article 370

कश्मीर घाटी में तीन महीने से बंद रेल सेवा 11 नवंबर सोमवार को फिर से शुरू की जाएगी। जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद होने वाले खतरों को देखते हुए रेल सेवा बंद की गई थी।

दरअसल, 1045 पन्नों के फैसले में इसे लिखने वाले जज के नाम का जिक्र कोर्ट ने नहीं किया, जबकि बेंच की तरफ से कोई एक जज फैसला लिखता है तो डॉक्युमेंट में उसके नाम का जिक्र होता है। वैसे यह फैसला मोदी शासन के दौरान आया।

अभी तक भारत की तरफ से किसी भी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को जम्मू कश्मीर का दौरा करने की इजाजत नहीं दी गई थी। ऐसे में यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाए जाने के बाद  से पाकिस्तान की तरफ सीजफायर की घटनाएं बढ़ी है। अभी कुछ दिन पहले पाकिस्तान के सैनिकों ने कश्मीर के तंगधार और केरन सेक्टर में गोलीबारी की थी। भारतीय सैनिकों ने इस गोलीबारी के जवाब में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दिया।

घाटी से आर्टिकल 370 हटाये जाने से पाकिस्तान अभी तक बौखलाया हुआ है। ऐसे में वह लगातार भारत को परेशान करने का प्लान बना तो रहा है लेकिन उसकी नापाक हरकतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।

आज यानि 10 अक्टूबर से पर्यटकों के प्रवेश पर से प्रतिबंध को हटा दिया गया है और अब पर्यटक जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों में घूमने जा सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर (Jammu kashmir) के सामान्य स्थिति में लौटने की दिशा में राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने एक बड़ा फैसला लिया। राज्यपाल ने सोमवार को दो महीने पहले जारी की गई ट्रैवल एडवाइजरी को वापस ले लिया।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन 'JNUSU' के उपाध्यक्ष साकेत मून ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता और शोधकर्ता 15 दिन पहले घाटी में गए थे । उन्होंने  ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में गए और वहां के हालात की जानकारी ली। फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य वीडियोज और रिपोर्ट्स पेश करेंगे ताकि कश्मीर की असली तस्वीर का पता लग सके ।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आज छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों के बीच झड़प हो गई।