Pakistani Submarine Ghazi History: कैसे डूबी गाजी, पाकिस्तान की सबसे बड़ी नौसैनिक विफलता का विश्लेषण

Pakistani Submarine Ghazi History: पीएनएस ग़ाज़ी का डूबना 1971 के भारत-पाक युद्ध की सबसे रहस्यमयी घटनाओं में से एक है। यह घटना आज भी एक बहस का विषय बनी हुई है।;

Update:2025-03-27 16:43 IST

Pakistani Submarine Ghazi History

Pakistani Submarine Ghazi History: 3 दिसंबर 1971, यह वह तारीख थी जब पाकिस्तान की सबसे घातक और उन्नत पनडुब्बी ग़ाज़ी भारतीय जलक्षेत्र में रहस्यमय परिस्थितियों में डूब गई। यह घटना भारत-पाकिस्तान युद्ध (1971) के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बन गई, जिसने दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच गहरी रणनीतिक टकराव को उजागर किया। पाकिस्तान का दावा था कि ग़ाज़ी अपने ही तकनीकी खराबी या एक आंतरिक विस्फोट के कारण नष्ट हुई, जबकि भारतीय नौसेना का कहना था कि आयएनएस राजपूत की सुनियोजित युद्धनीति और चतुराई भरी चालों ने इस दुर्जेय पनडुब्बी को तबाह कर दिया।

ग़ाज़ी को खासतौर पर भारत के लिए एक घातक चुनौती के रूप में भेजा गया था, जिसका मुख्य मिशन भारतीय नौसेना के गौरवशाली युद्धपोत आयएनएस विक्रांत(INS Vikrant)को निशाना बनाना था। लेकिन यह मिशन पूरी तरह नाकाम हो गया और ग़ाज़ी खुद गहरे समंदर में समा गई। सवाल यह उठता है। क्या यह एक दुर्घटना थी, या भारतीय नौसेना की एक शानदार रणनीतिक जीत? इस लेख में, हम ग़ाज़ी के डूबने के पीछे की सच्चाई, युद्धनीति, और इस ऐतिहासिक घटना के प्रभावों पर गहराई से प्रकाश डालेंगे।

पाकिस्तान की खतरनाक पनडुब्बी(Pakistan's dangerous submarine PNS Ghazi)

पीएनएस ग़ाज़ी (PNS Ghazi) पाकिस्तान की पहली और सबसे घातक पनडुब्बी थी, पीएनएस ग़ाज़ी मूल रूप से अमेरिकी नौसेना की टेंच-क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी थी, जिसे 1944 में यूएसएस डियाब्लो (USS Diablo) के रूप में लॉन्च किया गया था। इसे 1963 में पाकिस्तान को स्थानांतरित किया गया और "ग़ाज़ी" नाम दिया गया। यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि यह दक्षिण एशिया की पहली पनडुब्बी थी, जिसने पाकिस्तान को समुद्री युद्ध में भारत के मुकाबले एक रणनीतिक बढ़त दिलाने की कोशिश की।

ग़ाज़ी को विशेष रूप से भारत के विमानवाहक पोत आयएनएस विक्रांत को नष्ट करने के लिए 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय जलक्षेत्र में भेजा गया था। लेकिन इसके मिशन से पहले ही यह रहस्यमय तरीके से 3 दिसंबर 1971 को विशाखापत्तनम के तट के पास डूब गई। इसके डूबने की परिस्थितियां आज भी एक रहस्य बनी हुई हैं।

पीएनएस ग़ाज़ी का इतिहास और विशेषताएं(History & Characteristics Of PNS Ghazi)


पीएनएस ग़ाज़ी का सफर 1944 में अमेरिकी नौसेना से शुरू हुआ, जब इसे यूएसएस डियाब्लो (USS Diablo - SS-479) के रूप में शामिल किया गया था। यह एक टेंग-क्लास (Tench-class) पनडुब्बी थी, जिसे बाद में 1963 में अमेरिका ने पाकिस्तान को सौंप दिया, यह पाकिस्तान की पहली पनडुब्बी बनी और दक्षिण एशिया में अपनी तरह की पहली पनडुब्बी थी, जिससे यह सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गई।

तकनीकी रूप से, ग़ाज़ी की लंबाई 95 मीटर, चौड़ाई 8.3 मीटर, और गति 20 नॉट (लगभग 37 किमी/घंटा) थी। यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम पर संचालित होती थी और आधुनिक टॉरपीडो हथियारों से लैस थी। अपनी क्षमताओं के कारण, ग़ाज़ी पाकिस्तान के लिए एक सीक्रेट वेपन के रूप में जानी जाती थी, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना के प्रभुत्व को चुनौती देना था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता गहरे पानी में लंबे समय तक छिपे रहने की क्षमता थी, जिससे यह भारत के लिए एक गंभीर खतरा बन सकती थी।

1971 के युद्ध में ग़ाज़ी का मिशन(Ghazi's Mission in the 1971 War)


1971 के युद्ध से पहले ही पाकिस्तान जानता था कि भारतीय नौसेना के पास शक्तिशाली युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं। पाकिस्तान की मुख्य चिंता थी आयएनएस विक्रांत(INS Vikrant)जो भारतीय नौसेना का सबसे महत्वपूर्ण विमानवाहक पोत था। पाकिस्तानी रणनीतिकारों को लगता था कि यदि वे विक्रांत को नष्ट कर दें, तो भारत की नौसेना कमजोर हो जाएगी।

युद्ध में, पाकिस्तान को यह आशंका थी कि भारतीय विमानवाहक पोत आयएनएस विक्रांत पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना पर हमला कर सकता है। इसलिए, ग़ाज़ी को विशाखापत्तनम के तट के पास तैनात किया गया था, जहां इसे आयएनएस विक्रांत को डूबोने का मिशन सौंपा गया था।

लेकिन भारतीय नौसेना को इस योजना का अंदाजा था, इसलिए उन्होंने आयएनएस विक्रांत को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की ओर भेज दिया, जिससे ग़ाज़ी गलत लोकेशन पर जाकर फंस गई।

ग़ाज़ी कैसे डूबी?( How did Ghazi sink?)


