babri masjid

अयोध्या भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई पहली पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि अयोध्या की विवादित भूमि को हिंदू पक्ष को देना उन्हें बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए ईनाम देने जैसा है।

6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी है और इससे पहले अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है।

6 दिसम्बर 1992 केा अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा गिराये जाने के मामले में लखनऊ की एक विशेष अदालत में चल रहे आपराधिक केस में अप्रैल 2020 तक फैसला आ सकता है।

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के दिल्ली स्थित आवास पर बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में योग गरु बाबा रामदेव, हिन्दू धर्म आचार्य सभा के संयोजक स्वामी परमात्मानंद सहित कई नेता पहुंचे हैं।

लेकिन इन सबके बावजूद अगर मंदिर निर्माण नहीं शुरू होता है तो बहुसंख्यकों में विभाजन को रोक पाना भाजपा के लिए मुश्किल होगा। इकलौता मंदिर निर्माण ऐसा मुद्दा है जो एक बार फिर बहुसंख्यकों द्वारा बहुमत की सरकार बनाने के मोदी के फार्मूले को दोहरा सकता है।

इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस अगले महीने 18 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि उससे पहले इस ऐतिहासिक मामले पर फैसला आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर विवाद पर बुधवार को सुनवाई खत्म हो गई है। पहले हिंदू और फिर मुस्लिम पक्ष ने देश की सबसे बड़ी अदालत में अपनी-अपनी आखिरी दलीलें रखीं। आखिर में मुस्लिम पक्ष ने दलीलें रखीं। इसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र को राजस्थान के नए राज्यपाल के रूप में नामित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप को फिर से बहाल करने का आदेश दिया था।

अंसारी ने कहा कि मुझे भी श्रीश्री के नाम पर आपत्ति है। कोर्ट की ओर से उनका नाम पैनल में शामिल किया गया है। कोर्ट से और भी नाम पैनल में शामिल होने चाहिए। इससे साधु-संतों की आपत्ति को दूर किया जा सके और बातचीत की स्थिति बने।