय समिति ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें राज्य की सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने की बात कही गई है।
जिस बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया उसमें पार्टी के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पार्टी के महासचिव अली मोहम्मद सागर और अन्य प्रमुख नेता मौजूद थे। नेशनल कांफ्रेंस के इस रुख से साफ हो गया है कि वह राज्य के सभी विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गई है। नेशनल कांफ्रेंस की इस बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के पहचान की रक्षा के लिए लोगों का अधिक से अधिक मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने पर भी जोर दिया गया।
साथ लड़कर दिखाई दी ताकत
नेशनल कांफ्रेंस की ओर से लिए गए इस फैसले पर अभी गुपकार में शामिल अन्य दलों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जम्मू-कश्मीर में 2020 में हुए जिला विकास परिषदों के चुनाव में गुपकार गठबंधन में शामिल सभी दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। गठबंधन इस चुनाव में अपनी ताकत दिखाने में कामयाब रहा था और उसने 280 में से 110 सीटें जीती थी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी सबसे मजबूत बनकर उभरी थी और उसने 67 सीटों पर कब्जा किया था। गुपकार गठबंधन में राज्य की एक और ताकतवर पार्टी पीडीपी भी शामिल है। पीडीपी ने पिछले विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। हालांकि बाद में भाजपा ने महबूबा मुफ्ती की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
भाजपा को मिल सकता है बड़ा फायदा
भाजपा से गठबंधन टूटने और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के इस फैसले पर अभी महबूबा ने कोई बयान नहीं दिया है मगर इतना तय है कि विधानसभा चुनाव के दौरान महबूबा भी अपना दमखम दिखाने की पूरी कोशिश करेंगी। जम्मू-कश्मीर का क्षेत्रीय दलों में पैदा हुए इस टकराव का भाजपा को बड़ा सियासी फायदा मिल सकता है।
हाल में चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर में रहने वाले दूसरे राज्यों के लोगों को मतदान का अधिकार देने का बड़ा फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर में तैनात दूसरे राज्यों के सैन्य कर्मियों को भी मतदान का अधिकार हासिल होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि मतदाताओं की संख्या में करीब 25 लाख की बढ़ोतरी हो सकती हैं।
गुपकार गठबंधन ने आयोग के इस फैसले के खिलाफ अभी दो दिन पूर्व ही एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया था मगर अब गठबंधन खुद ही बिखरता हुआ दिख रहा है। ऐसे में भाजपा को बड़ा सियासी फायदा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।