पीएनएस ग़ाज़ी 3-4 दिसंबर 1971 की रात विशाखापट्टनम के तट पर रहस्यमय परिस्थितियों में डूब गई थी। इस घटना को लेकर कई तरह की कहानियां और दावे सामने आए हैं। भारतीय और पाकिस्तानी दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं हैं।

भारतीय नौसेना का दावा(Indian Navy's claim)

भारतीय नौसेना के अनुसार, आयएनएस राजपूत नामक विध्वंसक युद्धपोत को ग़ाज़ी की गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी। भारतीय नौसेना ने 3-4 दिसंबर की रात ग़ाज़ी की संभावित स्थिति पर गश्त लगाई। आयएनएस राजपूत ने ग़ाज़ी की संभावित उपस्थिति को देखते हुए गहराई बम (Depth Charges) गिराए।

इन बमों के फटने से ग़ाज़ी को गंभीर क्षति हुई, जिसके परिणामस्वरूप उसमें विस्फोट हो गया और वह डूब गई। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी तरह से भारतीय नौसेना की सफलता थी

पाकिस्तानी पक्ष की व्याख्या(Explanation of the Pakistani side)

वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि ग़ाज़ी अपने ही बिछाए गए बारूदी सुरंगों (माइंस) की चपेट में आ गई और एक दुर्घटना का शिकार हो गई। पाकिस्तान का दावा है कि ग़ाज़ी भारतीय नौसेना के हमले की वजह से नहीं, बल्कि अपने ही लगाए गए विस्फोटकों के कारण नष्ट हुई।

खनिज विस्फोट सिद्धांत(Mineral Explosion Theory)

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ग़ाज़ी किसी समुद्री खदान (Naval Mine) से टकरा गई, जिससे इसमें विस्फोट हुआ।

ग़ाज़ी के मलबे और जांच(Wreckage and Investigation of Ghazi)


1971 के युद्ध के बाद जब भारतीय नौसेना ने ग़ाज़ी के मलबे की जांच की, तो पाया कि उसका सामने का हिस्सा पूरी तरह से नष्ट हो गया था। इससे यह पुष्टि हुई कि उसके अंदर जबरदस्त विस्फोट हुआ था। लेकिन यह विस्फोट भारतीय नौसेना के गहराई बमों के कारण हुआ या पनडुब्बी के भीतर किसी तकनीकी खराबी के कारण, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका।

ग़ाज़ी के डूबने का महत्व(The significance of Ghazi's sinking)

ग़ाज़ी की डूबने की घटना 1971 के युद्ध में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। इसके कुछ प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित थे:

आयएनएस विक्रांत की सुरक्षा: ग़ाज़ी का मिशन विक्रांत को नष्ट करना था, लेकिन उसकी असफलता से भारतीय नौसेना को बड़ी राहत मिली।

भारतीय नौसेना का मनोबल बढ़ा: भारतीय नौसेना ने इसे अपनी एक बड़ी जीत के रूप में देखा और इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा।

पाकिस्तानी नौसेना को झटका: ग़ाज़ी पाकिस्तान की सबसे आधुनिक पनडुब्बी थी, और इसके डूबने से पाकिस्तानी नौसेना को बड़ा नुकसान हुआ।

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम को गति: ग़ाज़ी की असफलता ने भारतीय नौसेना को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में और अधिक प्रभावी ढंग से ऑपरेशन करने में मदद की।

ग़ाज़ी की तबाही के बाद प्रभाव(Impact After the Destruction of Ghazi)

ग़ाज़ी के डूबने से पाकिस्तान को गहरा झटका लगा, क्योंकि यह उसकी सबसे घातक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पनडुब्बी थी। इसकी तबाही ने न केवल पाकिस्तान की नौसैनिक शक्ति को कमजोर किया, बल्कि उसकी समुद्री रणनीति पर भी गंभीर प्रभाव डाला। दूसरी ओर, यह घटना भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत साबित हुई, जिससे भारतीय नौसेना को समुद्री युद्धक्षेत्र में स्पष्ट बढ़त मिल गई और उसका वर्चस्व स्थापित हो गया। ग़ाज़ी के नुकसान ने पाकिस्तान को यह एहसास कराया कि भारतीय नौसेना के खिलाफ पारंपरिक युद्ध में उसकी स्थिति कमजोर है। इस झटके के बाद, पाकिस्तान ने अपनी समुद्री रक्षा को मजबूत करने के लिए नई पनडुब्बियां खरीदने और अपनी नौसैनिक क्षमताओं को उन्नत करने की दिशा में काम करना शुरू किया।

इतिहास में ग़ाज़ी की जगह(Ghazi's place in history)


आज भी ग़ाज़ी का मलबा विशाखापत्तनम के पास समुद्र की गहराइयों में पड़ा हुआ है, जो 1971 के युद्ध की एक ऐतिहासिक निशानी है। यह घटना नौसैनिक इतिहास में हमेशा एक रहस्यमयी और रोमांचक अध्याय बनी रहेगी।

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