सुशांत का चांद पर है प्लॉट, जानें और कौन खरीद सकता है जमीन

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उनसे जुड़े कई अनकही बातें खुलकर फैन्स के सामने आईं। उनमें से एक है कि सुशांत ने चांद पर जमीन खरीदी थी।

लखनऊ: बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उनसे जुड़े कई अनकही बातें खुलकर फैन्स के सामने आईं। उनमें से एक है कि सुशांत ने चांद पर जमीन खरीदी थी। बहुत से लोगों को इस बात का विश्वास भी नहीं हुआ। बहुत से लोग ये सोच रहे थे कि आखिर कोई चांद पर जमीन कैसे खरीद सकता है। सुशांत की बात करें तो उन्होंने साल 2018 में चांद पर जमीन खरीदी थी।

अपने प्लॉट पर ऐसे रखते थे निगरानी

उन्होंने यह प्लॉट चांद के ‘सी ऑफ मसकोवी’ एरिया में खरीदी। सुशांत अपने इस प्लॉट पर अपनी निगरानी भी रखते थे वो भी अपने घर बैठे- बैठे। उनके पास एक दूरबीन एडवांस टेलिस्कोप 14LX0) था, जिससे वो अपनी खिड़की से चांद पर अपने प्लॉट को देखा करते थे। चांद पर ये ज़मीन उन्होंने इंटरनेशनल लूनर लैंड्स रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदी थी। बता दें कि चांद पर जमीन खरीदने वाले सुशांत Bollywood पहले एक्टर बने थे।

तो चलिए जानते हैं कि क्या कोई चांद पर जमीन खरीद सकता है और खरीद सकता है तो उसके लिए क्या-क्या करना होता है और इसे बेच कौन रहा है? क्या चांद पर किसी व्यक्ति या संस्था का हक होता है?

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क्या कोई चांद पर जता सकता है अपना हक?

एक Fact को यह है कि अंतर्राष्ट्रीय समझौते के मुताबिक, कोई भी देश या फिर सरकार चांद पर अपना हक नहीं जता सकती। वहीं एक दूसरा सच यह भी है कि कई शक्तिशाली देश चांद पर कॉलोनी या बेस बनाने की तैयारी में लगे हुए हैं। इसके अलावा एक यह भी बात है कि कुछ प्राइवेट संस्थाएं भी चांद के हिस्सों पर दावा करके प्लॉट बेच रही हैं।

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किस तरह हो रहा चांद पर कब्जा?

पहले तो यह जानते हैं कि चांद पर किस तरह कब्जे हो रहे हैं? यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी चांद पर 2020 से 2030 के बीच ‘अंतर्राष्ट्रीय गांव’ बनाने की तैयारी कर रही है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) भी चांद पर एक बेस तैयार करने की तैयारी में है। इसके अलावा रुसी अंतरिक्ष एजेंसी Roscosmos भी चांद पर इसी तरह का बेस बनाने की तैयारी में जुटी है और चीन की CNSA भी। तमाम प्रयासों के चलते चांद की जमीन पर हक को लेकर कानूनी पहलुओं पर अक्सर बहस की संभावना रहती है।

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क्या हैं अंतर्राष्ट्रीय समझौते?

आउटर स्पेस ट्रीटी यानी OST साल 1967 में प्रभावशाली हुई। इस समझौते के तहत यह तय हुआ था कि दुनिया में कोई भी देश या सरकार चांद पर किसी भी तरह से अपना दावा नहीं कर सकेगी। साल 2015 तक इस पर 104 देशों ने साइन किया और उसके बाद कम से कम 24 देशों ने भी हस्ताक्षर किए थे। यह संयुक्त राष्ट्र के आउटर स्पेस अफेयर्स ऑफिस में सेफ है। लेकिन इस समझौते में एक बड़ा लूपहोल है, जिसका कुछ संस्थाओं ने फायदा उठाने की पूरी कोशिश की।

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क्या कोई प्राइवेट सेक्टर चांद पर बेच सकता है चांद?

इस संबंध पर कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसी समझौते के आर्टिकल VI में इस बात का जिक्र है कि किसी भी दावेदार के एक्शन के लिए संबंधित सरकारें जिम्मेदारी होंगी। हालांकि यह भाषा स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह इतना बताती है कि इस समझौते का उद्देश्य सरकारी हो या निजी, हर दावे को खारिज करना है।

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क्या किसी काम की होती है चांद पर जमीन?

अगर यह मान लिया जाए कि कानूनन कोई ऐसा सख्त प्रावधान नहीं है, जो निजी सेक्टर को चांद की जमीन पर दावा करने या बेचने से रोके तो सवाल यह भी उठता है कि आखिर चांद पर ली गई जमीद क्या फायदा होता है? चांद पर 100 से लेकर -173 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान बना रहता है। इसके अलावा धरती की तुलना में ग्रेविटी केवल 16.5 फीसदी होती है और वहां पर कठोर धूल होती है।

वहीं चांद पर केवल ट्रेन किए हुए अंतरिक्ष यात्री ही जा सकते हैं, वो भी कुछ समय के लिए ही। इसके अलावा अभी अगली कुछ सदियों तक चांद पर सामान्य जीवन की कोई संभावना नहीं है।

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सुशांत ने कैसे खरीदी जमीन?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने लूनर लैंड नाम की संस्था के माध्यम से वहां पर जमीन खरीदा। सुशांत चांद पर प्लॉट खरीदने वाले पहले बॉलीवुड अभिनेता थे। इससे पहले शाहरुख को एक फैन ने चांद पर जमीन गिफ्ट की थी। वहीं अगर बात की जाए लूनर लैंड संस्था तो इसकी वेबसाइट पर इससे जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां हैं।

वेबसाइट के मुताबिक, 1967 के समझौते में जो लूपहोल रह गया है, उसी का फायदा उठाते हुए यह संस्था कई सालों से चांद पर जमीन बेच रही है और अब तक यह तकरीबन 30 करोड़ एकड़ ज़मीन बेच चुकी है। प्रति एकड़ के लिए 20 डॉलर तक चार्ज करती है।

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